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Pathar, ओडिशा का पंचांग शुक्र 1 मई 2026

ओडिशा, भारत

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में

पूर्णिमा

शुक्ल पक्ष · 22:53 तक

फिर प्रतिपदा · 00:50 रवि तक

त्योहार

बुद्ध पूर्णिमा

बुद्ध पूर्णिमा शुक्र 1 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है। शुक्र 1 मई क्यों?

बुद्ध पूर्णिमा: Pathar में हर तारीख़

व्रत

पूर्णिमा

पूर्णिमा शुक्र 1 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है। शुक्र 1 मई क्यों?

पूर्णिमा: Pathar में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

03:51 05:20 18:12अगला सूर्योदय 05:20 शनि

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 05:20–06:57चरसामान्य
  • 06:57–08:33लाभगुलिक काल में
  • 08:33–10:10अमृतशुभ
  • 10:10–11:46कालअशुभ
  • 11:46–13:22शुभ
  • 13:22–14:59रोगअशुभ
  • 14:59–16:35उद्वेगअशुभ
  • 16:35–18:12चरसामान्य

रात का चौघड़िया

  • 18:12–19:35रोगअशुभ
  • 19:35–20:59कालअशुभ
  • 20:59–22:22लाभशुभ
  • 22:22–23:46उद्वेगअशुभ
  • 23:46–01:09 शनिशुभ
  • 01:09–02:33 शनिअमृतशुभ
  • 02:33–03:56 शनिचरसामान्य
  • 03:56–05:20 शनिरोगअशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, शुक्र 1 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 03:51–04:36, शुभ
  • चर, सामान्य, 05:20–06:57
  • लाभ, शुभ, 06:57–08:33
  • अमृत, शुभ, 08:33–10:10
  • काल, अशुभ, 10:10–11:46
  • शुभ, 11:46–13:22
  • रोग, अशुभ, 13:22–14:59
  • उद्वेग, अशुभ, 14:59–16:35
  • चर, सामान्य, 16:35–18:12
  • रोग, अशुभ, 18:12–19:35
  • काल, अशुभ, 19:35–20:59
  • लाभ, शुभ, 20:59–22:22
  • उद्वेग, अशुभ, 22:22–23:46
  • शुभ, 23:46–01:09 शनि
  • अमृत, शुभ, 01:09–02:33 शनि
  • चर, सामान्य, 02:33–03:56 शनि
  • रोग, अशुभ, 03:56–05:20 शनि
  • गुलिक काल, 06:57–08:33, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 07:55–08:46, अशुभ
  • राहु काल, 10:10–11:46, अशुभ
  • अभिजीत मुहूर्त, 11:20–12:12, शुभ
  • दुर्मुहूर्त, 12:12–13:03, अशुभ
  • यमगण्ड, 14:59–16:35, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 03:51–04:35 शनि

हर मान कैसे निकलता है

Pathar में बुद्ध पूर्णिमा शुक्र 1 मई को क्यों है?

बुद्ध पूर्णिमा शुक्र 1 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है।

पूर्णिमा 04:00 05:00 06:00 07:00 शुक्र 1 मई स्मार्त · वैष्णव सूर्योदय 05:20
पूर्णिमा 04:00 05:00 06:00 07:00 शुक्र 1 मई स्मार्त · वैष्णव सूर्योदय 05:20
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। रेखा: सूर्योदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

बुद्ध पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा गुरु 30 अप्रैल को 21:13 से शुक्र 1 मई को 22:53 तक है, इसलिए वह केवल शुक्र 1 मई के सूर्योदय (05:20) पर है। बुद्ध पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।

बुद्ध पूर्णिमा: Pathar में हर तारीख़

Pathar में पूर्णिमा शुक्र 1 मई को क्यों है?

पूर्णिमा शुक्र 1 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है।

पूर्णिमा 04:00 05:00 06:00 07:00 शुक्र 1 मई स्मार्त · वैष्णव सूर्योदय 05:20
पूर्णिमा 04:00 05:00 06:00 07:00 शुक्र 1 मई स्मार्त · वैष्णव सूर्योदय 05:20
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। रेखा: सूर्योदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा गुरु 30 अप्रैल को 21:13 से शुक्र 1 मई को 22:53 तक है, इसलिए वह केवल शुक्र 1 मई के सूर्योदय (05:20) पर है। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।

पूर्णिमा: Pathar में हर तारीख़

शुक्र 1 मई को कौन सी तिथि है? शुक्ल पूर्णिमा

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 171.8° आगे था: शुक्ल पूर्णिमा।

सूर्य अमावस्या 0° 171.8° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण पूर्णिमा 168°–180° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 171.8° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण पूर्णिमा 168°–180° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 168°–180° पंद्रहवीं है, शुक्ल पूर्णिमा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:20। चतुर्दशी उससे पहले 21:13 गुरु पर समाप्त हुई। पूर्णिमा 22:53 को समाप्त होगी, जब बढ़त 180° होगी। बढ़त 17 अप्रैल की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।

शुक्र 1 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 03:51–04:36

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 03:51–04:36।

सूर्यास्त 18:11 गुरु सूर्योदय 05:20 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं गुरु 30 अप्रैल का दिन 14 1
सूर्यास्त 18:11 गुरु सूर्योदय 05:20 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं गुरु 30 अप्रैल का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · गुरुवार का दिन धुँधला

गुरु 30 अप्रैल की रात सूर्यास्त 18:11 गुरु से सूर्योदय 05:20 तक थी, 11 घं 9 मि। इसे 44 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

शुक्र 1 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:20–12:12

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:20–12:12।

शुक्र 1 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 07:55–08:46

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 07:55–08:46 और 12:12–13:03।

शुक्र 1 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 12:12–13:03

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 07:55–08:46 और 12:12–13:03।

सूर्योदय 05:20 सूर्यास्त 18:12 सूर्योदय 05:20 शनि समय, ऊँचाई नहीं 8 4 9 1
सूर्योदय 05:20 सूर्यास्त 18:12 सूर्योदय 05:20 शनि समय, ऊँचाई नहीं 8 4 9 1
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 4, 9

यहाँ दिन, 05:20 से 18:12, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 51 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 07:55–08:46 और 12:12–13:03।

शुक्र 1 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

05:20–06:57 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।

सूर्योदय 05:20 सूर्यास्त 18:12 सूर्योदय 05:20 शनि समय, ऊँचाई नहीं चर
सूर्योदय 05:20 सूर्यास्त 18:12 सूर्योदय 05:20 शनि समय, ऊँचाई नहीं चर
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 05:20 से 18:12, 1 घं 36 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 18:12 से 05:20 शनि, 1 घं 23 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

शुक्र 1 मई को राहुकाल कब है? 10:10–11:46

राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:10–11:46।

शुक्र 1 मई को यमगंड कब है? 14:59–16:35

यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 14:59–16:35।

शुक्र 1 मई को गुलिक काल कब है? 06:57–08:33

गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 06:57–08:33।

सूर्योदय 05:20 सूर्यास्त 18:12 सूर्योदय 05:20 शनि समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 05:20 सूर्यास्त 18:12 सूर्योदय 05:20 शनि समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: गुलिक काल 2, यमगण्ड 7

यहाँ दिन 05:20 से 18:12 तक है, 12 घं 52 मि। इसे 1 घं 36 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।

सूर्योदय और सूर्यास्त

शुक्र 1 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 05:20

यहाँ दिन: सूर्योदय 05:20, सूर्यास्त 18:12, 12 घं 52 मि का दिन।

शुक्र 1 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:12

यहाँ दिन: सूर्योदय 05:20, सूर्यास्त 18:12, 12 घं 52 मि का दिन।

सूर्योदय 05:20 सूर्यास्त 18:12 सूर्योदय 05:20 शनि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रोदय 17:59
सूर्योदय 05:20 सूर्यास्त 18:12 सूर्योदय 05:20 शनि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रोदय 17:59
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 52 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 8 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 52 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 8 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

शुक्र 1 मई को कौन सा नक्षत्र है? स्वाती

सूर्योदय पर चंद्रमा 188.2° पर था: स्वाती, पद 1।

चंद्रमा सूर्य 0° स्वाती चंद्रमा 188.2° अगला: विशाखा पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° स्वाती चंद्रमा 188.2° अगला: विशाखा पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। स्वाती 186°40′–200°00′ तक है; चंद्रमा 186°40′ पर उसके पद 1 में आया। वह 04:35 शनि को निकलेगा, विशाखा में।

शुक्र 1 मई को कौन सा योग है? सिद्धि

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 204.6° थे: सिद्धि।

सूर्य 16.4° + चंद्रमा 188.2° = 204.6° सिद्धि 200°00′–213°20′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 16.4° + चंद्रमा 188.2° = 204.6° सिद्धि 200°00′–213°20′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 16.4° + 188.2° = 204.6°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 200°00′–213°20′ सोलहवाँ है, सिद्धि। यह 21:13 को समाप्त होता है, फिर व्यतीपात।

शुक्र 1 मई को कौन सा करण है? विष्टि

सूर्योदय पर बढ़त 171.8° थी: पूर्णिमा का पहला आधा, विष्टि।

सूर्य अमावस्या 0° 171.8° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण पूर्णिमा 168°–180° विष्टि 168°–174° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 171.8° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण पूर्णिमा 168°–180° विष्टि 168°–174° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पूर्णिमा का पहला आधा विष्टि है और दूसरा बव। विष्टि 10:00 तक है, जब बढ़त 174° होगी; बव 22:53 तक।

शुक्र 1 मई को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार

यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 05:20, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।

शुक्रवार सूर्योदय 05:20 सूर्यास्त 18:12 सूर्योदय 05:20 शनि समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शनि अब भी शुक्रवार
शुक्रवार सूर्योदय 05:20 सूर्यास्त 18:12 सूर्योदय 05:20 शनि समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शनि अब भी शुक्रवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:20 से 05:20 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।

शुक्र 1 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख

यह मास 17 अप्रैल की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।

मेष वृषभ 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
मेष वृषभ 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ

अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 15 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 17 मई, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।

शुक्र 1 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष वैशाख का है।

अमान्त वैशाख पूर्णिमान्त वैशाख कृष्ण शुक्ल शुक्र 1 मई पूर्णिमा 2 अप्रैल अमावस्या 17 अप्रैल पूर्णिमा 1 मई अमावस्या 17 मई
अमान्त वैशाख पूर्णिमान्त वैशाख कृष्ण शुक्ल शुक्र 1 मई पूर्णिमा 2 अप्रैल अमावस्या 17 अप्रैल पूर्णिमा 1 मई अमावस्या 17 मई
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 17 अप्रैल की अमावस्या ने, सूर्य मेष में, वैशाख शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में वैशाख है।

शुक्र 1 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 2083 · शक 1948

विक्रम संवत 2083 19 मार्च 2026 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 19 मार्च 2026 06:53 · सूर्य मीन में सूर्योदय, शुक्र 1 मई सूर्य 16.4° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 19 मार्च 2026 06:53 · सूर्य मीन में सूर्योदय, शुक्र 1 मई सूर्य 16.4° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 19 मार्च 2026, 06:53 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 42.2° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2083 गिनता है; शक संवत 1948।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

शुक्र 1 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 17:59

चंद्रमा यहाँ 17:59 पर उदय होता है।

सूर्योदय 05:20 सूर्यास्त 18:12 सूर्योदय 05:20 शनि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रोदय 17:59
सूर्योदय 05:20 सूर्यास्त 18:12 सूर्योदय 05:20 शनि समय, ऊँचाई नहीं चंद्रोदय 17:59
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

चंद्रमा 17:59 पर, दिन में, उदय होता है और अगले सूर्योदय से पहले अस्त नहीं होता।

चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच अस्त नहीं होता।