Myshkin, यरोस्लावी ओब्लास्ट, रूस का पंचांग सोम 31 अक्टूबर 2016
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय MSK में
त्योहार
गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा सोम 31 अक्टूबर को है: उस सुबह पूरे प्रातःकाल में प्रतिपदा है, और किसी सुबह नहीं। सोम 31 अक्टूबर क्यों?
गोवर्धन पूजा: Myshkin में हर तारीख़31 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, सोम 31 अक्टूबर
- 05:38–06:37ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:37 से
- 07:37–08:45अमृत चौघड़िया
- 09:53–11:01शुभ चौघड़िया
- 12:09–12:27अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 14:52–15:32लाभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 15:32–16:40अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 16:40 के बाद
- 22:17–00:10 मंगललाभ चौघड़िया
- 02:02–03:55 मंगलशुभ चौघड़िया
-
02:36–04:24 मंगलअमृत कालविशाखा में
- 03:55–05:47 मंगलअमृत चौघड़िया
- 05:40–06:39 मंगलअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:37–08:45अमृतशुभ
- 08:45–09:53कालअशुभ
- 09:53–11:01शुभ
- 11:01–12:09रोगअशुभ
- 12:09–13:17उद्वेगअशुभ
- 13:17–14:24चरसामान्य
- 14:24–15:32लाभशुभ
- 15:32–16:40अमृतशुभ
रात का चौघड़िया
- 16:40–18:33चरसामान्य
- 18:33–20:25रोगअशुभ
- 20:25–22:17कालअशुभ
- 22:17–00:10 मंगललाभशुभ
- 00:10–02:02 मंगलउद्वेगअशुभ
- 02:02–03:55 मंगलशुभ
- 03:55–05:47 मंगलअमृतशुभ
- 05:47–07:39 मंगलचरसामान्य
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, सोम 31 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:38–06:37, शुभ
- अमृत, शुभ, 07:37–08:45
- काल, अशुभ, 08:45–09:53
- शुभ, 09:53–11:01
- रोग, अशुभ, 11:01–12:09
- उद्वेग, अशुभ, 12:09–13:17
- चर, सामान्य, 13:17–14:24
- लाभ, शुभ, 14:24–15:32
- अमृत, शुभ, 15:32–16:40
- चर, सामान्य, 16:40–18:33
- रोग, अशुभ, 18:33–20:25
- काल, अशुभ, 20:25–22:17
- लाभ, शुभ, 22:17–00:10 मंगल
- उद्वेग, अशुभ, 00:10–02:02 मंगल
- शुभ, 02:02–03:55 मंगल
- अमृत, शुभ, 03:55–05:47 मंगल
- चर, सामान्य, 05:47–07:39 मंगल
- राहु काल, 08:45–09:53, अशुभ
- यमगण्ड, 11:01–12:09, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:51–12:27, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 12:27–13:03, अशुभ
- गुलिक काल, 13:17–14:24, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:15–14:52, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:40–06:39 मंगल
हर मान कैसे निकलता है
Myshkin में गोवर्धन पूजा सोम 31 अक्टूबर को क्यों है?
गोवर्धन पूजा सोम 31 अक्टूबर को है: उस सुबह पूरे प्रातःकाल में प्रतिपदा है, और किसी सुबह नहीं।
गोवर्धन पूजा प्रातःकाल में होती है, दिन का पहला पाँचवाँ भाग। प्रतिपदा रवि 30 अक्टूबर को 20:38 से सोम 31 अक्टूबर को 23:09 तक है, इसलिए केवल सोमवार का प्रातःकाल (07:37–09:26) उसके भीतर है। गोवर्धन पूजा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रातःकाल Tithika की परिपाटी है।
सोम 31 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल प्रतिपदा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 5° आगे था: शुक्ल प्रतिपदा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 0°–12° पहली है, शुक्ल प्रतिपदा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:37। अमावस्या उससे पहले 20:38 रवि पर समाप्त हुई। प्रतिपदा 23:09 को समाप्त होगी, जब बढ़त 12° होगी। बढ़त 30 अक्टूबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
सोम 31 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:38–06:37
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:38–06:37।
रवि 30 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 16:43 रवि से सूर्योदय 07:37 तक थी, 14 घं 54 मि। इसे 59 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
सोम 31 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:51–12:27
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:51–12:27।
सोम 31 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 12:27–13:03
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 12:27–13:03 और 14:15–14:52।
सोम 31 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:15–14:52
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 12:27–13:03 और 14:15–14:52।
यहाँ दिन, 07:37 से 16:40, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 36 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। सोमवार को दुर्मुहूर्त नौवाँ और बारहवाँ है, 12:27–13:03 और 14:15–14:52।
सोम 31 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:37–08:45 अमृत है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:37 से 16:40, 1 घं 7 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 16:40 से 07:39 मंगल, 1 घं 52 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
सोम 31 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 08:45–09:53
राहु काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:45–09:53।
सोम 31 अक्टूबर को यमगंड कब है? 11:01–12:09
यमगण्ड सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:01–12:09।
सोम 31 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 13:17–14:24
गुलिक काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:17–14:24।
यहाँ दिन 07:37 से 16:40 तक है, 9 घं 3 मि। इसे 1 घं 7 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: सोमवार को राहु काल दूसरा भाग है, यमगण्ड चौथा और गुलिक काल छठा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सोम 31 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:37
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:37, सूर्यास्त 16:40, 9 घं 3 मि का दिन।
सोम 31 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 16:40
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:37, सूर्यास्त 16:40, 9 घं 3 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 3 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 59 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 3 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 59 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सोम 31 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? स्वाती
सूर्योदय पर चंद्रमा 199.1° पर था: स्वाती, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। स्वाती 186°40′–200°00′ तक है; चंद्रमा 196°40′ पर उसके पद 4 में आया। वह 09:30 को निकलेगा, विशाखा में।
सोम 31 अक्टूबर को कौन सा योग है? आयुष्मान्
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 393.2° थे, एक चक्कर और 33.2°: आयुष्मान्।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 194.1° + 199.1° = 393.2°, एक पूरा चक्कर और 33.2°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 26°40′–40°00′ तीसरा है, आयुष्मान्। यह 20:23 को समाप्त होता है, फिर सौभाग्य।
सोम 31 अक्टूबर को कौन सा करण है? किंस्तुघ्न
सूर्योदय पर बढ़त 5° थी: प्रतिपदा का पहला आधा, किंस्तुघ्न।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए प्रतिपदा का पहला आधा किंस्तुघ्न है और दूसरा बव। किंस्तुघ्न 09:53 तक है, जब बढ़त 6° होगी; बव 23:09 तक।
सोम 31 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? सोमवार
यह दिन सोमवार को सूर्योदय, 07:37, पर शुरू हुआ: सोमवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:37 से 07:39 मंगल तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी सोमवार के हैं।
सोम 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? कार्तिक
यह मास 30 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य तुला में था: कार्तिक।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: तुला से कार्तिक। सूर्य 16 नवंबर को, मास के भीतर, वृश्चिक में जाता है। अगली अमावस्या, 29 नवंबर, उसे वृश्चिक में पाती है और मार्गशीर्ष शुरू करती है।
सोम 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 30 अक्टूबर की अमावस्या ने, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में कार्तिक है।
सोम 31 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2073 · शक 1938
विक्रम संवत 2073 7 अप्रैल 2016 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 7 अप्रैल 2016, 14:23 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 200.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2073 गिनता है; शक संवत 1938।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
सोम 31 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 07:51
चंद्रमा यहाँ 07:51 पर उदय होता है।
सोम 31 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:27
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 07:51 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 17:27 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 07:51 पर उदय हुआ; वह फिर 17:27 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।