Myjava, स्लोवाकिया का पंचांग गुरु 14 अक्टूबर 2038
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय CET में
कृष्ण पक्ष · 07:41 तक
फिर द्वितीया · 10:12 शुक्र तक
प्रतिपदा यहाँ दो सूर्योदयों तक है कारण जानें14 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 14 अक्टूबर
- 04:23–05:16ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:08 से
- 06:08–07:30शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
-
10:29–10:55अमृत कालगुलिक काल, दुर्मुहूर्त छोड़कर · अश्विनी में
- 11:13–11:57अभिजीत मुहूर्त
- 11:35–12:56लाभ चौघड़िया
- 12:56–14:18अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 15:40–17:02शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:02 के बाद
- 17:02–18:40अमृत चौघड़िया
- 23:35–01:14 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 02:52–04:31 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:31–06:09 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:24–05:17 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:08–07:30शुभयमगण्ड में
- 07:30–08:51रोगअशुभ
- 08:51–10:13उद्वेगअशुभ
- 10:13–11:35चरसामान्य
- 11:35–12:56लाभशुभ
- 12:56–14:18अमृतराहु काल में
- 14:18–15:40कालअशुभ
- 15:40–17:02शुभ
रात का चौघड़िया
- 17:02–18:40अमृतशुभ
- 18:40–20:19चरसामान्य
- 20:19–21:57रोगअशुभ
- 21:57–23:35कालअशुभ
- 23:35–01:14 शुक्रलाभशुभ
- 01:14–02:52 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 02:52–04:31 शुक्रशुभ
- 04:31–06:09 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 14 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:23–05:16, शुभ
- शुभ, 06:08–07:30
- रोग, अशुभ, 07:30–08:51
- उद्वेग, अशुभ, 08:51–10:13
- चर, सामान्य, 10:13–11:35
- लाभ, शुभ, 11:35–12:56
- अमृत, शुभ, 12:56–14:18
- काल, अशुभ, 14:18–15:40
- शुभ, 15:40–17:02
- अमृत, शुभ, 17:02–18:40
- चर, सामान्य, 18:40–20:19
- रोग, अशुभ, 20:19–21:57
- काल, अशुभ, 21:57–23:35
- लाभ, शुभ, 23:35–01:14 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:14–02:52 शुक्र
- शुभ, 02:52–04:31 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:31–06:09 शुक्र
- यमगण्ड, 06:08–07:30, अशुभ
- गुलिक काल, 08:51–10:13, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:46–10:29, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:13–11:57, शुभ
- राहु काल, 12:56–14:18, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:07–14:51, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:24–05:17 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण प्रतिपदा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 191.3° आगे था: कृष्ण प्रतिपदा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 180°–192° सोलहवीं है, कृष्ण प्रतिपदा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:08। पूर्णिमा उससे पहले 05:21 बुध पर समाप्त हुई। प्रतिपदा 07:41 को समाप्त होगी, जब बढ़त 192° होगी। बढ़त 13 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
प्रतिपदा दो सूर्योदयों पर क्यों है?
प्रतिपदा यहाँ बुध 13 और गुरु 14 अक्टूबर दोनों के सूर्योदय पर है।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। प्रतिपदा 05:21 बुध को, सूर्योदय 06:06 बुध से पहले, शुरू हुई और 07:41 को, अगले सूर्योदय 06:08 के बाद, समाप्त होगी। दोनों दिन प्रतिपदा है: यह यहाँ वृद्धि तिथि है।
गुरु 14 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:23–05:16
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:23–05:16।
बुध 13 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 17:04 बुध से सूर्योदय 06:08 तक थी, 13 घं 4 मि। इसे 52 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 14 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:13–11:57
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:13–11:57।
गुरु 14 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 09:46–10:29
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:46–10:29 और 14:07–14:51।
गुरु 14 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:07–14:51
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:46–10:29 और 14:07–14:51।
यहाँ दिन, 06:08 से 17:02, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 43 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 09:46–10:29 और 14:07–14:51।
गुरु 14 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:08–07:30 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:08 से 17:02, 1 घं 21 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:02 से 06:09 शुक्र, 1 घं 38 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 14 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 12:56–14:18
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 12:56–14:18।
गुरु 14 अक्टूबर को यमगंड कब है? 06:08–07:30
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:08–07:30।
गुरु 14 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 08:51–10:13
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 08:51–10:13।
यहाँ दिन 06:08 से 17:02 तक है, 10 घं 54 मि। इसे 1 घं 21 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 14 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:08
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:08, सूर्यास्त 17:02, 10 घं 54 मि का दिन।
गुरु 14 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:02
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:08, सूर्यास्त 17:02, 10 घं 54 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 54 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 7 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 54 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 7 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? अश्विनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 7.9° पर था: अश्विनी, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। अश्विनी 0°00′–13°20′ तक है; चंद्रमा 6°40′ पर उसके पद 3 में आया। वह 17:11 को निकलेगा, भरणी में।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा योग है? हर्षण
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 184.5° थे: हर्षण।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 176.6° + 7.9° = 184.5°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 173°20′–186°40′ चौदहवाँ है, हर्षण। यह 10:18 को समाप्त होता है, फिर वज्र।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा करण है? कौलव
सूर्योदय पर बढ़त 191.3° थी: प्रतिपदा का दूसरा आधा, कौलव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए प्रतिपदा का पहला आधा बालव है और दूसरा कौलव। बालव 18:30 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 186° हुई; कौलव 07:41 तक है।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:08, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:08 से 06:09 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 28 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 28 अक्टूबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 28 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
गुरु 14 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2095 · शक 1960
विक्रम संवत 2095 4 अप्रैल 2038 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 4 अप्रैल 2038, 17:43 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 186° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2095 गिनता है; शक संवत 1960।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 14 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 17:57
चंद्रमा यहाँ 17:57 पर उदय होता है।
गुरु 14 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 07:03
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 07:03 पर अस्त हुआ; वह फिर 17:57 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 07:03 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 17:57 पर उदय होगा।