Myjava, स्लोवाकिया का पंचांग रवि 14 दिसंबर 2036
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय CET में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत रवि 14 दिसंबर को है: उस शाम त्रयोदशी प्रदोष काल का सोम 15 दिसंबर से अधिक भाग घेरती है। रवि 14 दिसंबर क्यों?
प्रदोष व्रत: Myjava में हर तारीख़व्रत का पारण
सफला एकादशी
14 दिसंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 14 दिसंबर
- 05:29–06:32ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:35 से
- 09:40–10:42लाभ चौघड़िया
- 10:42–11:44अमृत चौघड़िया
- 11:27–11:44अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 12:46–13:48शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 15:53 के बाद
- 15:53–17:51शुभ चौघड़िया
- 17:51–19:49अमृत चौघड़िया
- 01:42–03:40 सोमलाभ चौघड़िया
-
02:36–04:13 सोमअमृत कालविशाखा में
- 05:38–07:36 सोमशुभ चौघड़िया
- 05:30–06:33 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:35–08:37उद्वेगअशुभ
- 08:37–09:40चरसामान्य
- 09:40–10:42लाभशुभ
- 10:42–11:44अमृतशुभ
- 11:44–12:46कालअशुभ
- 12:46–13:48शुभ
- 13:48–14:51रोगअशुभ
- 14:51–15:53उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 15:53–17:51शुभ
- 17:51–19:49अमृतशुभ
- 19:49–21:46चरसामान्य
- 21:46–23:44रोगअशुभ
- 23:44–01:42 सोमकालअशुभ
- 01:42–03:40 सोमलाभशुभ
- 03:40–05:38 सोमउद्वेगअशुभ
- 05:38–07:36 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 14 दिसंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:29–06:32, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 07:35–08:37
- चर, सामान्य, 08:37–09:40
- लाभ, शुभ, 09:40–10:42
- अमृत, शुभ, 10:42–11:44
- काल, अशुभ, 11:44–12:46
- शुभ, 12:46–13:48
- रोग, अशुभ, 13:48–14:51
- उद्वेग, अशुभ, 14:51–15:53
- शुभ, 15:53–17:51
- अमृत, शुभ, 17:51–19:49
- चर, सामान्य, 19:49–21:46
- रोग, अशुभ, 21:46–23:44
- काल, अशुभ, 23:44–01:42 सोम
- लाभ, शुभ, 01:42–03:40 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 03:40–05:38 सोम
- शुभ, 05:38–07:36 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 11:27–12:01, शुभ
- यमगण्ड, 11:44–12:46, अशुभ
- गुलिक काल, 13:48–14:51, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:46–15:20, अशुभ
- राहु काल, 14:51–15:53, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:30–06:33 सोम
हर मान कैसे निकलता है
Myjava में प्रदोष व्रत रवि 14 दिसंबर को क्यों है?
प्रदोष व्रत रवि 14 दिसंबर को है: उस शाम त्रयोदशी प्रदोष काल का सोम 15 दिसंबर से अधिक भाग घेरती है।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी रवि 14 दिसंबर को 16:28 से सोम 15 दिसंबर को 16:03 तक है, और दोनों शाम प्रदोष काल को छूती है। निर्णयसिंधु वह शाम लेता है जिसका प्रदोष काल उसमें अधिक है: रवि 14 दिसंबर। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
रवि 14 दिसंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 319.4° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:35। एकादशी उससे पहले 17:15 शनि पर समाप्त हुई। द्वादशी 16:28 को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 3 दिसंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
रवि 14 दिसंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:29–06:32
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:29–06:32।
शनि 13 दिसंबर की रात सूर्यास्त 15:53 शनि से सूर्योदय 07:35 तक थी, 15 घं 42 मि। इसे 1 घं 2 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 14 दिसंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:27–12:01
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:27–12:01।
रवि 14 दिसंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:46–15:20
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 14:46–15:20।
यहाँ दिन, 07:35 से 15:53, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 33 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 14:46–15:20।
रवि 14 दिसंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:35–08:37 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:35 से 15:53, 1 घं 2 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 15:53 से 07:36 सोम, 1 घं 57 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 14 दिसंबर को राहुकाल कब है? 14:51–15:53
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 14:51–15:53।
रवि 14 दिसंबर को यमगंड कब है? 11:44–12:46
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 11:44–12:46।
रवि 14 दिसंबर को गुलिक काल कब है? 13:48–14:51
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 13:48–14:51।
यहाँ दिन 07:35 से 15:53 तक है, 8 घं 18 मि। इसे 1 घं 2 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 14 दिसंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:35
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:35, सूर्यास्त 15:53, 8 घं 18 मि का दिन।
रवि 14 दिसंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 15:53
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:35, सूर्यास्त 15:53, 8 घं 18 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 8 घं 18 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 15 घं 43 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 8 घं 18 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 15 घं 43 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 14 दिसंबर को कौन सा नक्षत्र है? स्वाती
सूर्योदय पर चंद्रमा 197.9° पर था: स्वाती, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। स्वाती 186°40′–200°00′ तक है; चंद्रमा 196°40′ पर उसके पद 4 में आया। वह 11:20 को निकलेगा, विशाखा में।
रवि 14 दिसंबर को कौन सा योग है? अतिगण्ड
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 436.4° थे, एक चक्कर और 76.4°: अतिगण्ड।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 238.5° + 197.9° = 436.4°, एक पूरा चक्कर और 76.4°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 66°40′–80°00′ छठा है, अतिगण्ड। यह 13:36 को समाप्त होता है, फिर सुकर्मा।
रवि 14 दिसंबर को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 319.4° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 04:49 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 318° हुई; तैतिल 16:28 तक है।
रवि 14 दिसंबर को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 07:35, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:35 से 07:36 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 14 दिसंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? मार्गशीर्ष
यह मास 18 नवंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य वृश्चिक में था: मार्गशीर्ष।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: वृश्चिक से मार्गशीर्ष। सूर्य 15 दिसंबर को, मास के भीतर, धनु में जाता है। अगली अमावस्या, 17 दिसंबर, उसे धनु में पाती है और पौष शुरू करती है।
रवि 14 दिसंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? पौष
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष पौष का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 17 दिसंबर की अमावस्या, सूर्य धनु में, पौष शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ पौष है, और अमान्त गणना में मार्गशीर्ष।
रवि 14 दिसंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2093 · शक 1958
विक्रम संवत 2093 27 मार्च 2036 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 27 मार्च 2036, 21:56 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 255.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2093 गिनता है; शक संवत 1958।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 14 दिसंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 04:50 सोम
चंद्रमा यहाँ 04:50 सोम पर उदय होता है।
रवि 14 दिसंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 14:18
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:18 पर अस्त हुआ; वह फिर 04:50 सोम पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:18 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 04:50 सोम पर उदय होगा।