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Myjava, स्लोवाकिया का पंचांग रवि 30 अप्रैल 2034

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय CEST में

द्वादशी

शुक्ल पक्ष · 06:49 तक

फिर त्रयोदशी · 09:12 सोम तक

द्वादशी यहाँ दो सूर्योदयों तक है कारण जानें

व्रत

प्रदोष व्रत

प्रदोष पूजा मुहूर्त
20:03⁠–⁠21:56
प्रदोष काल 20:03⁠–⁠21:56

प्रदोष व्रत रवि 30 अप्रैल को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। रवि 30 अप्रैल क्यों?

प्रदोष व्रत: Myjava में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

04:15 05:31 20:03अगला सूर्योदय 05:29 सोम

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 05:31–07:20उद्वेगअशुभ
  • 07:20–09:09चरसामान्य
  • 09:09–10:58लाभशुभ
  • 10:58–12:47अमृतशुभ
  • 12:47–14:36कालअशुभ
  • 14:36–16:25शुभ
  • 16:25–18:14रोगअशुभ
  • 18:14–20:03उद्वेगअशुभ

रात का चौघड़िया

  • 20:03–21:14शुभ
  • 21:14–22:24अमृतशुभ
  • 22:24–23:35चरसामान्य
  • 23:35–00:46 सोमरोगअशुभ
  • 00:46–01:57 सोमकालअशुभ
  • 01:57–03:08 सोमलाभशुभ
  • 03:08–04:18 सोमउद्वेगअशुभ
  • 04:18–05:29 सोमशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, रवि 30 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 04:15–04:53, शुभ
  • उद्वेग, अशुभ, 05:31–07:20
  • चर, सामान्य, 07:20–09:09
  • लाभ, शुभ, 09:09–10:58
  • अमृत, शुभ, 10:58–12:47
  • काल, अशुभ, 12:47–14:36
  • शुभ, 14:36–16:25
  • रोग, अशुभ, 16:25–18:14
  • उद्वेग, अशुभ, 18:14–20:03
  • शुभ, 20:03–21:14
  • अमृत, शुभ, 21:14–22:24
  • चर, सामान्य, 22:24–23:35
  • रोग, अशुभ, 23:35–00:46 सोम
  • काल, अशुभ, 00:46–01:57 सोम
  • लाभ, शुभ, 01:57–03:08 सोम
  • उद्वेग, अशुभ, 03:08–04:18 सोम
  • शुभ, 04:18–05:29 सोम
  • अभिजीत मुहूर्त, 12:18–13:16, शुभ
  • यमगण्ड, 12:47–14:36, अशुभ
  • गुलिक काल, 16:25–18:14, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 18:07–19:05, अशुभ
  • राहु काल, 18:14–20:03, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:14–04:51 सोम

हर मान कैसे निकलता है

Myjava में प्रदोष व्रत रवि 30 अप्रैल को क्यों है?

प्रदोष व्रत रवि 30 अप्रैल को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।

द्वादशी 19:00 20:00 21:00 22:00 23:00 शनि 29 अप्रैल प्रदोष काल 20:01–21:55
द्वादशी 19:00 20:00 21:00 22:00 23:00 शनि 29 अप्रैल प्रदोष काल 20:01–21:55
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+2)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी रवि 30 अप्रैल को 06:49 से सोम 1 मई को 09:12 तक है, इसलिए केवल रविवार का प्रदोष काल (20:03–21:56) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।

प्रदोष व्रत: Myjava में हर तारीख़

रवि 30 अप्रैल को कौन सी तिथि है? शुक्ल द्वादशी

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 143.4° आगे था: शुक्ल द्वादशी।

सूर्य अमावस्या 0° 143.4° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण द्वादशी 132°–144° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 143.4° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण द्वादशी 132°–144° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 132°–144° बारहवीं है, शुक्ल द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:31। एकादशी उससे पहले 04:43 शनि पर समाप्त हुई। द्वादशी 06:49 को समाप्त होगी, जब बढ़त 144° होगी। बढ़त 18 अप्रैल की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।

द्वादशी दो सूर्योदयों पर क्यों है?

द्वादशी यहाँ शनि 29 और रवि 30 अप्रैल दोनों के सूर्योदय पर है।

एकादशी द्वादशी द्वादशी त्रयोदशी शनि 29 अप्रैल सुबह रवि 30 अप्रैल सुबह Myjava UTC+2 04:43 06:49 05:32 द्वादशी 05:31 द्वादशी द्वादशी इस सूर्योदय पर है और इस पर भी
एकादशी द्वादशी द्वादशी त्रयोदशी शनि 29 अप्रैल सुबह रवि 30 अप्रैल सुबह Myjava UTC+2 04:43 06:49 05:32 द्वादशी 05:31 द्वादशी द्वादशी इस सूर्योदय पर है और इस पर भी
समय नीचे की ओर · धारीदार रेखा: तिथि बदली

दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। द्वादशी 04:43 शनि को, सूर्योदय 05:32 शनि से पहले, शुरू हुई और 06:49 को, अगले सूर्योदय 05:31 के बाद, समाप्त होगी। दोनों दिन द्वादशी है: यह यहाँ वृद्धि तिथि है।

रवि 30 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:15–04:53

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:15–04:53।

सूर्यास्त 20:01 शनि सूर्योदय 05:31 रवि समय, ऊँचाई नहीं शनि 29 अप्रैल का दिन 14 1
सूर्यास्त 20:01 शनि सूर्योदय 05:31 रवि समय, ऊँचाई नहीं शनि 29 अप्रैल का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · शनिवार का दिन धुँधला

शनि 29 अप्रैल की रात सूर्यास्त 20:01 शनि से सूर्योदय 05:31 तक थी, 9 घं 30 मि। इसे 38 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

रवि 30 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:18–13:16

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:18–13:16।

रवि 30 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 18:07–19:05

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 18:07–19:05।

सूर्योदय 05:31 सूर्यास्त 20:03 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं 8 14 1
सूर्योदय 05:31 सूर्यास्त 20:03 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं 8 1
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 14

यहाँ दिन, 05:31 से 20:03, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 58 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 18:07–19:05।

रवि 30 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

05:31–07:20 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।

सूर्योदय 05:31 सूर्यास्त 20:03 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं उद्वेग
सूर्योदय 05:31 सूर्यास्त 20:03 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं उद्वेग
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 05:31 से 20:03, 1 घं 49 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 20:03 से 05:29 सोम, 1 घं 10 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

रवि 30 अप्रैल को राहुकाल कब है? 18:14–20:03

राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 18:14–20:03।

रवि 30 अप्रैल को यमगंड कब है? 12:47–14:36

यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:47–14:36।

रवि 30 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 16:25–18:14

गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 16:25–18:14।

सूर्योदय 05:31 सूर्यास्त 20:03 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 05:31 सूर्यास्त 20:03 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: यमगण्ड 5, गुलिक काल 7

यहाँ दिन 05:31 से 20:03 तक है, 14 घं 32 मि। इसे 1 घं 49 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।

सूर्योदय और सूर्यास्त

रवि 30 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 05:31

यहाँ दिन: सूर्योदय 05:31, सूर्यास्त 20:03, 14 घं 32 मि का दिन।

रवि 30 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 20:03

यहाँ दिन: सूर्योदय 05:31, सूर्यास्त 20:03, 14 घं 32 मि का दिन।

सूर्योदय 05:31 सूर्यास्त 20:03 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 04:46 सोम चंद्रोदय 17:03
सूर्योदय 05:31 सूर्यास्त 20:03 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 04:46 सोम चंद्रोदय 17:03
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 32 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 26 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 32 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 26 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

रवि 30 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराफाल्गुनी

सूर्योदय पर चंद्रमा 158.9° पर था: उत्तराफाल्गुनी, पद 4।

चंद्रमा सूर्य 0° उत्तराफाल्गुनी चंद्रमा 158.9° अगला: हस्त पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° उत्तराफाल्गुनी चंद्रमा 158.9° अगला: हस्त पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराफाल्गुनी 146°40′–160°00′ तक है; चंद्रमा 156°40′ पर उसके पद 4 में आया। वह 07:38 को निकलेगा, हस्त में।

रवि 30 अप्रैल को कौन सा योग है? हर्षण

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 174.4° थे: हर्षण।

सूर्य 15.5° + चंद्रमा 158.9° = 174.4° हर्षण 173°20′–186°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 15.5° + चंद्रमा 158.9° = 174.4° हर्षण 173°20′–186°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 15.5° + 158.9° = 174.4°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 173°20′–186°40′ चौदहवाँ है, हर्षण। यह 04:13 सोम को समाप्त होता है, फिर वज्र।

रवि 30 अप्रैल को कौन सा करण है? बालव

सूर्योदय पर बढ़त 143.4° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, बालव।

सूर्य अमावस्या 0° 143.4° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण द्वादशी 132°–144° बालव 138°–144° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 143.4° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण द्वादशी 132°–144° बालव 138°–144° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 17:44 शनि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 138° हुई; बालव 06:49 तक है।

रवि 30 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? रविवार

यह दिन रविवार को सूर्योदय, 05:31, पर शुरू हुआ: रविवार।

रविवार सूर्योदय 05:31 सूर्यास्त 20:03 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं 00:00 सोम अब भी रविवार
रविवार सूर्योदय 05:31 सूर्यास्त 20:03 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं 00:00 सोम अब भी रविवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:31 से 05:29 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।

रवि 30 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख

यह मास 18 अप्रैल की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।

मेष वृषभ 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
मेष वृषभ 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ

अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 15 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 18 मई, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।

रवि 30 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष वैशाख का है।

अमान्त वैशाख पूर्णिमान्त वैशाख कृष्ण शुक्ल रवि 30 अप्रैल पूर्णिमा 3 अप्रैल अमावस्या 18 अप्रैल पूर्णिमा 3 मई अमावस्या 18 मई
अमान्त वैशाख पूर्णिमान्त वैशाख कृष्ण शुक्ल रवि 30 अप्रैल पूर्णिमा 3 अप्रैल अमावस्या 18 अप्रैल पूर्णिमा 3 मई अमावस्या 18 मई
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 18 अप्रैल की अमावस्या ने, सूर्य मेष में, वैशाख शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में वैशाख है।

रवि 30 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2091 · शक 1956

विक्रम संवत 2091 20 मार्च 2034 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 20 मार्च 2034 11:14 · सूर्य मीन में सूर्योदय, रवि 30 अप्रैल सूर्य 15.5° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 20 मार्च 2034 11:14 · सूर्य मीन में सूर्योदय, रवि 30 अप्रैल सूर्य 15.5° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 20 मार्च 2034, 11:14 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 40° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2091 गिनता है; शक संवत 1956।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

रवि 30 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 17:03

चंद्रमा यहाँ 17:03 पर उदय होता है।

रवि 30 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 04:46 सोम

सूर्योदय 05:31 सूर्यास्त 20:03 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 04:46 सोम चंद्रोदय 17:03
सूर्योदय 05:31 सूर्यास्त 20:03 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 04:46 सोम चंद्रोदय 17:03
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 17:03 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 04:46 सोम पर अस्त होगा।

चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 17:03 पर उदय हुआ; वह फिर 04:46 सोम पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।