Myjava, स्लोवाकिया का पंचांग गुरु 31 जुलाई 2031
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय CEST में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत गुरु 31 जुलाई को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। गुरु 31 जुलाई क्यों?
प्रदोष व्रत: Myjava में हर तारीख़व्रत का पारण
श्रावण पुत्रदा एकादशी
31 जुलाई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 31 जुलाई
- 04:10–04:46ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:21 से
- 05:21–07:14शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 12:25–13:25अभिजीत मुहूर्त
- 12:55–14:49लाभ चौघड़िया
- 14:49–16:42अमृत चौघड़ियाराहु काल में
-
17:57–19:23अमृत कालमूल में
- 18:36–20:29शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 20:29 के बाद
- 20:29–21:36अमृत चौघड़िया
- 00:56–02:02 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:09–04:16 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:16–05:22 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:11–04:47 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:21–07:14शुभयमगण्ड में
- 07:14–09:08रोगअशुभ
- 09:08–11:02उद्वेगअशुभ
- 11:02–12:55चरसामान्य
- 12:55–14:49लाभशुभ
- 14:49–16:42अमृतराहु काल में
- 16:42–18:36कालअशुभ
- 18:36–20:29शुभ
रात का चौघड़िया
- 20:29–21:36अमृतशुभ
- 21:36–22:43चरसामान्य
- 22:43–23:49रोगअशुभ
- 23:49–00:56 शुक्रकालअशुभ
- 00:56–02:02 शुक्रलाभशुभ
- 02:02–03:09 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:09–04:16 शुक्रशुभ
- 04:16–05:22 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 31 जुलाई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:10–04:46, शुभ
- शुभ, 05:21–07:14
- रोग, अशुभ, 07:14–09:08
- उद्वेग, अशुभ, 09:08–11:02
- चर, सामान्य, 11:02–12:55
- लाभ, शुभ, 12:55–14:49
- अमृत, शुभ, 14:49–16:42
- काल, अशुभ, 16:42–18:36
- शुभ, 18:36–20:29
- अमृत, शुभ, 20:29–21:36
- चर, सामान्य, 21:36–22:43
- रोग, अशुभ, 22:43–23:49
- काल, अशुभ, 23:49–00:56 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:56–02:02 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 02:02–03:09 शुक्र
- शुभ, 03:09–04:16 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:16–05:22 शुक्र
- यमगण्ड, 05:21–07:14, अशुभ
- गुलिक काल, 09:08–11:02, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:24–11:24, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:25–13:25, शुभ
- राहु काल, 14:49–16:42, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 16:27–17:28, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:11–04:47 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Myjava में प्रदोष व्रत गुरु 31 जुलाई को क्यों है?
प्रदोष व्रत गुरु 31 जुलाई को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी गुरु 31 जुलाई को 14:53 से शुक्र 1 अगस्त को 11:20 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का प्रदोष काल (20:29–22:16) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
गुरु 31 जुलाई को कौन सी तिथि है? शुक्ल द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 138.5° आगे था: शुक्ल द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 132°–144° बारहवीं है, शुक्ल द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:21। एकादशी उससे पहले 18:03 बुध पर समाप्त हुई। द्वादशी 14:53 को समाप्त होगी, जब बढ़त 144° होगी। बढ़त 19 जुलाई की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
गुरु 31 जुलाई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:10–04:46
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:10–04:46।
बुध 30 जुलाई की रात सूर्यास्त 20:31 बुध से सूर्योदय 05:21 तक थी, 8 घं 50 मि। इसे 35 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 31 जुलाई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:25–13:25
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:25–13:25।
गुरु 31 जुलाई को दुर्मुहूर्त कब है? 10:24–11:24
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:24–11:24 और 16:27–17:28।
गुरु 31 जुलाई को दुर्मुहूर्त कब है? 16:27–17:28
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:24–11:24 और 16:27–17:28।
यहाँ दिन, 05:21 से 20:29, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 1 घं 0 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:24–11:24 और 16:27–17:28।
गुरु 31 जुलाई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:21–07:14 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:21 से 20:29, 1 घं 53 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 20:29 से 05:22 शुक्र, 1 घं 6 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 31 जुलाई को राहुकाल कब है? 14:49–16:42
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:49–16:42।
गुरु 31 जुलाई को यमगंड कब है? 05:21–07:14
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:21–07:14।
गुरु 31 जुलाई को गुलिक काल कब है? 09:08–11:02
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:08–11:02।
यहाँ दिन 05:21 से 20:29 तक है, 15 घं 8 मि। इसे 1 घं 53 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 31 जुलाई को सूर्योदय कितने बजे है? 05:21
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:21, सूर्यास्त 20:29, 15 घं 8 मि का दिन।
गुरु 31 जुलाई को सूर्यास्त कितने बजे है? 20:29
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:21, सूर्यास्त 20:29, 15 घं 8 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 15 घं 8 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 8 घं 53 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 15 घं 8 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 8 घं 53 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 31 जुलाई को कौन सा नक्षत्र है? मूल
सूर्योदय पर चंद्रमा 241.9° पर था: मूल, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मूल 240°00′–253°20′ तक है; चंद्रमा 240° पर उसके पद 1 में आया। वह 23:40 को निकलेगा, पूर्वाषाढा में।
गुरु 31 जुलाई को कौन सा योग है? इन्द्र
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 345.4° थे: इन्द्र।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 103.5° + 241.9° = 345.4°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 333°20′–346°40′ छब्बीसवाँ है, इन्द्र। यह 07:15 को समाप्त होता है, फिर वैधृति।
गुरु 31 जुलाई को कौन सा करण है? बालव
सूर्योदय पर बढ़त 138.5° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, बालव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 04:31 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 138° हुई; बालव 14:53 तक है।
गुरु 31 जुलाई को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 05:21, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:21 से 05:22 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 31 जुलाई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? श्रावण
यह मास 19 जुलाई की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कर्क में था: श्रावण।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कर्क से श्रावण। सूर्य 17 अगस्त को, मास के भीतर, सिंह में जाता है। अगली अमावस्या, 18 अगस्त, उसे सिंह में पाती है और भाद्रपद शुरू करती है।
गुरु 31 जुलाई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? श्रावण
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष श्रावण का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 19 जुलाई की अमावस्या ने, सूर्य कर्क में, श्रावण शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में श्रावण है।
गुरु 31 जुलाई को कौन सा संवत है? विक्रम 2088 · शक 1953
विक्रम संवत 2088 23 मार्च 2031 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 23 मार्च 2031, 04:49 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 125.5° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2088 गिनता है; शक संवत 1953।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 31 जुलाई को चंद्रोदय कितने बजे है? 18:11
चंद्रमा यहाँ 18:11 पर उदय होता है।
गुरु 31 जुलाई को चंद्रास्त कितने बजे है? 03:16 शुक्र
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 18:11 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 03:16 शुक्र पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 18:11 पर उदय हुआ; वह फिर 03:16 शुक्र पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।