Myjava, स्लोवाकिया का पंचांग शनि 14 नवंबर 2020
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय CET में
त्योहार
दीवाली · लक्ष्मी पूजा
दीवाली · लक्ष्मी पूजा शनि 14 नवंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं। शनि 14 नवंबर क्यों?
दीवाली: Myjava में हर तारीख़त्योहार
नरक चतुर्दशी
नरक चतुर्दशी शनि 14 नवंबर को है: उस सुबह पूरे अरुणोदय में चतुर्दशी है, और किसी सुबह नहीं। शनि 14 नवंबर क्यों?
नरक चतुर्दशी: Myjava में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या शनि 14 नवंबर को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। शनि 14 नवंबर क्यों?
अमावस्या: Myjava में हर तारीख़14 नवंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 14 नवंबर
- 04:59–05:58ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:57 से
- 08:11–09:15शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
-
08:11–09:15अमृत कालराहु काल, गुलिक काल, दुर्मुहूर्त छोड़कर · स्वाती में
- 11:15–11:52अभिजीत मुहूर्त
- 12:42–13:52लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 13:52–15:01अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 16:10 के बाद
- 16:10–18:01लाभ चौघड़िया
- 19:52–21:43शुभ चौघड़िया
- 21:43–23:34अमृत चौघड़िया
-
05:01–06:25 रविअमृत कालविशाखा में
- 05:07–06:58 रविलाभ चौघड़िया
- 05:00–05:59 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:57–08:06कालअशुभ
- 08:06–09:15शुभ
- 09:15–10:24रोगअशुभ
- 10:24–11:33उद्वेगअशुभ
- 11:33–12:42चरसामान्य
- 12:42–13:52लाभयमगण्ड में
- 13:52–15:01अमृतशुभ
- 15:01–16:10कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 16:10–18:01लाभशुभ
- 18:01–19:52उद्वेगअशुभ
- 19:52–21:43शुभ
- 21:43–23:34अमृतशुभ
- 23:34–01:25 रविचरसामान्य
- 01:25–03:16 रविरोगअशुभ
- 03:16–05:07 रविकालअशुभ
- 05:07–06:58 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 14 नवंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:59–05:58, शुभ
- काल, अशुभ, 06:57–08:06
- शुभ, 08:06–09:15
- रोग, अशुभ, 09:15–10:24
- उद्वेग, अशुभ, 10:24–11:33
- चर, सामान्य, 11:33–12:42
- लाभ, शुभ, 12:42–13:52
- अमृत, शुभ, 13:52–15:01
- काल, अशुभ, 15:01–16:10
- लाभ, शुभ, 16:10–18:01
- उद्वेग, अशुभ, 18:01–19:52
- शुभ, 19:52–21:43
- अमृत, शुभ, 21:43–23:34
- चर, सामान्य, 23:34–01:25 रवि
- रोग, अशुभ, 01:25–03:16 रवि
- काल, अशुभ, 03:16–05:07 रवि
- लाभ, शुभ, 05:07–06:58 रवि
- गुलिक काल, 06:57–08:06, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:57–07:34, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:34–08:11, अशुभ
- राहु काल, 09:15–10:24, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:15–11:52, शुभ
- यमगण्ड, 12:42–13:52, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:00–05:59 रवि
हर मान कैसे निकलता है
Myjava में दीवाली शनि 14 नवंबर को क्यों है?
दीवाली · लक्ष्मी पूजा शनि 14 नवंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं।
लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। अमावस्या शनि 14 नवंबर को 09:48 से रवि 15 नवंबर को 06:07 तक है, इसलिए केवल शनिवार का प्रदोष काल (16:10–19:08) उसके भीतर है। हर मत यही दिन लेता है।
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 16:10–19:08। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 16:10 से 17:49 तक उदित रहता है।
Myjava में नरक चतुर्दशी शनि 14 नवंबर को क्यों है?
नरक चतुर्दशी शनि 14 नवंबर को है: उस सुबह पूरे अरुणोदय में चतुर्दशी है, और किसी सुबह नहीं।
अभ्यंग स्नान अरुणोदय में होता है, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। चतुर्दशी शुक्र 13 नवंबर को 13:29 से शनि 14 नवंबर को 09:48 तक है, इसलिए केवल शनिवार का अरुणोदय (05:21–06:57) उसके भीतर है। नरक चतुर्दशी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; अरुणोदय Tithika की परिपाटी है।
Myjava में अमावस्या शनि 14 नवंबर को क्यों है?
अमावस्या शनि 14 नवंबर को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या शनि 14 नवंबर को 09:48 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और रवि 15 नवंबर को 06:07 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: शनि 14 नवंबर। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
शनि 14 नवंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्दशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 346.3° आगे था: कृष्ण चतुर्दशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 336°–348° उनतीसवीं है, कृष्ण चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:57। त्रयोदशी उससे पहले 13:29 शुक्र पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 09:48 को समाप्त होगी, जब बढ़त 348° होगी। बढ़त 31 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
अमावस्या क्षय क्यों है?
अमावस्या एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन अमावस्या नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। अमावस्या 09:48 को शुरू हुई और 06:07 रवि को समाप्त, 06:57 और 06:58 रवि के सूर्योदयों के बीच। शनिवार को चतुर्दशी है और रविवार को प्रतिपदा: अमावस्या यहाँ क्षय तिथि है।
शनि 14 नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:59–05:58
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:59–05:58।
शुक्र 13 नवंबर की रात सूर्यास्त 16:11 शुक्र से सूर्योदय 06:57 तक थी, 14 घं 46 मि। इसे 59 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 14 नवंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:15–11:52
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:15–11:52।
शनि 14 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 06:57–07:34
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:57–07:34 और 07:34–08:11।
शनि 14 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 07:34–08:11
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:57–07:34 और 07:34–08:11।
यहाँ दिन, 06:57 से 16:10, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 36 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 06:57–07:34 और 07:34–08:11।
शनि 14 नवंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:57–08:06 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:57 से 16:10, 1 घं 9 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 16:10 से 06:58 रवि, 1 घं 51 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 14 नवंबर को राहुकाल कब है? 09:15–10:24
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:15–10:24।
शनि 14 नवंबर को यमगंड कब है? 12:42–13:52
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 12:42–13:52।
शनि 14 नवंबर को गुलिक काल कब है? 06:57–08:06
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:57–08:06।
यहाँ दिन 06:57 से 16:10 तक है, 9 घं 13 मि। इसे 1 घं 9 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 14 नवंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:57
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:57, सूर्यास्त 16:10, 9 घं 13 मि का दिन।
शनि 14 नवंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 16:10
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:57, सूर्यास्त 16:10, 9 घं 13 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 13 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 48 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 13 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 48 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 14 नवंबर को कौन सा नक्षत्र है? स्वाती
सूर्योदय पर चंद्रमा 194.5° पर था: स्वाती, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। स्वाती 186°40′–200°00′ तक है; चंद्रमा 193°20′ पर उसके पद 3 में आया। वह 15:39 को निकलेगा, विशाखा में।
शनि 14 नवंबर को कौन सा योग है? सौभाग्य
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 402.7° थे, एक चक्कर और 42.7°: सौभाग्य।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 208.2° + 194.5° = 402.7°, एक पूरा चक्कर और 42.7°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 40°00′–53°20′ चौथा है, सौभाग्य। यह 22:45 को समाप्त होता है, फिर शोभन।
शनि 14 नवंबर को कौन सा करण है? शकुनि
सूर्योदय पर बढ़त 346.3° थी: चतुर्दशी का दूसरा आधा, शकुनि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा विष्टि है और दूसरा शकुनि। विष्टि 23:39 शुक्र पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 342° हुई; शकुनि 09:48 तक है।
शनि 14 नवंबर को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 06:57, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:57 से 06:58 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 14 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 16 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 15 नवंबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
शनि 14 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 15 नवंबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
शनि 14 नवंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2077 · शक 1942
विक्रम संवत 2077 24 मार्च 2020 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 24 मार्च 2020, 10:28 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 228.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2077 गिनता है; शक संवत 1942।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 14 नवंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 06:58 रवि
चंद्रमा यहाँ 06:58 रवि पर उदय होता है।
शनि 14 नवंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 16:00
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 16:00 पर अस्त हुआ; वह फिर 06:58 रवि पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 16:00 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 06:58 रवि पर उदय होगा।