Myjava, स्लोवाकिया का पंचांग गुरु 26 सितंबर 2019
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय CEST में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत गुरु 26 सितंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। गुरु 26 सितंबर क्यों?
प्रदोष व्रत: Myjava में हर तारीख़व्रत
मासिक शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि गुरु 26 सितंबर को है: चतुर्दशी किसी भी रात निशीथ काल को नहीं छूती, और पहला दिन लिया जाता है। गुरु 26 सितंबर क्यों?
मासिक शिवरात्रि: Myjava में हर तारीख़व्रत का पारण
इंदिरा एकादशी
26 सितंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 26 सितंबर
- 05:05–05:53ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:41 से
- 06:41–08:11शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 12:16–13:04अभिजीत मुहूर्त
- 12:40–14:10लाभ चौघड़िया
- 14:10–15:40अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 17:10–18:40शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:40 के बाद
- 18:40–20:10अमृत चौघड़िया
-
22:22–23:48अमृत कालमघा में
- 00:41–02:11 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:41–05:12 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 05:12–06:42 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 05:06–05:54 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:41–08:11शुभयमगण्ड में
- 08:11–09:40रोगअशुभ
- 09:40–11:10उद्वेगअशुभ
- 11:10–12:40चरसामान्य
- 12:40–14:10लाभशुभ
- 14:10–15:40अमृतराहु काल में
- 15:40–17:10कालअशुभ
- 17:10–18:40शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:40–20:10अमृतशुभ
- 20:10–21:40चरसामान्य
- 21:40–23:10रोगअशुभ
- 23:10–00:41 शुक्रकालअशुभ
- 00:41–02:11 शुक्रलाभशुभ
- 02:11–03:41 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:41–05:12 शुक्रशुभ
- 05:12–06:42 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 26 सितंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:05–05:53, शुभ
- शुभ, 06:41–08:11
- रोग, अशुभ, 08:11–09:40
- उद्वेग, अशुभ, 09:40–11:10
- चर, सामान्य, 11:10–12:40
- लाभ, शुभ, 12:40–14:10
- अमृत, शुभ, 14:10–15:40
- काल, अशुभ, 15:40–17:10
- शुभ, 17:10–18:40
- अमृत, शुभ, 18:40–20:10
- चर, सामान्य, 20:10–21:40
- रोग, अशुभ, 21:40–23:10
- काल, अशुभ, 23:10–00:41 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:41–02:11 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 02:11–03:41 शुक्र
- शुभ, 03:41–05:12 शुक्र
- अमृत, शुभ, 05:12–06:42 शुक्र
- यमगण्ड, 06:41–08:11, अशुभ
- गुलिक काल, 09:40–11:10, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:40–11:28, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:16–13:04, शुभ
- राहु काल, 14:10–15:40, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:28–16:16, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:06–05:54 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Myjava में प्रदोष व्रत गुरु 26 सितंबर को क्यों है?
प्रदोष व्रत गुरु 26 सितंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी गुरु 26 सितंबर को 07:32 से शुक्र 27 सितंबर को 04:02 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का प्रदोष काल (18:40–21:04) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
Myjava में मासिक शिवरात्रि गुरु 26 सितंबर को क्यों है?
मासिक शिवरात्रि गुरु 26 सितंबर को है: चतुर्दशी किसी भी रात निशीथ काल को नहीं छूती, और पहला दिन लिया जाता है।
शिव पूजा निशीथ काल में होती है, आधी रात का मुहूर्त। चतुर्दशी शुक्र 27 सितंबर को 04:02 से शनि 28 सितंबर को 00:16 तक है, दोनों रात के निशीथ काल के बीच, किसी को नहीं छूती। तब निर्णयसिंधु पहला दिन लेता है: गुरु 26 सितंबर। मासिक शिवरात्रि का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; निशीथ काल Tithika की परिपाटी है।
गुरु 26 सितंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 323.5° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:41। एकादशी उससे पहले 10:39 बुध पर समाप्त हुई। द्वादशी 07:32 को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 14 सितंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
त्रयोदशी क्षय क्यों है?
त्रयोदशी एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन त्रयोदशी नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। त्रयोदशी 07:32 को शुरू हुई और 04:02 शुक्र को समाप्त, 06:41 और 06:42 शुक्र के सूर्योदयों के बीच। गुरुवार को द्वादशी है और शुक्रवार को चतुर्दशी: त्रयोदशी यहाँ क्षय तिथि है।
गुरु 26 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:05–05:53
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:05–05:53।
बुध 25 सितंबर की रात सूर्यास्त 18:42 बुध से सूर्योदय 06:41 तक थी, 11 घं 59 मि। इसे 47 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 26 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:16–13:04
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:16–13:04।
गुरु 26 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 10:40–11:28
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:40–11:28 और 15:28–16:16।
गुरु 26 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:28–16:16
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:40–11:28 और 15:28–16:16।
यहाँ दिन, 06:41 से 18:40, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:40–11:28 और 15:28–16:16।
गुरु 26 सितंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:41–08:11 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:41 से 18:40, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:40 से 06:42 शुक्र, 1 घं 30 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 26 सितंबर को राहुकाल कब है? 14:10–15:40
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:10–15:40।
गुरु 26 सितंबर को यमगंड कब है? 06:41–08:11
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:41–08:11।
गुरु 26 सितंबर को गुलिक काल कब है? 09:40–11:10
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:40–11:10।
यहाँ दिन 06:41 से 18:40 तक है, 11 घं 59 मि। इसे 1 घं 29 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 26 सितंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:41
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:41, सूर्यास्त 18:40, 11 घं 59 मि का दिन।
गुरु 26 सितंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:40
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:41, सूर्यास्त 18:40, 11 घं 59 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 59 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 2 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 59 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 2 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा नक्षत्र है? मघा
सूर्योदय पर चंद्रमा 122.2° पर था: मघा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मघा 120°00′–133°20′ तक है; चंद्रमा 120° पर उसके पद 1 में आया। वह 00:30 शुक्र को निकलेगा, पूर्वाफाल्गुनी में।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा योग है? साध्य
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 280.9° थे: साध्य।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 158.7° + 122.2° = 280.9°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 280°00′–293°20′ बाईसवाँ है, साध्य। यह 01:23 शुक्र को समाप्त होता है, फिर शुभ।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 323.5° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 21:09 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 318° हुई; तैतिल 07:32 तक है।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:41, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:41 से 06:42 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? भाद्रपद
यह मास 30 अगस्त की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य सिंह में था: भाद्रपद।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: सिंह से भाद्रपद। सूर्य 17 सितंबर को, मास के भीतर, कन्या में जाता है। अगली अमावस्या, 28 सितंबर, उसे कन्या में पाती है और आश्विन शुरू करती है।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष आश्विन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 28 सितंबर की अमावस्या, सूर्य कन्या में, आश्विन शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ आश्विन है, और अमान्त गणना में भाद्रपद।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2076 · शक 1941
विक्रम संवत 2076 5 अप्रैल 2019 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 5 अप्रैल 2019, 10:50 शुक्र। तब से सूर्य तारों के बीच 167.5° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2076 गिनता है; शक संवत 1941।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 26 सितंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 04:25 शुक्र
चंद्रमा यहाँ 04:25 शुक्र पर उदय होता है।
गुरु 26 सितंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:59
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:59 पर अस्त हुआ; वह फिर 04:25 शुक्र पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:59 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 04:25 शुक्र पर उदय होगा।