Myjava, स्लोवाकिया का पंचांग गुरु 20 जनवरी 2000
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय CET में
व्रत
पूर्णिमा
पूर्णिमा गुरु 20 जनवरी को है: पूर्णिमा किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। गुरु 20 जनवरी क्यों?
पूर्णिमा: Myjava में हर तारीख़20 जनवरी का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 20 जनवरी
- 05:33–06:33ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:34 से
- 07:34–08:40शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:42–12:18अभिजीत मुहूर्त
- 12:00–13:07लाभ चौघड़िया
- 13:07–14:13अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 15:20–16:27शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 16:27 के बाद
- 16:27–18:20अमृत चौघड़िया
-
22:19–23:44अमृत कालपुनर्वसु में
- 00:00–01:53 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:46–05:40 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 05:40–07:33 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 05:32–06:32 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:34–08:40शुभयमगण्ड में
- 08:40–09:47रोगअशुभ
- 09:47–10:54उद्वेगअशुभ
- 10:54–12:00चरसामान्य
- 12:00–13:07लाभशुभ
- 13:07–14:13अमृतराहु काल में
- 14:13–15:20कालअशुभ
- 15:20–16:27शुभ
रात का चौघड़िया
- 16:27–18:20अमृतशुभ
- 18:20–20:13चरसामान्य
- 20:13–22:06रोगअशुभ
- 22:06–00:00 शुक्रकालअशुभ
- 00:00–01:53 शुक्रलाभशुभ
- 01:53–03:46 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:46–05:40 शुक्रशुभ
- 05:40–07:33 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 20 जनवरी: ब्रह्म मुहूर्त, 05:33–06:33, शुभ
- शुभ, 07:34–08:40
- रोग, अशुभ, 08:40–09:47
- उद्वेग, अशुभ, 09:47–10:54
- चर, सामान्य, 10:54–12:00
- लाभ, शुभ, 12:00–13:07
- अमृत, शुभ, 13:07–14:13
- काल, अशुभ, 14:13–15:20
- शुभ, 15:20–16:27
- अमृत, शुभ, 16:27–18:20
- चर, सामान्य, 18:20–20:13
- रोग, अशुभ, 20:13–22:06
- काल, अशुभ, 22:06–00:00 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:00–01:53 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:53–03:46 शुक्र
- शुभ, 03:46–05:40 शुक्र
- अमृत, शुभ, 05:40–07:33 शुक्र
- यमगण्ड, 07:34–08:40, अशुभ
- गुलिक काल, 09:47–10:54, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:31–11:07, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:42–12:18, शुभ
- राहु काल, 13:07–14:13, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:05–14:40, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:32–06:32 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Myjava में पूर्णिमा गुरु 20 जनवरी को क्यों है?
पूर्णिमा गुरु 20 जनवरी को है: पूर्णिमा किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।
पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा गुरु 20 जनवरी को 09:03 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और शुक्र 21 जनवरी को 05:40 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 20 जनवरी। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 20 जनवरी को कौन सी तिथि है? शुक्ल चतुर्दशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 167.1° आगे था: शुक्ल चतुर्दशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 156°–168° चौदहवीं है, शुक्ल चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:34। त्रयोदशी उससे पहले 12:30 बुध पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 09:03 को समाप्त होगी, जब बढ़त 168° होगी। बढ़त 6 जनवरी की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
पूर्णिमा क्षय क्यों है?
पूर्णिमा एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन पूर्णिमा नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। पूर्णिमा 09:03 को शुरू हुई और 05:40 शुक्र को समाप्त, 07:34 और 07:33 शुक्र के सूर्योदयों के बीच। गुरुवार को चतुर्दशी है और शुक्रवार को प्रतिपदा: पूर्णिमा यहाँ क्षय तिथि है।
गुरु 20 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:33–06:33
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:33–06:33।
बुध 19 जनवरी की रात सूर्यास्त 16:25 बुध से सूर्योदय 07:34 तक थी, 15 घं 9 मि। इसे 1 घं 0 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 20 जनवरी को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:42–12:18
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:42–12:18।
गुरु 20 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 10:31–11:07
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:31–11:07 और 14:05–14:40।
गुरु 20 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 14:05–14:40
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:31–11:07 और 14:05–14:40।
यहाँ दिन, 07:34 से 16:27, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 35 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:31–11:07 और 14:05–14:40।
गुरु 20 जनवरी का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:34–08:40 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:34 से 16:27, 1 घं 6 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 16:27 से 07:33 शुक्र, 1 घं 53 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 20 जनवरी को राहुकाल कब है? 13:07–14:13
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:07–14:13।
गुरु 20 जनवरी को यमगंड कब है? 07:34–08:40
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 07:34–08:40।
गुरु 20 जनवरी को गुलिक काल कब है? 09:47–10:54
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:47–10:54।
यहाँ दिन 07:34 से 16:27 तक है, 8 घं 53 मि। इसे 1 घं 6 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 20 जनवरी को सूर्योदय कितने बजे है? 07:34
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:34, सूर्यास्त 16:27, 8 घं 53 मि का दिन।
गुरु 20 जनवरी को सूर्यास्त कितने बजे है? 16:27
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:34, सूर्यास्त 16:27, 8 घं 53 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 8 घं 53 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 15 घं 6 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 8 घं 53 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 15 घं 6 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 20 जनवरी को कौन सा नक्षत्र है? पुनर्वसु
सूर्योदय पर चंद्रमा 82.8° पर था: पुनर्वसु, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पुनर्वसु 80°00′–93°20′ तक है; चंद्रमा 80° पर उसके पद 1 में आया। वह 00:27 शुक्र को निकलेगा, पुष्य में।
गुरु 20 जनवरी को कौन सा योग है? वैधृति
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 358.4° थे: वैधृति।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 275.6° + 82.8° = 358.4°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 346°40′–360°00′ सत्ताईसवाँ है, वैधृति। यह 09:55 को समाप्त होता है, फिर विष्कम्भ।
गुरु 20 जनवरी को कौन सा करण है? वणिज
सूर्योदय पर बढ़त 167.1° थी: चतुर्दशी का दूसरा आधा, वणिज।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 22:46 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 162° हुई; वणिज 09:03 तक है।
गुरु 20 जनवरी को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 07:34, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:34 से 07:33 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 20 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? पौष
यह मास 6 जनवरी की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य धनु में था: पौष।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: धनु से पौष। सूर्य 14 जनवरी को, मास के भीतर, मकर में जाता है। अगली अमावस्या, 5 फ़रवरी, उसे मकर में पाती है और माघ शुरू करती है।
गुरु 20 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? पौष
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष पौष का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 6 जनवरी की अमावस्या ने, सूर्य धनु में, पौष शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में पौष है।
गुरु 20 जनवरी को कौन सा संवत है? विक्रम 2056 · शक 1921
विक्रम संवत 2056 17 मार्च 1999 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 17 मार्च 1999, 19:47 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 302.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2056 गिनता है; शक संवत 1921।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 20 जनवरी को चंद्रोदय कितने बजे है? 15:45
चंद्रमा यहाँ 15:45 पर उदय होता है।
चंद्रमा 15:45 पर, दिन में, उदय होता है और अगले सूर्योदय से पहले अस्त नहीं होता।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच अस्त नहीं होता।