Myjava, स्लोवाकिया का पंचांग बुध 5 मई 1982
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय CEST में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत बुध 5 मई को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। बुध 5 मई क्यों?
प्रदोष व्रत: Myjava में हर तारीख़5 मई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, बुध 5 मई
- 04:09–04:46ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:23 से
- 05:23–07:14लाभ चौघड़िया
- 07:14–09:05अमृत चौघड़ियायमगण्ड में
-
10:06–10:55अमृत कालगुलिक काल छोड़कर · हस्त में
- 10:55–12:46शुभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 18:19–20:10लाभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 20:10 के बाद
- 21:18–22:27शुभ चौघड़िया
- 22:27–23:36अमृत चौघड़िया
- 03:03–04:12 गुरुलाभ चौघड़िया
- 04:08–04:45 गुरुअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:23–07:14लाभशुभ
- 07:14–09:05अमृतयमगण्ड में
- 09:05–10:55कालअशुभ
- 10:55–12:46शुभगुलिक काल में
- 12:46–14:37रोगअशुभ
- 14:37–16:28उद्वेगअशुभ
- 16:28–18:19चरसामान्य
- 18:19–20:10लाभशुभ
रात का चौघड़िया
- 20:10–21:18उद्वेगअशुभ
- 21:18–22:27शुभ
- 22:27–23:36अमृतशुभ
- 23:36–00:45 गुरुचरसामान्य
- 00:45–01:54 गुरुरोगअशुभ
- 01:54–03:03 गुरुकालअशुभ
- 03:03–04:12 गुरुलाभशुभ
- 04:12–05:21 गुरुउद्वेगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, बुध 5 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:09–04:46, शुभ
- लाभ, शुभ, 05:23–07:14
- अमृत, शुभ, 07:14–09:05
- काल, अशुभ, 09:05–10:55
- शुभ, 10:55–12:46
- रोग, अशुभ, 12:46–14:37
- उद्वेग, अशुभ, 14:37–16:28
- चर, सामान्य, 16:28–18:19
- लाभ, शुभ, 18:19–20:10
- उद्वेग, अशुभ, 20:10–21:18
- शुभ, 21:18–22:27
- अमृत, शुभ, 22:27–23:36
- चर, सामान्य, 23:36–00:45 गुरु
- रोग, अशुभ, 00:45–01:54 गुरु
- काल, अशुभ, 01:54–03:03 गुरु
- लाभ, शुभ, 03:03–04:12 गुरु
- उद्वेग, अशुभ, 04:12–05:21 गुरु
- यमगण्ड, 07:14–09:05, अशुभ
- गुलिक काल, 10:55–12:46, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 12:17–13:16, अशुभ
- राहु काल, 12:46–14:37, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:08–04:45 गुरु
हर मान कैसे निकलता है
Myjava में प्रदोष व्रत बुध 5 मई को क्यों है?
प्रदोष व्रत बुध 5 मई को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी मंगल 4 मई को 23:39 से गुरु 6 मई को 00:16 तक है, इसलिए केवल बुधवार का प्रदोष काल (20:10–22:00) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
बुध 5 मई को कौन सी तिथि है? शुक्ल त्रयोदशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 146.8° आगे था: शुक्ल त्रयोदशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 144°–156° तेरहवीं है, शुक्ल त्रयोदशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:23। द्वादशी उससे पहले 23:39 मंगल पर समाप्त हुई। त्रयोदशी 00:16 गुरु को समाप्त होगी, जब बढ़त 156° होगी। बढ़त 23 अप्रैल की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
बुध 5 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:09–04:46
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:09–04:46।
मंगल 4 मई की रात सूर्यास्त 20:08 मंगल से सूर्योदय 05:23 तक थी, 9 घं 15 मि। इसे 37 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
बुध 5 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 12:17–13:16
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है: 12:17–13:16।
यहाँ दिन, 05:23 से 20:10, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 59 मि का। बुधवार को दुर्मुहूर्त आठवाँ है, 12:17–13:16: वह आठवाँ, बीच वाला, मुहूर्त लेता है, इसलिए बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं होता।
बुध 5 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:23–07:14 लाभ है, जिसके स्वामी बुध हैं, बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:23 से 20:10, 1 घं 50 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 20:10 से 05:21 गुरु, 1 घं 8 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
बुध 5 मई को राहुकाल कब है? 12:46–14:37
राहु काल बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:46–14:37।
बुध 5 मई को यमगंड कब है? 07:14–09:05
यमगण्ड बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 07:14–09:05।
बुध 5 मई को गुलिक काल कब है? 10:55–12:46
गुलिक काल बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:55–12:46।
यहाँ दिन 05:23 से 20:10 तक है, 14 घं 47 मि। इसे 1 घं 50 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: बुधवार को राहु काल पाँचवाँ भाग है, यमगण्ड दूसरा और गुलिक काल चौथा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
बुध 5 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 05:23
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:23, सूर्यास्त 20:10, 14 घं 47 मि का दिन।
बुध 5 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 20:10
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:23, सूर्यास्त 20:10, 14 घं 47 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 47 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 11 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 47 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 11 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
बुध 5 मई को कौन सा नक्षत्र है? हस्त
सूर्योदय पर चंद्रमा 167.5° पर था: हस्त, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। हस्त 160°00′–173°20′ तक है; चंद्रमा 166°40′ पर उसके पद 3 में आया। वह 16:23 को निकलेगा, चित्रा में।
बुध 5 मई को कौन सा योग है? वज्र
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 188.2° थे: वज्र।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 20.7° + 167.5° = 188.2°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 186°40′–200°00′ पंद्रहवाँ है, वज्र। यह 02:08 गुरु को समाप्त होता है, फिर सिद्धि।
बुध 5 मई को कौन सा करण है? कौलव
सूर्योदय पर बढ़त 146.8° थी: त्रयोदशी का पहला आधा, कौलव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए त्रयोदशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 11:55 तक है, जब बढ़त 150° होगी; तैतिल 00:16 गुरु तक।
बुध 5 मई को कौन सा वार है, और कब से? बुधवार
यह दिन बुधवार को सूर्योदय, 05:23, पर शुरू हुआ: बुधवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:23 से 05:21 गुरु तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी बुधवार के हैं।
बुध 5 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख
यह मास 23 अप्रैल की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 14 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 23 मई, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।
बुध 5 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष वैशाख का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 23 अप्रैल की अमावस्या ने, सूर्य मेष में, वैशाख शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में वैशाख है।
बुध 5 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 2039 · शक 1904
विक्रम संवत 2039 25 मार्च 1982 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 25 मार्च 1982, 11:17 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 39.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2039 गिनता है; शक संवत 1904।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
बुध 5 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 17:19
चंद्रमा यहाँ 17:19 पर उदय होता है।
बुध 5 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 05:08 गुरु
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 17:19 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 05:08 गुरु पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 17:19 पर उदय हुआ; वह फिर 05:08 गुरु पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।