Mapleton, यूटाह, संयुक्त राज्य अमेरिका का पंचांग शुक्र 10 मार्च 2028
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय MST में
व्रत
पूर्णिमा
पूर्णिमा शुक्र 10 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है। शुक्र 10 मार्च क्यों?
पूर्णिमा: Mapleton में हर तारीख़10 मार्च का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 10 मार्च
- 05:06–05:55ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:44 से
- 08:12–09:40लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 09:52–11:08अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:36–13:00अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 12:36–13:00शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
-
12:36–13:00अमृत कालराहु काल, दुर्मुहूर्त छोड़कर · पूर्वाफाल्गुनी में
- 13:47–14:04शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- सूर्यास्त 18:28 के बाद
- 21:32–23:04लाभ चौघड़िया
- 00:35–02:07 शनिशुभ चौघड़िया
- 02:07–03:39 शनिअमृत चौघड़िया
- 05:05–05:54 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:44–08:12चरसामान्य
- 08:12–09:40लाभगुलिक काल में
- 09:40–11:08अमृतशुभ
- 11:08–12:36कालअशुभ
- 12:36–14:04शुभ
- 14:04–15:32रोगअशुभ
- 15:32–17:00उद्वेगअशुभ
- 17:00–18:28चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 18:28–20:00रोगअशुभ
- 20:00–21:32कालअशुभ
- 21:32–23:04लाभशुभ
- 23:04–00:35 शनिउद्वेगअशुभ
- 00:35–02:07 शनिशुभ
- 02:07–03:39 शनिअमृतशुभ
- 03:39–05:11 शनिचरसामान्य
- 05:11–06:43 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 10 मार्च: ब्रह्म मुहूर्त, 05:06–05:55, शुभ
- चर, सामान्य, 06:44–08:12
- लाभ, शुभ, 08:12–09:40
- अमृत, शुभ, 09:40–11:08
- काल, अशुभ, 11:08–12:36
- शुभ, 12:36–14:04
- रोग, अशुभ, 14:04–15:32
- उद्वेग, अशुभ, 15:32–17:00
- चर, सामान्य, 17:00–18:28
- रोग, अशुभ, 18:28–20:00
- काल, अशुभ, 20:00–21:32
- लाभ, शुभ, 21:32–23:04
- उद्वेग, अशुभ, 23:04–00:35 शनि
- शुभ, 00:35–02:07 शनि
- अमृत, शुभ, 02:07–03:39 शनि
- चर, सामान्य, 03:39–05:11 शनि
- रोग, अशुभ, 05:11–06:43 शनि
- गुलिक काल, 08:12–09:40, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:05–09:52, अशुभ
- राहु काल, 11:08–12:36, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:13–13:00, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 13:00–13:47, अशुभ
- यमगण्ड, 15:32–17:00, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:05–05:54 शनि
हर मान कैसे निकलता है
Mapleton में पूर्णिमा शुक्र 10 मार्च को क्यों है?
पूर्णिमा शुक्र 10 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है।
पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा गुरु 9 मार्च को 21:51 से शुक्र 10 मार्च को 18:06 तक है, इसलिए वह केवल शुक्र 10 मार्च के सूर्योदय (06:44) पर है। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
शुक्र 10 मार्च को कौन सी तिथि है? शुक्ल पूर्णिमा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 173.3° आगे था: शुक्ल पूर्णिमा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 168°–180° पंद्रहवीं है, शुक्ल पूर्णिमा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:44। चतुर्दशी उससे पहले 21:51 गुरु पर समाप्त हुई। पूर्णिमा 18:06 को समाप्त होगी, जब बढ़त 180° होगी। बढ़त 25 फ़रवरी की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
नई दिल्ली में चतुर्दशी क्यों है?
नई दिल्ली में चतुर्दशी है, Mapleton में पूर्णिमा।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो।
नई दिल्ली · IST
यहाँ सूर्योदय, 06:36, चतुर्दशी की समाप्ति 10:21 से पहले हुआ: यह दिन चतुर्दशी है।
Mapleton · UTC−7
यहाँ सूर्योदय, 06:44, चतुर्दशी की समाप्ति 21:51 गुरु के बाद हुआ: यह दिन पूर्णिमा है।
शुक्र 10 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:06–05:55
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:06–05:55।
गुरु 9 मार्च की रात सूर्यास्त 18:27 गुरु से सूर्योदय 06:44 तक थी, 12 घं 17 मि। इसे 49 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 10 मार्च को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:13–13:00
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:13–13:00।
शुक्र 10 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 09:05–09:52
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:05–09:52 और 13:00–13:47।
शुक्र 10 मार्च को दुर्मुहूर्त कब है? 13:00–13:47
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:05–09:52 और 13:00–13:47।
यहाँ दिन, 06:44 से 18:28, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 46 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 09:05–09:52 और 13:00–13:47।
शुक्र 10 मार्च का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:44–08:12 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:44 से 18:28, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:28 से 06:43 शनि, 1 घं 31 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 10 मार्च को राहुकाल कब है? 11:08–12:36
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:08–12:36।
शुक्र 10 मार्च को यमगंड कब है? 15:32–17:00
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:32–17:00।
शुक्र 10 मार्च को गुलिक काल कब है? 08:12–09:40
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:12–09:40।
यहाँ दिन 06:44 से 18:28 तक है, 11 घं 44 मि। इसे 1 घं 28 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 10 मार्च को सूर्योदय कितने बजे है? 06:44
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:44, सूर्यास्त 18:28, 11 घं 44 मि का दिन।
शुक्र 10 मार्च को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:28
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:44, सूर्यास्त 18:28, 11 घं 44 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 44 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 15 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 44 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 15 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 10 मार्च को कौन सा नक्षत्र है? पूर्वाफाल्गुनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 139.5° पर था: पूर्वाफाल्गुनी, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्वाफाल्गुनी 133°20′–146°40′ तक है; चंद्रमा 136°40′ पर उसके पद 2 में आया। वह 17:59 को निकलेगा, उत्तराफाल्गुनी में।
शुक्र 10 मार्च को कौन सा योग है? धृति
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 465.8° थे, एक चक्कर और 105.8°: धृति।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 326.3° + 139.5° = 465.8°, एक पूरा चक्कर और 105.8°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 93°20′–106°40′ आठवाँ है, धृति। यह 08:02 को समाप्त होता है, फिर शूल।
शुक्र 10 मार्च को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 173.3° थी: पूर्णिमा का पहला आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पूर्णिमा का पहला आधा विष्टि है और दूसरा बव। विष्टि 07:58 तक है, जब बढ़त 174° होगी; बव 18:06 तक।
शुक्र 10 मार्च को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 06:44, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:44 से 06:43 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 10 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन
यह मास 25 फ़रवरी की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 14 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 25 मार्च, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।
शुक्र 10 मार्च को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? फाल्गुन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष फाल्गुन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 25 फ़रवरी की अमावस्या ने, सूर्य कुंभ में, फाल्गुन शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में फाल्गुन है।
शुक्र 10 मार्च को कौन सा संवत है? विक्रम 2084 · शक 1949
विक्रम संवत 2084 6 अप्रैल 2027 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 6 अप्रैल 2027, 17:51 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 333.6° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2084 गिनता है; शक संवत 1949।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 10 मार्च को चंद्रोदय कितने बजे है? 18:32
चंद्रमा यहाँ 18:32 पर उदय होता है।
चंद्रमा 18:32 पर, रात में, उदय होता है और अगले सूर्योदय से पहले अस्त नहीं होता।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच अस्त नहीं होता।