Mapleton, यूटाह, संयुक्त राज्य अमेरिका का पंचांग सोम 4 अप्रैल 2016
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय MDT में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत सोम 4 अप्रैल को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। सोम 4 अप्रैल क्यों?
प्रदोष व्रत: Mapleton में हर तारीख़व्रत का पारण
पापमोचनी एकादशी
4 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, सोम 4 अप्रैल
- 05:35–06:19ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:04 से
- 07:04–08:40अमृत चौघड़िया
- 10:17–11:53शुभ चौघड़िया
- 13:29–13:55अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 17:20–18:18लाभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
-
17:20–17:55अमृत कालगुलिक काल, दुर्मुहूर्त छोड़कर · शतभिषा में
- 18:18–19:54अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 19:54 के बाद
- 00:05–01:28 मंगललाभ चौघड़िया
- 02:52–04:15 मंगलशुभ चौघड़िया
- 04:15–05:39 मंगलअमृत चौघड़िया
- 05:33–06:18 मंगलअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:04–08:40अमृतशुभ
- 08:40–10:17कालअशुभ
- 10:17–11:53शुभ
- 11:53–13:29रोगअशुभ
- 13:29–15:05उद्वेगअशुभ
- 15:05–16:41चरसामान्य
- 16:41–18:18लाभशुभ
- 18:18–19:54अमृतशुभ
रात का चौघड़िया
- 19:54–21:18चरसामान्य
- 21:18–22:41रोगअशुभ
- 22:41–00:05 मंगलकालअशुभ
- 00:05–01:28 मंगललाभशुभ
- 01:28–02:52 मंगलउद्वेगअशुभ
- 02:52–04:15 मंगलशुभ
- 04:15–05:39 मंगलअमृतशुभ
- 05:39–07:03 मंगलचरसामान्य
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, सोम 4 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 05:35–06:19, शुभ
- अमृत, शुभ, 07:04–08:40
- काल, अशुभ, 08:40–10:17
- शुभ, 10:17–11:53
- रोग, अशुभ, 11:53–13:29
- उद्वेग, अशुभ, 13:29–15:05
- चर, सामान्य, 15:05–16:41
- लाभ, शुभ, 16:41–18:18
- अमृत, शुभ, 18:18–19:54
- चर, सामान्य, 19:54–21:18
- रोग, अशुभ, 21:18–22:41
- काल, अशुभ, 22:41–00:05 मंगल
- लाभ, शुभ, 00:05–01:28 मंगल
- उद्वेग, अशुभ, 01:28–02:52 मंगल
- शुभ, 02:52–04:15 मंगल
- अमृत, शुभ, 04:15–05:39 मंगल
- चर, सामान्य, 05:39–07:03 मंगल
- राहु काल, 08:40–10:17, अशुभ
- यमगण्ड, 11:53–13:29, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 13:03–13:55, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 13:55–14:46, अशुभ
- गुलिक काल, 15:05–16:41, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 16:29–17:20, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:33–06:18 मंगल
हर मान कैसे निकलता है
Mapleton में प्रदोष व्रत सोम 4 अप्रैल को क्यों है?
प्रदोष व्रत सोम 4 अप्रैल को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी सोम 4 अप्रैल को 15:37 से मंगल 5 अप्रैल को 12:34 तक है, इसलिए केवल सोमवार का प्रदोष काल (19:54–22:08) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
सोम 4 अप्रैल को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 319.2° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:04। एकादशी उससे पहले 18:07 रवि पर समाप्त हुई। द्वादशी 15:37 को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 23 मार्च की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
सोम 4 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:35–06:19
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:35–06:19।
रवि 3 अप्रैल की रात सूर्यास्त 19:53 रवि से सूर्योदय 07:04 तक थी, 11 घं 11 मि। इसे 44 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
सोम 4 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 13:03–13:55
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 13:03–13:55।
सोम 4 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 13:55–14:46
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 13:55–14:46 और 16:29–17:20।
सोम 4 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 16:29–17:20
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 13:55–14:46 और 16:29–17:20।
यहाँ दिन, 07:04 से 19:54, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 51 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। सोमवार को दुर्मुहूर्त नौवाँ और बारहवाँ है, 13:55–14:46 और 16:29–17:20।
सोम 4 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:04–08:40 अमृत है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:04 से 19:54, 1 घं 36 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:54 से 07:03 मंगल, 1 घं 23 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
सोम 4 अप्रैल को राहुकाल कब है? 08:40–10:17
राहु काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:40–10:17।
सोम 4 अप्रैल को यमगंड कब है? 11:53–13:29
यमगण्ड सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:53–13:29।
सोम 4 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 15:05–16:41
गुलिक काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 15:05–16:41।
यहाँ दिन 07:04 से 19:54 तक है, 12 घं 50 मि। इसे 1 घं 36 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: सोमवार को राहु काल दूसरा भाग है, यमगण्ड चौथा और गुलिक काल छठा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सोम 4 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 07:04
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:04, सूर्यास्त 19:54, 12 घं 50 मि का दिन।
सोम 4 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:54
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:04, सूर्यास्त 19:54, 12 घं 50 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 50 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 9 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 50 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 9 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सोम 4 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? शतभिषा
सूर्योदय पर चंद्रमा 310.3° पर था: शतभिषा, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। शतभिषा 306°40′–320°00′ तक है; चंद्रमा 310° पर उसके पद 2 में आया। वह 23:04 को निकलेगा, पूर्व भाद्रपद में।
सोम 4 अप्रैल को कौन सा योग है? शुभ
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 661.4° थे, एक चक्कर और 301.4°: शुभ।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 351.1° + 310.3° = 661.4°, एक पूरा चक्कर और 301.4°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 293°20′–306°40′ तेईसवाँ है, शुभ। यह 15:14 को समाप्त होता है, फिर शुक्ल।
सोम 4 अप्रैल को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 319.2° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 04:57 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 318° हुई; तैतिल 15:37 तक है।
सोम 4 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? सोमवार
यह दिन सोमवार को सूर्योदय, 07:04, पर शुरू हुआ: सोमवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:04 से 07:03 मंगल तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी सोमवार के हैं।
सोम 4 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन
यह मास 8 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 13 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 7 अप्रैल, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।
सोम 4 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष चैत्र का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 7 अप्रैल की अमावस्या, सूर्य मीन में, चैत्र शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ चैत्र है, और अमान्त गणना में फाल्गुन।
सोम 4 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2072 · शक 1937
विक्रम संवत 2072 20 मार्च 2015 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 20 मार्च 2015, 03:36 शुक्र। तब से सूर्य तारों के बीच 375.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2072 गिनता है; शक संवत 1937।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
सोम 4 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 06:01 मंगल
चंद्रमा यहाँ 06:01 मंगल पर उदय होता है।
सोम 4 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 16:53
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 16:53 पर अस्त हुआ; वह फिर 06:01 मंगल पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 16:53 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 06:01 मंगल पर उदय होगा।