Khmelnytskyi, यूक्रेन का पंचांग सोम 4 अक्टूबर 2032
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय EEST में
त्योहार
सर्व पितृ अमावस्या
सर्व पितृ अमावस्या सोम 4 अक्टूबर को है: उस दिन पूरे अपराह्न में अमावस्या है। सोम 4 अक्टूबर क्यों?
सर्व पितृ अमावस्या: Khmelnytskyi में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या सोम 4 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। सोम 4 अक्टूबर क्यों?
अमावस्या: Khmelnytskyi में हर तारीख़4 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, सोम 4 अक्टूबर
- 05:36–06:26ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 07:16 से
- 07:16–08:42अमृत चौघड़िया
- 10:08–11:34शुभ चौघड़िया
- 13:00–13:23अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 16:26–17:17लाभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 17:17–18:43अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:43 के बाद
-
21:15–23:01अमृत कालहस्त में
- 23:26–01:00 मंगललाभ चौघड़िया
- 02:35–04:09 मंगलशुभ चौघड़िया
- 04:09–05:43 मंगलअमृत चौघड़िया
- 05:37–06:27 मंगलअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 07:16–08:42अमृतशुभ
- 08:42–10:08कालअशुभ
- 10:08–11:34शुभ
- 11:34–13:00रोगअशुभ
- 13:00–14:25उद्वेगअशुभ
- 14:25–15:51चरसामान्य
- 15:51–17:17लाभशुभ
- 17:17–18:43अमृतशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:43–20:17चरसामान्य
- 20:17–21:52रोगअशुभ
- 21:52–23:26कालअशुभ
- 23:26–01:00 मंगललाभशुभ
- 01:00–02:35 मंगलउद्वेगअशुभ
- 02:35–04:09 मंगलशुभ
- 04:09–05:43 मंगलअमृतशुभ
- 05:43–07:18 मंगलचरसामान्य
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, सोम 4 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:36–06:26, शुभ
- अमृत, शुभ, 07:16–08:42
- काल, अशुभ, 08:42–10:08
- शुभ, 10:08–11:34
- रोग, अशुभ, 11:34–13:00
- उद्वेग, अशुभ, 13:00–14:25
- चर, सामान्य, 14:25–15:51
- लाभ, शुभ, 15:51–17:17
- अमृत, शुभ, 17:17–18:43
- चर, सामान्य, 18:43–20:17
- रोग, अशुभ, 20:17–21:52
- काल, अशुभ, 21:52–23:26
- लाभ, शुभ, 23:26–01:00 मंगल
- उद्वेग, अशुभ, 01:00–02:35 मंगल
- शुभ, 02:35–04:09 मंगल
- अमृत, शुभ, 04:09–05:43 मंगल
- चर, सामान्य, 05:43–07:18 मंगल
- राहु काल, 08:42–10:08, अशुभ
- यमगण्ड, 11:34–13:00, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:37–13:23, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 13:23–14:08, अशुभ
- गुलिक काल, 14:25–15:51, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:40–16:26, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:37–06:27 मंगल
हर मान कैसे निकलता है
Khmelnytskyi में सर्व पितृ अमावस्या सोम 4 अक्टूबर को क्यों है?
सर्व पितृ अमावस्या सोम 4 अक्टूबर को है: उस दिन पूरे अपराह्न में अमावस्या है।
सब पितरों का श्राद्ध अपराह्न में होता है, दिन का चौथा पाँचवाँ भाग। अमावस्या रवि 3 अक्टूबर को 14:20 से सोम 4 अक्टूबर को 16:26 तक है, और दोनों दिन अपराह्न को छूती है। निर्णयसिंधु वह दिन लेता है जिसका अपराह्न उसमें अधिक है: सोम 4 अक्टूबर। सर्व पितृ अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; अपराह्न Tithika की परिपाटी है।
Khmelnytskyi में अमावस्या सोम 4 अक्टूबर को क्यों है?
अमावस्या सोम 4 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या रवि 3 अक्टूबर को 14:20 से सोम 4 अक्टूबर को 16:26 तक है, इसलिए वह केवल सोम 4 अक्टूबर के सूर्योदय (07:16) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
सोम 4 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 355.8° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 07:16। चतुर्दशी उससे पहले 14:20 रवि पर समाप्त हुई। अमावस्या 16:26 को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 19 सितंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
सोम 4 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:36–06:26
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:36–06:26।
रवि 3 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:45 रवि से सूर्योदय 07:16 तक थी, 12 घं 31 मि। इसे 50 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
सोम 4 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:37–13:23
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:37–13:23।
सोम 4 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 13:23–14:08
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 13:23–14:08 और 15:40–16:26।
सोम 4 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:40–16:26
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से नौवाँ और बारहवाँ है: 13:23–14:08 और 15:40–16:26।
यहाँ दिन, 07:16 से 18:43, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 45 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। सोमवार को दुर्मुहूर्त नौवाँ और बारहवाँ है, 13:23–14:08 और 15:40–16:26।
सोम 4 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
07:16–08:42 अमृत है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 07:16 से 18:43, 1 घं 25 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:43 से 07:18 मंगल, 1 घं 34 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
सोम 4 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 08:42–10:08
राहु काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:42–10:08।
सोम 4 अक्टूबर को यमगंड कब है? 11:34–13:00
यमगण्ड सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:34–13:00।
सोम 4 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 14:25–15:51
गुलिक काल सोमवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:25–15:51।
यहाँ दिन 07:16 से 18:43 तक है, 11 घं 27 मि। इसे 1 घं 25 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: सोमवार को राहु काल दूसरा भाग है, यमगण्ड चौथा और गुलिक काल छठा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सोम 4 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 07:16
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:16, सूर्यास्त 18:43, 11 घं 27 मि का दिन।
सोम 4 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:43
यहाँ दिन: सूर्योदय 07:16, सूर्यास्त 18:43, 11 घं 27 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 27 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 35 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 27 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 35 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सोम 4 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? हस्त
सूर्योदय पर चंद्रमा 163° पर था: हस्त, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। हस्त 160°00′–173°20′ तक है; चंद्रमा 160° पर उसके पद 1 में आया। वह 03:52 मंगल को निकलेगा, चित्रा में।
सोम 4 अक्टूबर को कौन सा योग है? ब्रह्म
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 330.2° थे: ब्रह्म।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 167.2° + 163° = 330.2°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 320°00′–333°20′ पच्चीसवाँ है, ब्रह्म। यह 13:10 को समाप्त होता है, फिर इन्द्र।
सोम 4 अक्टूबर को कौन सा करण है? नाग
सूर्योदय पर बढ़त 355.8° थी: अमावस्या का दूसरा आधा, नाग।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 03:25 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 354° हुई; नाग 16:26 तक है।
सोम 4 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? सोमवार
यह दिन सोमवार को सूर्योदय, 07:16, पर शुरू हुआ: सोमवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 07:16 से 07:18 मंगल तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी सोमवार के हैं।
सोम 4 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? भाद्रपद
यह मास 4 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य सिंह में था: भाद्रपद।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: सिंह से भाद्रपद। सूर्य 16 सितंबर को, मास के भीतर, कन्या में जाता है। अगली अमावस्या, 4 अक्टूबर, उसे कन्या में पाती है और आश्विन शुरू करती है।
सोम 4 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष आश्विन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 4 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य कन्या में, आश्विन शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ आश्विन है, और अमान्त गणना में भाद्रपद।
सोम 4 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2089 · शक 1954
विक्रम संवत 2089 10 अप्रैल 2032 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 10 अप्रैल 2032, 05:39 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 170.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2089 गिनता है; शक संवत 1954।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
सोम 4 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 18:30
चंद्रमा यहाँ 18:30 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 18:30 पर, दिन में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।