Khmelnytskyi, यूक्रेन का पंचांग रवि 30 अक्टूबर 2022
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय EET में
त्योहार
छठ · संध्या अर्घ्य
छठ · संध्या अर्घ्य रवि 30 अक्टूबर को है: उस शाम सूर्यास्त पर षष्ठी है। रवि 30 अक्टूबर क्यों?
छठ: Khmelnytskyi में हर तारीख़30 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 30 अक्टूबर
- 05:04–06:00ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:56 से
- 09:25–10:40लाभ चौघड़िया
- 10:40–11:55अमृत चौघड़िया
- 11:35–11:55अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 13:09–14:24शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 16:54 के बाद
- 16:54–18:39शुभ चौघड़िया
- 18:39–20:25अमृत चौघड़िया
-
21:49–23:18अमृत कालपूर्वाषाढा में
- 01:41–03:27 सोमलाभ चौघड़िया
- 05:12–06:58 सोमशुभ चौघड़िया
- 05:05–06:01 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:56–08:11उद्वेगअशुभ
- 08:11–09:25चरसामान्य
- 09:25–10:40लाभशुभ
- 10:40–11:55अमृतशुभ
- 11:55–13:09कालअशुभ
- 13:09–14:24शुभ
- 14:24–15:39रोगअशुभ
- 15:39–16:54उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 16:54–18:39शुभ
- 18:39–20:25अमृतशुभ
- 20:25–22:10चरसामान्य
- 22:10–23:56रोगअशुभ
- 23:56–01:41 सोमकालअशुभ
- 01:41–03:27 सोमलाभशुभ
- 03:27–05:12 सोमउद्वेगअशुभ
- 05:12–06:58 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 30 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:04–06:00, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 06:56–08:11
- चर, सामान्य, 08:11–09:25
- लाभ, शुभ, 09:25–10:40
- अमृत, शुभ, 10:40–11:55
- काल, अशुभ, 11:55–13:09
- शुभ, 13:09–14:24
- रोग, अशुभ, 14:24–15:39
- उद्वेग, अशुभ, 15:39–16:54
- शुभ, 16:54–18:39
- अमृत, शुभ, 18:39–20:25
- चर, सामान्य, 20:25–22:10
- रोग, अशुभ, 22:10–23:56
- काल, अशुभ, 23:56–01:41 सोम
- लाभ, शुभ, 01:41–03:27 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 03:27–05:12 सोम
- शुभ, 05:12–06:58 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 11:35–12:15, शुभ
- यमगण्ड, 11:55–13:09, अशुभ
- गुलिक काल, 14:24–15:39, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:34–16:14, अशुभ
- राहु काल, 15:39–16:54, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:05–06:01 सोम
हर मान कैसे निकलता है
Khmelnytskyi में छठ रवि 30 अक्टूबर को क्यों है?
छठ · संध्या अर्घ्य रवि 30 अक्टूबर को है: उस शाम सूर्यास्त पर षष्ठी है।
संध्या अर्घ्य सूर्यास्त पर दिया जाता है। षष्ठी रवि 30 अक्टूबर को 03:20 से रवि 30 अक्टूबर को 23:58 तक है, इसलिए सूर्यास्त पर वह केवल रवि 30 अक्टूबर को है, 16:54 पर। छठ · संध्या अर्घ्य का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्यास्त Tithika की परिपाटी है।
रवि 30 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल षष्ठी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 62.6° आगे था: शुक्ल षष्ठी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 60°–72° छठी है, शुक्ल षष्ठी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:56। पञ्चमी उससे पहले 03:20 पर समाप्त हुई। षष्ठी 23:58 को समाप्त होगी, जब बढ़त 72° होगी। बढ़त 25 अक्टूबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
रवि 30 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:04–06:00
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:04–06:00।
शनि 29 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 17:55 शनि से सूर्योदय 06:56 तक थी, 14 घं 1 मि। इसे 56 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 30 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:35–12:15
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:35–12:15।
रवि 30 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:34–16:14
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 15:34–16:14।
यहाँ दिन, 06:56 से 16:54, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 39 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 15:34–16:14।
रवि 30 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:56–08:11 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:56 से 16:54, 1 घं 14 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 16:54 से 06:58 सोम, 1 घं 45 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 30 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 15:39–16:54
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 15:39–16:54।
रवि 30 अक्टूबर को यमगंड कब है? 11:55–13:09
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 11:55–13:09।
रवि 30 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 14:24–15:39
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 14:24–15:39।
यहाँ दिन 06:56 से 16:54 तक है, 9 घं 58 मि। इसे 1 घं 14 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 30 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:56
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:56, सूर्यास्त 16:54, 9 घं 58 मि का दिन।
रवि 30 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 16:54
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:56, सूर्यास्त 16:54, 9 घं 58 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 58 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 4 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 9 घं 58 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 14 घं 4 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 30 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? पूर्वाषाढा
सूर्योदय पर चंद्रमा 255.1° पर था: पूर्वाषाढा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्वाषाढा 253°20′–266°40′ तक है; चंद्रमा 253°20′ पर उसके पद 1 में आया। वह 02:17 सोम को निकलेगा, उत्तराषाढा में।
रवि 30 अक्टूबर को कौन सा योग है? सुकर्मा
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 447.7° थे, एक चक्कर और 87.7°: सुकर्मा।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 192.6° + 255.1° = 447.7°, एक पूरा चक्कर और 87.7°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 80°00′–93°20′ सातवाँ है, सुकर्मा। यह 15:45 को समाप्त होता है, फिर धृति।
रवि 30 अक्टूबर को कौन सा करण है? कौलव
सूर्योदय पर बढ़त 62.6° थी: षष्ठी का पहला आधा, कौलव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए षष्ठी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 13:08 तक है, जब बढ़त 66° होगी; तैतिल 23:58 तक।
रवि 30 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 06:56, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:56 से 06:58 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 30 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? कार्तिक
यह मास 25 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य तुला में था: कार्तिक।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: तुला से कार्तिक। सूर्य 16 नवंबर को, मास के भीतर, वृश्चिक में जाता है। अगली अमावस्या, 24 नवंबर, उसे वृश्चिक में पाती है और मार्गशीर्ष शुरू करती है।
रवि 30 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 25 अक्टूबर की अमावस्या ने, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में कार्तिक है।
रवि 30 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2079 · शक 1944
विक्रम संवत 2079 1 अप्रैल 2022 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 1 अप्रैल 2022, 09:24 शुक्र। तब से सूर्य तारों के बीच 205.3° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2079 गिनता है; शक संवत 1944।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 30 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 13:05
चंद्रमा यहाँ 13:05 पर उदय होता है।
रवि 30 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 20:26
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 13:05 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 20:26 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 13:05 पर उदय हुआ; वह फिर 20:26 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।