Khmelnytskyi, यूक्रेन का पंचांग रवि 27 अक्टूबर 2019
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय EET में
त्योहार
दीवाली · लक्ष्मी पूजा
दीवाली · लक्ष्मी पूजा रवि 27 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं। रवि 27 अक्टूबर क्यों?
दीवाली: Khmelnytskyi में हर तारीख़त्योहार
नरक चतुर्दशी
नरक चतुर्दशी रवि 27 अक्टूबर को है: उस सुबह पूरे अरुणोदय में चतुर्दशी है, और किसी सुबह नहीं। रवि 27 अक्टूबर क्यों?
नरक चतुर्दशी: Khmelnytskyi में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या रवि 27 अक्टूबर को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। रवि 27 अक्टूबर क्यों?
अमावस्या: Khmelnytskyi में हर तारीख़27 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 27 अक्टूबर
- 05:00–05:56ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:51 से
- 09:23–10:39लाभ चौघड़िया
- 10:39–11:55अमृत चौघड़िया
- 11:35–11:55अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 13:11–14:27शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 16:59 के बाद
- 16:59–18:43शुभ चौघड़िया
-
18:03–19:29अमृत कालचित्रा में
- 18:43–20:28अमृत चौघड़िया
- 01:40–03:24 सोमलाभ चौघड़िया
- 05:08–06:52 सोमशुभ चौघड़िया
- 05:01–05:57 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:51–08:07उद्वेगअशुभ
- 08:07–09:23चरसामान्य
- 09:23–10:39लाभशुभ
- 10:39–11:55अमृतशुभ
- 11:55–13:11कालअशुभ
- 13:11–14:27शुभ
- 14:27–15:43रोगअशुभ
- 15:43–16:59उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 16:59–18:43शुभ
- 18:43–20:28अमृतशुभ
- 20:28–22:12चरसामान्य
- 22:12–23:56रोगअशुभ
- 23:56–01:40 सोमकालअशुभ
- 01:40–03:24 सोमलाभशुभ
- 03:24–05:08 सोमउद्वेगअशुभ
- 05:08–06:52 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 27 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:00–05:56, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 06:51–08:07
- चर, सामान्य, 08:07–09:23
- लाभ, शुभ, 09:23–10:39
- अमृत, शुभ, 10:39–11:55
- काल, अशुभ, 11:55–13:11
- शुभ, 13:11–14:27
- रोग, अशुभ, 14:27–15:43
- उद्वेग, अशुभ, 15:43–16:59
- शुभ, 16:59–18:43
- अमृत, शुभ, 18:43–20:28
- चर, सामान्य, 20:28–22:12
- रोग, अशुभ, 22:12–23:56
- काल, अशुभ, 23:56–01:40 सोम
- लाभ, शुभ, 01:40–03:24 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 03:24–05:08 सोम
- शुभ, 05:08–06:52 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 11:35–12:15, शुभ
- यमगण्ड, 11:55–13:11, अशुभ
- गुलिक काल, 14:27–15:43, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:38–16:19, अशुभ
- राहु काल, 15:43–16:59, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:01–05:57 सोम
हर मान कैसे निकलता है
Khmelnytskyi में दीवाली रवि 27 अक्टूबर को क्यों है?
दीवाली · लक्ष्मी पूजा रवि 27 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं।
लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। अमावस्या रवि 27 अक्टूबर को 08:53 से सोम 28 अक्टूबर को 05:38 तक है, इसलिए केवल रविवार का प्रदोष काल (16:59–19:46) उसके भीतर है। हर मत यही दिन लेता है।
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 16:59–19:46। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 17:42 से 19:22 तक उदित रहता है।
Khmelnytskyi में नरक चतुर्दशी रवि 27 अक्टूबर को क्यों है?
नरक चतुर्दशी रवि 27 अक्टूबर को है: उस सुबह पूरे अरुणोदय में चतुर्दशी है, और किसी सुबह नहीं।
अभ्यंग स्नान अरुणोदय में होता है, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। चतुर्दशी शनि 26 अक्टूबर को 13:16 से रवि 27 अक्टूबर को 08:53 तक है, इसलिए केवल रविवार का अरुणोदय (05:15–06:51) उसके भीतर है। नरक चतुर्दशी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; अरुणोदय Tithika की परिपाटी है।
Khmelnytskyi में अमावस्या रवि 27 अक्टूबर को क्यों है?
अमावस्या रवि 27 अक्टूबर को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या रवि 27 अक्टूबर को 08:53 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और सोम 28 अक्टूबर को 05:38 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: रवि 27 अक्टूबर। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
रवि 27 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्दशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 346.8° आगे था: कृष्ण चतुर्दशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 336°–348° उनतीसवीं है, कृष्ण चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:51। त्रयोदशी उससे पहले 13:16 शनि पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 08:53 को समाप्त होगी, जब बढ़त 348° होगी। बढ़त 14 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
अमावस्या क्षय क्यों है?
अमावस्या एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन अमावस्या नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। अमावस्या 08:53 को शुरू हुई और 05:38 सोम को समाप्त, 06:51 और 06:52 सोम के सूर्योदयों के बीच। रविवार को चतुर्दशी है और सोमवार को प्रतिपदा: अमावस्या यहाँ क्षय तिथि है।
रवि 27 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:00–05:56
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:00–05:56।
शनि 26 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:01 शनि से सूर्योदय 06:51 तक थी, 13 घं 50 मि। इसे 55 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 27 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:35–12:15
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:35–12:15।
रवि 27 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:38–16:19
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 15:38–16:19।
यहाँ दिन, 06:51 से 16:59, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 40 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 15:38–16:19।
रवि 27 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:51–08:07 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:51 से 16:59, 1 घं 16 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 16:59 से 06:52 सोम, 1 घं 44 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 27 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 15:43–16:59
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 15:43–16:59।
रवि 27 अक्टूबर को यमगंड कब है? 11:55–13:11
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 11:55–13:11।
रवि 27 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 14:27–15:43
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 14:27–15:43।
यहाँ दिन 06:51 से 16:59 तक है, 10 घं 8 मि। इसे 1 घं 16 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 27 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:51
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:51, सूर्यास्त 16:59, 10 घं 8 मि का दिन।
रवि 27 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 16:59
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:51, सूर्यास्त 16:59, 10 घं 8 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 8 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 53 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 10 घं 8 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 13 घं 53 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 27 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? चित्रा
सूर्योदय पर चंद्रमा 176.2° पर था: चित्रा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। चित्रा 173°20′–186°40′ तक है; चंद्रमा 173°20′ पर उसके पद 1 में आया। वह 23:46 को निकलेगा, स्वाती में।
रवि 27 अक्टूबर को कौन सा योग है? विष्कम्भ
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 365.5° थे, एक चक्कर और 5.5°: विष्कम्भ।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 189.3° + 176.2° = 365.5°, एक पूरा चक्कर और 5.5°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 0°00′–13°20′ पहला है, विष्कम्भ। यह 18:39 को समाप्त होता है, फिर प्रीति।
रवि 27 अक्टूबर को कौन सा करण है? शकुनि
सूर्योदय पर बढ़त 346.8° थी: चतुर्दशी का दूसरा आधा, शकुनि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा विष्टि है और दूसरा शकुनि। विष्टि 23:34 शनि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 342° हुई; शकुनि 08:53 तक है।
रवि 27 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 06:51, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:51 से 06:52 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 27 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 28 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 28 अक्टूबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
रवि 27 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 28 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
रवि 27 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2076 · शक 1941
विक्रम संवत 2076 5 अप्रैल 2019 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 5 अप्रैल 2019, 11:50 शुक्र। तब से सूर्य तारों के बीच 198.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2076 गिनता है; शक संवत 1941।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 27 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 06:47 सोम
चंद्रमा यहाँ 06:47 सोम पर उदय होता है।
रवि 27 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:07
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:07 पर अस्त हुआ; वह फिर 06:47 सोम पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:07 पर, रात में, अस्त होता है; वह फिर 06:47 सोम पर उदय होगा।