Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग बुध 31 अक्टूबर 2096
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
व्रत
पूर्णिमा
पूर्णिमा बुध 31 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है। बुध 31 अक्टूबर क्यों?
पूर्णिमा: Ipameri में हर तारीख़31 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, बुध 31 अक्टूबर
- 04:03–04:48ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:33 से
- 05:33–07:09लाभ चौघड़िया
- 07:09–08:45अमृत चौघड़ियायमगण्ड में
- 10:20–11:56शुभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 16:43–18:19लाभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:19 के बाद
- 19:43–21:07शुभ चौघड़िया
- 21:07–22:31अमृत चौघड़िया
-
00:23–01:47 गुरुअमृत कालभरणी में
- 02:44–04:09 गुरुलाभ चौघड़िया
- 04:03–04:48 गुरुअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:33–07:09लाभशुभ
- 07:09–08:45अमृतयमगण्ड में
- 08:45–10:20कालअशुभ
- 10:20–11:56शुभगुलिक काल में
- 11:56–13:32रोगअशुभ
- 13:32–15:07उद्वेगअशुभ
- 15:07–16:43चरसामान्य
- 16:43–18:19लाभशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:19–19:43उद्वेगअशुभ
- 19:43–21:07शुभ
- 21:07–22:31अमृतशुभ
- 22:31–23:56चरसामान्य
- 23:56–01:20 गुरुरोगअशुभ
- 01:20–02:44 गुरुकालअशुभ
- 02:44–04:09 गुरुलाभशुभ
- 04:09–05:33 गुरुउद्वेगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, बुध 31 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:03–04:48, शुभ
- लाभ, शुभ, 05:33–07:09
- अमृत, शुभ, 07:09–08:45
- काल, अशुभ, 08:45–10:20
- शुभ, 10:20–11:56
- रोग, अशुभ, 11:56–13:32
- उद्वेग, अशुभ, 13:32–15:07
- चर, सामान्य, 15:07–16:43
- लाभ, शुभ, 16:43–18:19
- उद्वेग, अशुभ, 18:19–19:43
- शुभ, 19:43–21:07
- अमृत, शुभ, 21:07–22:31
- चर, सामान्य, 22:31–23:56
- रोग, अशुभ, 23:56–01:20 गुरु
- काल, अशुभ, 01:20–02:44 गुरु
- लाभ, शुभ, 02:44–04:09 गुरु
- उद्वेग, अशुभ, 04:09–05:33 गुरु
- यमगण्ड, 07:09–08:45, अशुभ
- गुलिक काल, 10:20–11:56, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 11:30–12:21, अशुभ
- राहु काल, 11:56–13:32, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:03–04:48 गुरु
हर मान कैसे निकलता है
Ipameri में पूर्णिमा बुध 31 अक्टूबर को क्यों है?
पूर्णिमा बुध 31 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा है।
पूर्णिमा सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पूर्णिमा मंगल 30 अक्टूबर को 11:45 से बुध 31 अक्टूबर को 08:17 तक है, इसलिए वह केवल बुध 31 अक्टूबर के सूर्योदय (05:33) पर है। पूर्णिमा का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
बुध 31 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल पूर्णिमा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 178.4° आगे था: शुक्ल पूर्णिमा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 168°–180° पंद्रहवीं है, शुक्ल पूर्णिमा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:33। चतुर्दशी उससे पहले 11:45 मंगल पर समाप्त हुई। पूर्णिमा 08:17 को समाप्त होगी, जब बढ़त 180° होगी। बढ़त 16 अक्टूबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
प्रतिपदा क्षय क्यों है?
प्रतिपदा एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन प्रतिपदा नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। प्रतिपदा 08:17 को शुरू हुई और 04:41 गुरु को समाप्त, 05:33 और 05:33 गुरु के सूर्योदयों के बीच। बुधवार को पूर्णिमा है और गुरुवार को द्वितीया: प्रतिपदा यहाँ क्षय तिथि है।
बुध 31 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:03–04:48
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:03–04:48।
मंगल 30 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 18:18 मंगल से सूर्योदय 05:33 तक थी, 11 घं 15 मि। इसे 45 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
बुध 31 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 11:30–12:21
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है: 11:30–12:21।
यहाँ दिन, 05:33 से 18:19, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 51 मि का। बुधवार को दुर्मुहूर्त आठवाँ है, 11:30–12:21: वह आठवाँ, बीच वाला, मुहूर्त लेता है, इसलिए बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं होता।
बुध 31 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:33–07:09 लाभ है, जिसके स्वामी बुध हैं, बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:33 से 18:19, 1 घं 35 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:19 से 05:33 गुरु, 1 घं 24 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
बुध 31 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 11:56–13:32
राहु काल बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 11:56–13:32।
बुध 31 अक्टूबर को यमगंड कब है? 07:09–08:45
यमगण्ड बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 07:09–08:45।
बुध 31 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 10:20–11:56
गुलिक काल बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:20–11:56।
यहाँ दिन 05:33 से 18:19 तक है, 12 घं 46 मि। इसे 1 घं 35 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: बुधवार को राहु काल पाँचवाँ भाग है, यमगण्ड दूसरा और गुलिक काल चौथा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
बुध 31 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 05:33
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:33, सूर्यास्त 18:19, 12 घं 46 मि का दिन।
बुध 31 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:19
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:33, सूर्यास्त 18:19, 12 घं 46 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 46 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 14 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 46 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 14 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
बुध 31 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? अश्विनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 12.1° पर था: अश्विनी, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। अश्विनी 0°00′–13°20′ तक है; चंद्रमा 10° पर उसके पद 4 में आया। वह 07:27 को निकलेगा, भरणी में।
बुध 31 अक्टूबर को कौन सा योग है? सिद्धि
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 205.9° थे: सिद्धि।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 193.8° + 12.1° = 205.9°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 200°00′–213°20′ सोलहवाँ है, सिद्धि। यह 16:38 को समाप्त होता है, फिर व्यतीपात।
बुध 31 अक्टूबर को कौन सा करण है? बव
सूर्योदय पर बढ़त 178.4° थी: पूर्णिमा का दूसरा आधा, बव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पूर्णिमा का पहला आधा विष्टि है और दूसरा बव। विष्टि 22:03 मंगल पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 174° हुई; बव 08:17 तक है।
बुध 31 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? बुधवार
यह दिन बुधवार को सूर्योदय, 05:33, पर शुरू हुआ: बुधवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:33 से 05:33 गुरु तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी बुधवार के हैं।
बुध 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 16 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 14 नवंबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
बुध 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष आश्विन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 16 अक्टूबर की अमावस्या ने, सूर्य कन्या में, आश्विन शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में आश्विन है।
बुध 31 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2153 · शक 2018
विक्रम संवत 2153 24 मार्च 2096 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 24 मार्च 2096, 05:56 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 214.2° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2153 गिनता है; शक संवत 2018।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
बुध 31 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 18:42
चंद्रमा यहाँ 18:42 पर उदय होता है।
बुध 31 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 05:34
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 05:34 पर अस्त हुआ; वह फिर 18:42 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 05:34 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 18:42 पर उदय होगा।