Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग बुध 4 नवंबर 2037
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
त्योहार
धनतेरस
धनतेरस बुध 4 नवंबर को है: उस शाम त्रयोदशी प्रदोष काल को छूती है, और किसी शाम नहीं। बुध 4 नवंबर क्यों?
धनतेरस: Ipameri में हर तारीख़व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत बुध 4 नवंबर को है: उस शाम त्रयोदशी प्रदोष काल को छूती है, और किसी शाम नहीं। बुध 4 नवंबर क्यों?
प्रदोष व्रत: Ipameri में हर तारीख़व्रत का पारण
रमा एकादशी
4 नवंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, बुध 4 नवंबर
- 04:02–04:47ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:32 से
- 05:32–07:08लाभ चौघड़िया
- 07:08–08:44अमृत चौघड़ियायमगण्ड में
-
08:48–10:14अमृत कालउत्तराफाल्गुनी में
- 10:20–11:56शुभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 16:44–18:20लाभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:20 के बाद
- 19:44–21:08शुभ चौघड़िया
- 21:08–22:32अमृत चौघड़िया
- 02:44–04:08 गुरुलाभ चौघड़िया
- 04:02–04:47 गुरुअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:32–07:08लाभशुभ
- 07:08–08:44अमृतयमगण्ड में
- 08:44–10:20कालअशुभ
- 10:20–11:56शुभगुलिक काल में
- 11:56–13:32रोगअशुभ
- 13:32–15:08उद्वेगअशुभ
- 15:08–16:44चरसामान्य
- 16:44–18:20लाभशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:20–19:44उद्वेगअशुभ
- 19:44–21:08शुभ
- 21:08–22:32अमृतशुभ
- 22:32–23:56चरसामान्य
- 23:56–01:20 गुरुरोगअशुभ
- 01:20–02:44 गुरुकालअशुभ
- 02:44–04:08 गुरुलाभशुभ
- 04:08–05:31 गुरुउद्वेगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, बुध 4 नवंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:02–04:47, शुभ
- लाभ, शुभ, 05:32–07:08
- अमृत, शुभ, 07:08–08:44
- काल, अशुभ, 08:44–10:20
- शुभ, 10:20–11:56
- रोग, अशुभ, 11:56–13:32
- उद्वेग, अशुभ, 13:32–15:08
- चर, सामान्य, 15:08–16:44
- लाभ, शुभ, 16:44–18:20
- उद्वेग, अशुभ, 18:20–19:44
- शुभ, 19:44–21:08
- अमृत, शुभ, 21:08–22:32
- चर, सामान्य, 22:32–23:56
- रोग, अशुभ, 23:56–01:20 गुरु
- काल, अशुभ, 01:20–02:44 गुरु
- लाभ, शुभ, 02:44–04:08 गुरु
- उद्वेग, अशुभ, 04:08–05:31 गुरु
- यमगण्ड, 07:08–08:44, अशुभ
- गुलिक काल, 10:20–11:56, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 11:30–12:22, अशुभ
- राहु काल, 11:56–13:32, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:02–04:47 गुरु
हर मान कैसे निकलता है
Ipameri में धनतेरस बुध 4 नवंबर को क्यों है?
धनतेरस बुध 4 नवंबर को है: उस शाम त्रयोदशी प्रदोष काल को छूती है, और किसी शाम नहीं।
धनतेरस की पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी बुध 4 नवंबर को 19:14 से गुरु 5 नवंबर को 15:49 तक है, इसलिए वह केवल बुधवार के प्रदोष काल (18:20–20:34) को छूती है। धनतेरस का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
धनतेरस पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 18:20–20:34। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 19:07 से 20:34 तक उदित रहता है।
Ipameri में प्रदोष व्रत बुध 4 नवंबर को क्यों है?
प्रदोष व्रत बुध 4 नवंबर को है: उस शाम त्रयोदशी प्रदोष काल को छूती है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी बुध 4 नवंबर को 19:14 से गुरु 5 नवंबर को 15:49 तक है, इसलिए वह केवल बुधवार के प्रदोष काल (18:20–20:34) को छूती है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
बुध 4 नवंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 316.1° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:32। एकादशी उससे पहले 22:25 मंगल पर समाप्त हुई। द्वादशी 19:14 को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 24 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
नई दिल्ली में एकादशी क्यों है?
नई दिल्ली में एकादशी है, Ipameri में द्वादशी।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो।
नई दिल्ली · IST
यहाँ सूर्योदय, 06:35, एकादशी की समाप्ति 06:55 से पहले हुआ: यह दिन एकादशी है। द्वादशी अगले सूर्योदय से पहले, 03:44 गुरु को, समाप्त होती है, इसलिए यहाँ कोई दिन द्वादशी नहीं होता: वह क्षय है।
Ipameri · UTC−3
यहाँ सूर्योदय, 05:32, एकादशी की समाप्ति 22:25 मंगल के बाद हुआ: यह दिन द्वादशी है।
बुध 4 नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:02–04:47
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:02–04:47।
मंगल 3 नवंबर की रात सूर्यास्त 18:20 मंगल से सूर्योदय 05:32 तक थी, 11 घं 12 मि। इसे 44 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
बुध 4 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 11:30–12:22
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है: 11:30–12:22।
यहाँ दिन, 05:32 से 18:20, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 51 मि का। बुधवार को दुर्मुहूर्त आठवाँ है, 11:30–12:22: वह आठवाँ, बीच वाला, मुहूर्त लेता है, इसलिए बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं होता।
बुध 4 नवंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:32–07:08 लाभ है, जिसके स्वामी बुध हैं, बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:32 से 18:20, 1 घं 36 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:20 से 05:31 गुरु, 1 घं 23 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
बुध 4 नवंबर को राहुकाल कब है? 11:56–13:32
राहु काल बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 11:56–13:32।
बुध 4 नवंबर को यमगंड कब है? 07:08–08:44
यमगण्ड बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 07:08–08:44।
बुध 4 नवंबर को गुलिक काल कब है? 10:20–11:56
गुलिक काल बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:20–11:56।
यहाँ दिन 05:32 से 18:20 तक है, 12 घं 48 मि। इसे 1 घं 36 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: बुधवार को राहु काल पाँचवाँ भाग है, यमगण्ड दूसरा और गुलिक काल चौथा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
बुध 4 नवंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 05:32
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:32, सूर्यास्त 18:20, 12 घं 48 मि का दिन।
बुध 4 नवंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:20
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:32, सूर्यास्त 18:20, 12 घं 48 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 48 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 11 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 48 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 11 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
बुध 4 नवंबर को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराफाल्गुनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 154° पर था: उत्तराफाल्गुनी, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराफाल्गुनी 146°40′–160°00′ तक है; चंद्रमा 153°20′ पर उसके पद 3 में आया। वह 15:17 को निकलेगा, हस्त में।
बुध 4 नवंबर को कौन सा योग है? वैधृति
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 351.9° थे: वैधृति।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 197.9° + 154° = 351.9°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 346°40′–360°00′ सत्ताईसवाँ है, वैधृति। यह 17:52 को समाप्त होता है, फिर विष्कम्भ।
बुध 4 नवंबर को कौन सा करण है? कौलव
सूर्योदय पर बढ़त 316.1° थी: द्वादशी का पहला आधा, कौलव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 08:51 तक है, जब बढ़त 318° होगी; तैतिल 19:14 तक।
बुध 4 नवंबर को कौन सा वार है, और कब से? बुधवार
यह दिन बुधवार को सूर्योदय, 05:32, पर शुरू हुआ: बुधवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:32 से 05:31 गुरु तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी बुधवार के हैं।
बुध 4 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 8 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 7 नवंबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
बुध 4 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 7 नवंबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
बुध 4 नवंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2094 · शक 1959
विक्रम संवत 2094 16 मार्च 2037 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 16 मार्च 2037, 20:36 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 225.6° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2094 गिनता है; शक संवत 1959।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
बुध 4 नवंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 04:06 गुरु
चंद्रमा यहाँ 04:06 गुरु पर उदय होता है।
बुध 4 नवंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 15:35
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 15:35 पर अस्त हुआ; वह फिर 04:06 गुरु पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 15:35 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 04:06 गुरु पर उदय होगा।