Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग शुक्र 12 जून 2026
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत शुक्र 12 जून को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। शुक्र 12 जून क्यों?
प्रदोष व्रत: Ipameri में हर तारीख़व्रत का पारण
परमा एकादशी
12 जून का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 12 जून
- 04:56–05:48ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:40 से
- 08:03–09:26लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 09:37–10:49अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:12–12:34अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 12:12–12:34शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 13:19–13:35शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
-
16:22–16:42अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · भरणी में
- सूर्यास्त 17:45 के बाद
- 20:58–22:35लाभ चौघड़िया
- 00:12–01:49 शनिशुभ चौघड़िया
- 01:49–03:26 शनिअमृत चौघड़िया
- 04:57–05:48 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:40–08:03चरसामान्य
- 08:03–09:26लाभगुलिक काल में
- 09:26–10:49अमृतशुभ
- 10:49–12:12कालअशुभ
- 12:12–13:35शुभ
- 13:35–14:58रोगअशुभ
- 14:58–16:22उद्वेगअशुभ
- 16:22–17:45चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 17:45–19:22रोगअशुभ
- 19:22–20:58कालअशुभ
- 20:58–22:35लाभशुभ
- 22:35–00:12 शनिउद्वेगअशुभ
- 00:12–01:49 शनिशुभ
- 01:49–03:26 शनिअमृतशुभ
- 03:26–05:03 शनिचरसामान्य
- 05:03–06:40 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 12 जून: ब्रह्म मुहूर्त, 04:56–05:48, शुभ
- चर, सामान्य, 06:40–08:03
- लाभ, शुभ, 08:03–09:26
- अमृत, शुभ, 09:26–10:49
- काल, अशुभ, 10:49–12:12
- शुभ, 12:12–13:35
- रोग, अशुभ, 13:35–14:58
- उद्वेग, अशुभ, 14:58–16:22
- चर, सामान्य, 16:22–17:45
- रोग, अशुभ, 17:45–19:22
- काल, अशुभ, 19:22–20:58
- लाभ, शुभ, 20:58–22:35
- उद्वेग, अशुभ, 22:35–00:12 शनि
- शुभ, 00:12–01:49 शनि
- अमृत, शुभ, 01:49–03:26 शनि
- चर, सामान्य, 03:26–05:03 शनि
- रोग, अशुभ, 05:03–06:40 शनि
- गुलिक काल, 08:03–09:26, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 08:53–09:37, अशुभ
- राहु काल, 10:49–12:12, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:50–12:34, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 12:34–13:19, अशुभ
- यमगण्ड, 14:58–16:22, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:57–05:48 शनि
हर मान कैसे निकलता है
Ipameri में प्रदोष व्रत शुक्र 12 जून को क्यों है?
प्रदोष व्रत शुक्र 12 जून को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शुक्र 12 जून को 11:07 से शनि 13 जून को 07:38 तक है, इसलिए केवल शुक्रवार का प्रदोष काल (17:45–20:20) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
शुक्र 12 जून को कौन सी तिथि है? कृष्ण द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 321.4° आगे था: कृष्ण द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 312°–324° सत्ताईसवीं है, कृष्ण द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:40। एकादशी उससे पहले 14:06 गुरु पर समाप्त हुई। द्वादशी 11:07 को समाप्त होगी, जब बढ़त 324° होगी। बढ़त 31 मई की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
शुक्र 12 जून को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:56–05:48
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:56–05:48।
गुरु 11 जून की रात सूर्यास्त 17:45 गुरु से सूर्योदय 06:40 तक थी, 12 घं 55 मि। इसे 51 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 12 जून को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:50–12:34
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:50–12:34।
शुक्र 12 जून को दुर्मुहूर्त कब है? 08:53–09:37
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 08:53–09:37 और 12:34–13:19।
शुक्र 12 जून को दुर्मुहूर्त कब है? 12:34–13:19
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 08:53–09:37 और 12:34–13:19।
यहाँ दिन, 06:40 से 17:45, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 44 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 08:53–09:37 और 12:34–13:19।
शुक्र 12 जून का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:40–08:03 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:40 से 17:45, 1 घं 23 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:45 से 06:40 शनि, 1 घं 36 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 12 जून को राहुकाल कब है? 10:49–12:12
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:49–12:12।
शुक्र 12 जून को यमगंड कब है? 14:58–16:22
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 14:58–16:22।
शुक्र 12 जून को गुलिक काल कब है? 08:03–09:26
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:03–09:26।
यहाँ दिन 06:40 से 17:45 तक है, 11 घं 5 मि। इसे 1 घं 23 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 12 जून को सूर्योदय कितने बजे है? 06:40
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:40, सूर्यास्त 17:45, 11 घं 5 मि का दिन।
शुक्र 12 जून को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:45
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:40, सूर्यास्त 17:45, 11 घं 5 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 5 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 55 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 5 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 55 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 12 जून को कौन सा नक्षत्र है? भरणी
सूर्योदय पर चंद्रमा 18.7° पर था: भरणी, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। भरणी 13°20′–26°40′ तक है; चंद्रमा 16°40′ पर उसके पद 2 में आया। वह 19:35 को निकलेगा, कृत्तिका में।
शुक्र 12 जून को कौन सा योग है? अतिगण्ड
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 75.9° थे: अतिगण्ड।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 57.2° + 18.7° = 75.9°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 66°40′–80°00′ छठा है, अतिगण्ड। यह 12:56 को समाप्त होता है, फिर सुकर्मा।
शुक्र 12 जून को कौन सा करण है? तैतिल
सूर्योदय पर बढ़त 321.4° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, तैतिल।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा कौलव है और दूसरा तैतिल। कौलव 00:41 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 318° हुई; तैतिल 11:07 तक है।
शुक्र 12 जून को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 06:40, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:40 से 06:40 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 12 जून को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? ज्येष्ठ (अधिक)
16 मई और 14 जून की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक ज्येष्ठ।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 16 मई 17:01 शनि से 14 जून 23:54 रवि तक सूर्य वृषभ में रहा; मिथुन में वह अमावस्या के बाद 15 जून 04:22 सोम को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक ज्येष्ठ है, जो ज्येष्ठ से पहले आता है।
शुक्र 12 जून को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? ज्येष्ठ (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष ज्येष्ठ (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 14 जून की अमावस्या, सूर्य वृषभ में, ज्येष्ठ (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ ज्येष्ठ (अधिक) है, और अमान्त गणना में ज्येष्ठ (अधिक)।
शुक्र 12 जून को कौन सा संवत है? विक्रम 2083 · शक 1948
विक्रम संवत 2083 18 मार्च 2026 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 18 मार्च 2026, 22:23 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 83° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2083 गिनता है; शक संवत 1948।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 12 जून को चंद्रोदय कितने बजे है? 04:52 शनि
चंद्रमा यहाँ 04:52 शनि पर उदय होता है।
शुक्र 12 जून को चंद्रास्त कितने बजे है? 15:15
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 15:15 पर अस्त हुआ; वह फिर 04:52 शनि पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 15:15 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 04:52 शनि पर उदय होगा।