Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग शनि 24 अप्रैल 2021
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत शनि 24 अप्रैल को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। शनि 24 अप्रैल क्यों?
प्रदोष व्रत: Ipameri में हर तारीख़व्रत का पारण
कामदा एकादशी
24 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 24 अप्रैल
- 04:44–05:34ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:24 से
- 07:56–09:17शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 11:47–12:33अभिजीत मुहूर्त
-
13:17–13:37अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · उत्तराफाल्गुनी में
- 13:37–15:04लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 15:04–16:30अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:57 के बाद
- 17:57–19:30लाभ चौघड़िया
- 21:04–22:37शुभ चौघड़िया
- 22:37–00:10 रविअमृत चौघड़िया
- 04:51–06:24 रविलाभ चौघड़िया
- 04:44–05:34 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:24–07:50कालअशुभ
- 07:50–09:17शुभ
- 09:17–10:44रोगअशुभ
- 10:44–12:10उद्वेगअशुभ
- 12:10–13:37चरसामान्य
- 13:37–15:04लाभयमगण्ड में
- 15:04–16:30अमृतशुभ
- 16:30–17:57कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 17:57–19:30लाभशुभ
- 19:30–21:04उद्वेगअशुभ
- 21:04–22:37शुभ
- 22:37–00:10 रविअमृतशुभ
- 00:10–01:44 रविचरसामान्य
- 01:44–03:17 रविरोगअशुभ
- 03:17–04:51 रविकालअशुभ
- 04:51–06:24 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 24 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 04:44–05:34, शुभ
- काल, अशुभ, 06:24–07:50
- शुभ, 07:50–09:17
- रोग, अशुभ, 09:17–10:44
- उद्वेग, अशुभ, 10:44–12:10
- चर, सामान्य, 12:10–13:37
- लाभ, शुभ, 13:37–15:04
- अमृत, शुभ, 15:04–16:30
- काल, अशुभ, 16:30–17:57
- लाभ, शुभ, 17:57–19:30
- उद्वेग, अशुभ, 19:30–21:04
- शुभ, 21:04–22:37
- अमृत, शुभ, 22:37–00:10 रवि
- चर, सामान्य, 00:10–01:44 रवि
- रोग, अशुभ, 01:44–03:17 रवि
- काल, अशुभ, 03:17–04:51 रवि
- लाभ, शुभ, 04:51–06:24 रवि
- गुलिक काल, 06:24–07:50, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:24–07:10, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:10–07:56, अशुभ
- राहु काल, 09:17–10:44, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:47–12:33, शुभ
- यमगण्ड, 13:37–15:04, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:44–05:34 रवि
हर मान कैसे निकलता है
Ipameri में प्रदोष व्रत शनि 24 अप्रैल को क्यों है?
प्रदोष व्रत शनि 24 अप्रैल को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शनि 24 अप्रैल को 10:47 से रवि 25 अप्रैल को 07:43 तक है, इसलिए केवल शनिवार का प्रदोष काल (17:57–20:26) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
शनि 24 अप्रैल को कौन सी तिथि है? शुक्ल द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 141.5° आगे था: शुक्ल द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 132°–144° बारहवीं है, शुक्ल द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:24। एकादशी उससे पहले 13:18 शुक्र पर समाप्त हुई। द्वादशी 10:47 को समाप्त होगी, जब बढ़त 144° होगी। बढ़त 11 अप्रैल की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
शनि 24 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:44–05:34
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:44–05:34।
शुक्र 23 अप्रैल की रात सूर्यास्त 17:57 शुक्र से सूर्योदय 06:24 तक थी, 12 घं 27 मि। इसे 49 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 24 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:47–12:33
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:47–12:33।
शनि 24 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 06:24–07:10
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:24–07:10 और 07:10–07:56।
शनि 24 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 07:10–07:56
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:24–07:10 और 07:10–07:56।
यहाँ दिन, 06:24 से 17:57, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 46 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 06:24–07:10 और 07:10–07:56।
शनि 24 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:24–07:50 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:24 से 17:57, 1 घं 26 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:57 से 06:24 रवि, 1 घं 33 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 24 अप्रैल को राहुकाल कब है? 09:17–10:44
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:17–10:44।
शनि 24 अप्रैल को यमगंड कब है? 13:37–15:04
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:37–15:04।
शनि 24 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 06:24–07:50
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:24–07:50।
यहाँ दिन 06:24 से 17:57 तक है, 11 घं 33 मि। इसे 1 घं 26 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 24 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 06:24
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:24, सूर्यास्त 17:57, 11 घं 33 मि का दिन।
शनि 24 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:57
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:24, सूर्यास्त 17:57, 11 घं 33 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 33 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 27 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 33 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 27 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 24 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराफाल्गुनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 151.8° पर था: उत्तराफाल्गुनी, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराफाल्गुनी 146°40′–160°00′ तक है; चंद्रमा 150° पर उसके पद 2 में आया। वह 19:53 को निकलेगा, हस्त में।
शनि 24 अप्रैल को कौन सा योग है? व्याघात
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 162.1° थे: व्याघात।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 10.3° + 151.8° = 162.1°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 160°00′–173°20′ तेरहवाँ है, व्याघात। यह 23:43 को समाप्त होता है, फिर हर्षण।
शनि 24 अप्रैल को कौन सा करण है? बालव
सूर्योदय पर बढ़त 141.5° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, बालव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 00:07 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 138° हुई; बालव 10:47 तक है।
शनि 24 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 06:24, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:24 से 06:24 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 24 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? चैत्र
यह मास 11 अप्रैल की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मीन में था: चैत्र।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मीन से चैत्र। सूर्य 13 अप्रैल को, मास के भीतर, मेष में जाता है। अगली अमावस्या, 11 मई, उसे मेष में पाती है और वैशाख शुरू करती है।
शनि 24 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष चैत्र का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 11 अप्रैल की अमावस्या ने, सूर्य मीन में, चैत्र शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में चैत्र है।
शनि 24 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2078 · शक 1943
विक्रम संवत 2078 11 अप्रैल 2021 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 11 अप्रैल 2021, 23:30 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 12° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2078 गिनता है; शक संवत 1943।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 24 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 16:21
चंद्रमा यहाँ 16:21 पर उदय होता है।
शनि 24 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 04:39 रवि
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 16:21 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 04:39 रवि पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 16:21 पर उदय हुआ; वह फिर 04:39 रवि पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।