Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग शुक्र 18 सितंबर 2020
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
18 सितंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 18 सितंबर
- 04:29–05:17ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:05 से
- 07:35–09:06लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 09:18–10:36अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:06–12:30अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 12:06–12:30शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 13:19–13:37शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
-
14:19–15:07अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · हस्त में
- सूर्यास्त 18:08 के बाद
- 21:07–22:36लाभ चौघड़िया
- 00:06–01:35 शनिशुभ चौघड़िया
- 01:35–03:05 शनिअमृत चौघड़िया
- 04:29–05:16 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:05–07:35चरसामान्य
- 07:35–09:06लाभगुलिक काल में
- 09:06–10:36अमृतशुभ
- 10:36–12:06कालअशुभ
- 12:06–13:37शुभ
- 13:37–15:07रोगअशुभ
- 15:07–16:37उद्वेगअशुभ
- 16:37–18:08चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 18:08–19:37रोगअशुभ
- 19:37–21:07कालअशुभ
- 21:07–22:36लाभशुभ
- 22:36–00:06 शनिउद्वेगअशुभ
- 00:06–01:35 शनिशुभ
- 01:35–03:05 शनिअमृतशुभ
- 03:05–04:35 शनिचरसामान्य
- 04:35–06:04 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 18 सितंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:29–05:17, शुभ
- चर, सामान्य, 06:05–07:35
- लाभ, शुभ, 07:35–09:06
- अमृत, शुभ, 09:06–10:36
- काल, अशुभ, 10:36–12:06
- शुभ, 12:06–13:37
- रोग, अशुभ, 13:37–15:07
- उद्वेग, अशुभ, 15:07–16:37
- चर, सामान्य, 16:37–18:08
- रोग, अशुभ, 18:08–19:37
- काल, अशुभ, 19:37–21:07
- लाभ, शुभ, 21:07–22:36
- उद्वेग, अशुभ, 22:36–00:06 शनि
- शुभ, 00:06–01:35 शनि
- अमृत, शुभ, 01:35–03:05 शनि
- चर, सामान्य, 03:05–04:35 शनि
- रोग, अशुभ, 04:35–06:04 शनि
- गुलिक काल, 07:35–09:06, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 08:29–09:18, अशुभ
- राहु काल, 10:36–12:06, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:42–12:30, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 12:30–13:19, अशुभ
- यमगण्ड, 15:07–16:37, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:29–05:16 शनि
हर मान कैसे निकलता है
शुक्र 18 सितंबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल द्वितीया
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 13° आगे था: शुक्ल द्वितीया।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 12°–24° दूसरी है, शुक्ल द्वितीया। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:05। प्रतिपदा उससे पहले 04:20 पर समाप्त हुई। द्वितीया 00:40 शनि को समाप्त होगी, जब बढ़त 24° होगी। बढ़त 17 सितंबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
नई दिल्ली में प्रतिपदा क्यों है?
नई दिल्ली में प्रतिपदा है, Ipameri में द्वितीया।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो।
नई दिल्ली · IST
यहाँ सूर्योदय, 06:07, प्रतिपदा की समाप्ति 12:50 से पहले हुआ: यह दिन प्रतिपदा है।
Ipameri · UTC−3
यहाँ सूर्योदय, 06:05, प्रतिपदा की समाप्ति 04:20 के बाद हुआ: यह दिन द्वितीया है।
शुक्र 18 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:29–05:17
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:29–05:17।
गुरु 17 सितंबर की रात सूर्यास्त 18:08 गुरु से सूर्योदय 06:05 तक थी, 11 घं 57 मि। इसे 47 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 18 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:42–12:30
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:42–12:30।
शुक्र 18 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 08:29–09:18
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 08:29–09:18 और 12:30–13:19।
शुक्र 18 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 12:30–13:19
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 08:29–09:18 और 12:30–13:19।
यहाँ दिन, 06:05 से 18:08, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 48 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 08:29–09:18 और 12:30–13:19।
शुक्र 18 सितंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:05–07:35 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:05 से 18:08, 1 घं 30 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:08 से 06:04 शनि, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 18 सितंबर को राहुकाल कब है? 10:36–12:06
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:36–12:06।
शुक्र 18 सितंबर को यमगंड कब है? 15:07–16:37
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:07–16:37।
शुक्र 18 सितंबर को गुलिक काल कब है? 07:35–09:06
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 07:35–09:06।
यहाँ दिन 06:05 से 18:08 तक है, 12 घं 3 मि। इसे 1 घं 30 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 18 सितंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:05
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:05, सूर्यास्त 18:08, 12 घं 3 मि का दिन।
शुक्र 18 सितंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:08
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:05, सूर्यास्त 18:08, 12 घं 3 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 3 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 56 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 3 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 56 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 18 सितंबर को कौन सा नक्षत्र है? हस्त
सूर्योदय पर चंद्रमा 164.8° पर था: हस्त, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। हस्त 160°00′–173°20′ तक है; चंद्रमा 163°20′ पर उसके पद 2 में आया। वह 19:36 को निकलेगा, चित्रा में।
शुक्र 18 सितंबर को कौन सा योग है? शुक्ल
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 316.6° थे: शुक्ल।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 151.8° + 164.8° = 316.6°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 306°40′–320°00′ चौबीसवाँ है, शुक्ल। यह 11:12 को समाप्त होता है, फिर ब्रह्म।
शुक्र 18 सितंबर को कौन सा करण है? बालव
सूर्योदय पर बढ़त 13° थी: द्वितीया का पहला आधा, बालव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वितीया का पहला आधा बालव है और दूसरा कौलव। बालव 14:30 तक है, जब बढ़त 18° होगी; कौलव 00:40 शनि तक।
शुक्र 18 सितंबर को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 06:05, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:05 से 06:04 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 18 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन (अधिक)
17 सितंबर और 16 अक्टूबर की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक आश्विन।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 17 सितंबर 08:00 गुरु से 16 अक्टूबर 16:31 शुक्र तक सूर्य कन्या में रहा; तुला में वह अमावस्या के बाद 16 अक्टूबर 22:35 शुक्र को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक आश्विन है, जो आश्विन से पहले आता है।
शुक्र 18 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष आश्विन (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 17 सितंबर की अमावस्या ने, सूर्य कन्या में, आश्विन (अधिक) शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में आश्विन (अधिक) है।
शुक्र 18 सितंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2077 · शक 1942
विक्रम संवत 2077 24 मार्च 2020 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 24 मार्च 2020, 06:28 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 171.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2077 गिनता है; शक संवत 1942।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 18 सितंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 07:06
चंद्रमा यहाँ 07:06 पर उदय होता है।
शुक्र 18 सितंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 19:33
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 07:06 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 19:33 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 07:06 पर उदय हुआ; वह फिर 19:33 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।