tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग रवि 30 अक्टूबर 2005

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−2 में

त्रयोदशी

कृष्ण पक्ष · 22:44 तक

फिर चतुर्दशी · 23:22 सोम तक

त्योहार

धनतेरस

धनतेरस पूजा मुहूर्त
20:26⁠–⁠21:33
प्रदोष काल 19:18⁠–⁠21:33

धनतेरस रवि 30 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है। रवि 30 अक्टूबर क्यों?

धनतेरस: Ipameri में हर तारीख़

व्रत

प्रदोष व्रत

प्रदोष पूजा मुहूर्त
19:18⁠–⁠21:33
प्रदोष काल 19:18⁠–⁠21:33

प्रदोष व्रत रवि 30 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है। रवि 30 अक्टूबर क्यों?

प्रदोष व्रत: Ipameri में हर तारीख़

व्रत

मासिक शिवरात्रि

निशीथ पूजा मुहूर्त
00:33⁠–⁠01:18 सोम
निशीथ काल 00:33⁠–⁠01:18 सोम

मासिक शिवरात्रि रवि 30 अक्टूबर को है: उस रात पूरे निशीथ काल में चतुर्दशी है, और किसी रात नहीं। रवि 30 अक्टूबर क्यों?

मासिक शिवरात्रि: Ipameri में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

05:04 06:34 19:18अगला सूर्योदय 06:34 सोम

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 06:34–08:10उद्वेगअशुभ
  • 08:10–09:45चरसामान्य
  • 09:45–11:21लाभशुभ
  • 11:21–12:56अमृतशुभ
  • 12:56–14:32कालअशुभ
  • 14:32–16:07शुभ
  • 16:07–17:42रोगअशुभ
  • 17:42–19:18उद्वेगअशुभ

रात का चौघड़िया

  • 19:18–20:42शुभ
  • 20:42–22:07अमृतशुभ
  • 22:07–23:31चरसामान्य
  • 23:31–00:56 सोमरोगअशुभ
  • 00:56–02:20 सोमकालअशुभ
  • 02:20–03:45 सोमलाभशुभ
  • 03:45–05:09 सोमउद्वेगअशुभ
  • 05:09–06:34 सोमशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, रवि 30 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:04–05:49, शुभ
  • उद्वेग, अशुभ, 06:34–08:10
  • चर, सामान्य, 08:10–09:45
  • लाभ, शुभ, 09:45–11:21
  • अमृत, शुभ, 11:21–12:56
  • काल, अशुभ, 12:56–14:32
  • शुभ, 14:32–16:07
  • रोग, अशुभ, 16:07–17:42
  • उद्वेग, अशुभ, 17:42–19:18
  • शुभ, 19:18–20:42
  • अमृत, शुभ, 20:42–22:07
  • चर, सामान्य, 22:07–23:31
  • रोग, अशुभ, 23:31–00:56 सोम
  • काल, अशुभ, 00:56–02:20 सोम
  • लाभ, शुभ, 02:20–03:45 सोम
  • उद्वेग, अशुभ, 03:45–05:09 सोम
  • शुभ, 05:09–06:34 सोम
  • अभिजीत मुहूर्त, 12:31–13:22, शुभ
  • यमगण्ड, 12:56–14:32, अशुभ
  • गुलिक काल, 16:07–17:42, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 17:36–18:27, अशुभ
  • राहु काल, 17:42–19:18, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:04–05:49 सोम

हर मान कैसे निकलता है

Ipameri में धनतेरस रवि 30 अक्टूबर को क्यों है?

धनतेरस रवि 30 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है।

द्वादशी त्रयोदशी 21:30 18:00 19:00 20:00 23:00 शनि 29 अक्टूबर प्रदोष काल 19:17–21:33
द्वादशी त्रयोदशी 21:30 18:00 20:00 शनि 29 अक्टूबर प्रदोष काल 19:17–21:33
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

धनतेरस की पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शनि 29 अक्टूबर को 21:30 से रवि 30 अक्टूबर को 22:44 तक है, और दोनों शाम प्रदोष काल को छूती है। निर्णयसिंधु वह शाम लेता है जिसका प्रदोष काल उसमें अधिक है: रवि 30 अक्टूबर। धनतेरस का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।

धनतेरस पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 19:18–21:33। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 20:26 से 21:33 तक उदित रहता है।

धनतेरस: Ipameri में हर तारीख़

Ipameri में प्रदोष व्रत रवि 30 अक्टूबर को क्यों है?

प्रदोष व्रत रवि 30 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है।

द्वादशी त्रयोदशी 21:30 18:00 19:00 20:00 23:00 शनि 29 अक्टूबर प्रदोष काल 19:17–21:33
द्वादशी त्रयोदशी 21:30 18:00 20:00 शनि 29 अक्टूबर प्रदोष काल 19:17–21:33
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शनि 29 अक्टूबर को 21:30 से रवि 30 अक्टूबर को 22:44 तक है, और दोनों शाम प्रदोष काल को छूती है। निर्णयसिंधु वह शाम लेता है जिसका प्रदोष काल उसमें अधिक है: रवि 30 अक्टूबर। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।

प्रदोष व्रत: Ipameri में हर तारीख़

Ipameri में मासिक शिवरात्रि रवि 30 अक्टूबर को क्यों है?

मासिक शिवरात्रि रवि 30 अक्टूबर को है: उस रात पूरे निशीथ काल में चतुर्दशी है, और किसी रात नहीं।

चतुर्दशी 22:44 00:00 01:00 02:00 03:00 रवि 30 अक्टूबर स्मार्त · वैष्णव निशीथ काल 00:33–01:18 सोम त्रयोदशी 22:44 तक
चतुर्दशी 22:44 00:00 02:00 रवि 30 अक्टूबर स्मार्त · वैष्णव निशीथ काल 00:33–01:18 सोम त्रयोदशी 22:44 तक
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: निशीथ काल। गहरी पट्टी: रात।

शिव पूजा निशीथ काल में होती है, आधी रात का मुहूर्त। चतुर्दशी रवि 30 अक्टूबर को 22:44 से सोम 31 अक्टूबर को 23:22 तक है, इसलिए केवल रविवार की रात का निशीथ काल (00:33 सोम–01:18 सोम) उसके भीतर है। मासिक शिवरात्रि का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; निशीथ काल Tithika की परिपाटी है।

मासिक शिवरात्रि: Ipameri में हर तारीख़

रवि 30 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण त्रयोदशी

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 328.3° आगे था: कृष्ण त्रयोदशी।

सूर्य अमावस्या 0° 328.3° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल त्रयोदशी 324°–336° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 328.3° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल त्रयोदशी 324°–336° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 324°–336° अट्ठाईसवीं है, कृष्ण त्रयोदशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:34। द्वादशी उससे पहले 21:30 शनि पर समाप्त हुई। त्रयोदशी 22:44 को समाप्त होगी, जब बढ़त 336° होगी। बढ़त 17 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।

रवि 30 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:04–05:49

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:04–05:49।

सूर्यास्त 19:17 शनि सूर्योदय 06:34 रवि समय, ऊँचाई नहीं शनि 29 अक्टूबर का दिन 14 1
सूर्यास्त 19:17 शनि सूर्योदय 06:34 रवि समय, ऊँचाई नहीं शनि 29 अक्टूबर का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · शनिवार का दिन धुँधला

शनि 29 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 19:17 शनि से सूर्योदय 06:34 तक थी, 11 घं 17 मि। इसे 45 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

रवि 30 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:31–13:22

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:31–13:22।

रवि 30 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 17:36–18:27

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 17:36–18:27।

सूर्योदय 06:34 सूर्यास्त 19:18 सूर्योदय 06:34 सोम समय, ऊँचाई नहीं 8 14 1
सूर्योदय 06:34 सूर्यास्त 19:18 सूर्योदय 06:34 सोम समय, ऊँचाई नहीं 8 1
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 14

यहाँ दिन, 06:34 से 19:18, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 50 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 17:36–18:27।

रवि 30 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

06:34–08:10 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।

सूर्योदय 06:34 सूर्यास्त 19:18 सूर्योदय 06:34 सोम समय, ऊँचाई नहीं उद्वेग
सूर्योदय 06:34 सूर्यास्त 19:18 सूर्योदय 06:34 सोम समय, ऊँचाई नहीं उद्वेग
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 06:34 से 19:18, 1 घं 35 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 19:18 से 06:34 सोम, 1 घं 24 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

रवि 30 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 17:42–19:18

राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 17:42–19:18।

रवि 30 अक्टूबर को यमगंड कब है? 12:56–14:32

यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:56–14:32।

रवि 30 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 16:07–17:42

गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 16:07–17:42।

सूर्योदय 06:34 सूर्यास्त 19:18 सूर्योदय 06:34 सोम समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 06:34 सूर्यास्त 19:18 सूर्योदय 06:34 सोम समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: यमगण्ड 5, गुलिक काल 7

यहाँ दिन 06:34 से 19:18 तक है, 12 घं 44 मि। इसे 1 घं 35 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।

सूर्योदय और सूर्यास्त

रवि 30 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:34

यहाँ दिन: सूर्योदय 06:34, सूर्यास्त 19:18, 12 घं 44 मि का दिन।

रवि 30 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:18

यहाँ दिन: सूर्योदय 06:34, सूर्यास्त 19:18, 12 घं 44 मि का दिन।

सूर्योदय 06:34 सूर्यास्त 19:18 सूर्योदय 06:34 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:21 चंद्रोदय 05:28 सोम
सूर्योदय 06:34 सूर्यास्त 19:18 सूर्योदय 06:34 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:21 चंद्रोदय 05:28 सोम
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 44 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 44 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

रवि 30 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? हस्त

सूर्योदय पर चंद्रमा 161.4° पर था: हस्त, पद 1।

चंद्रमा सूर्य 0° हस्त चंद्रमा 161.4° अगला: चित्रा पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° हस्त चंद्रमा 161.4° अगला: चित्रा पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। हस्त 160°00′–173°20′ तक है; चंद्रमा 160° पर उसके पद 1 में आया। वह 05:33 सोम को निकलेगा, चित्रा में।

रवि 30 अक्टूबर को कौन सा योग है? वैधृति

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 354.5° थे: वैधृति।

सूर्य 193.1° + चंद्रमा 161.4° = 354.5° वैधृति 346°40′–360°00′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 193.1° + चंद्रमा 161.4° = 354.5° वैधृति 346°40′–360°00′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 193.1° + 161.4° = 354.5°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 346°40′–360°00′ सत्ताईसवाँ है, वैधृति। यह 16:29 को समाप्त होता है, फिर विष्कम्भ।

रवि 30 अक्टूबर को कौन सा करण है? गर

सूर्योदय पर बढ़त 328.3° थी: त्रयोदशी का पहला आधा, गर।

सूर्य अमावस्या 0° 328.3° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल त्रयोदशी 324°–336° गर 324°–330° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 328.3° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल त्रयोदशी 324°–336° गर 324°–330° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए त्रयोदशी का पहला आधा गर है और दूसरा वणिज। गर 10:11 तक है, जब बढ़त 330° होगी; वणिज 22:44 तक।

रवि 30 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? रविवार

यह दिन रविवार को सूर्योदय, 06:34, पर शुरू हुआ: रविवार।

रविवार सूर्योदय 06:34 सूर्यास्त 19:18 सूर्योदय 06:34 सोम समय, ऊँचाई नहीं 00:00 सोम अब भी रविवार
रविवार सूर्योदय 06:34 सूर्यास्त 19:18 सूर्योदय 06:34 सोम समय, ऊँचाई नहीं 00:00 सोम अब भी रविवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:34 से 06:34 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।

रवि 30 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन

यह मास 3 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।

1 2 3 4 5 कन्या तुला 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
1 2 3 4 5 कन्या तुला 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ

अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 1 नवंबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।

रवि 30 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।

अमान्त पूर्णिमान्त कार्तिक आश्विन कृष्ण शुक्ल रवि 30 अक्टूबर अमावस्या 3 अक्टू॰ पूर्णिमा 17 अक्टू॰ अमावस्या 1 नव॰ पूर्णिमा 15 नव॰
अमान्त पूर्णिमान्त कार्तिक आश्विन कृष्ण शुक्ल रवि 30 अक्टूबर अमावस्या 3 अक्टू॰ पूर्णिमा 17 अक्टू॰ अमावस्या 1 नव॰ पूर्णिमा 15 नव॰
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 1 नवंबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।

रवि 30 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2062 · शक 1927

विक्रम संवत 2062 8 अप्रैल 2005 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 8 अप्रैल 2005 17:32 · सूर्य मीन में सूर्योदय, रवि 30 अक्टूबर सूर्य 193.1° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 8 अप्रैल 2005 17:32 · सूर्य मीन में सूर्योदय, रवि 30 अक्टूबर सूर्य 193.1° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 8 अप्रैल 2005, 17:32 शुक्र। तब से सूर्य तारों के बीच 197.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2062 गिनता है; शक संवत 1927।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

रवि 30 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 05:28 सोम

चंद्रमा यहाँ 05:28 सोम पर उदय होता है।

रवि 30 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:21

सूर्योदय 06:34 सूर्यास्त 19:18 सूर्योदय 06:34 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:21 चंद्रोदय 05:28 सोम
सूर्योदय 06:34 सूर्यास्त 19:18 सूर्योदय 06:34 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:21 चंद्रोदय 05:28 सोम
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:21 पर अस्त हुआ; वह फिर 05:28 सोम पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:21 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 05:28 सोम पर उदय होगा।