Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग शुक्र 30 अक्टूबर 1992
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−2 में
त्योहार
छठ · संध्या अर्घ्य
छठ · संध्या अर्घ्य शुक्र 30 अक्टूबर को है: उस शाम सूर्यास्त पर षष्ठी है। शुक्र 30 अक्टूबर क्यों?
छठ: Ipameri में हर तारीख़30 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 30 अक्टूबर
- 05:04–05:49ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:34 से
-
07:05–08:10अमृत कालगुलिक काल छोड़कर · मूल में
- 08:10–09:45लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 09:58–11:21अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:56–13:22अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 12:56–13:22शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 14:12–14:32शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- सूर्यास्त 19:18 के बाद
- 22:07–23:31लाभ चौघड़िया
- 00:56–02:20 शनिशुभ चौघड़िया
- 02:20–03:45 शनिअमृत चौघड़िया
- 05:04–05:49 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:34–08:10चरसामान्य
- 08:10–09:45लाभगुलिक काल में
- 09:45–11:21अमृतशुभ
- 11:21–12:56कालअशुभ
- 12:56–14:32शुभ
- 14:32–16:07रोगअशुभ
- 16:07–17:42उद्वेगअशुभ
- 17:42–19:18चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 19:18–20:42रोगअशुभ
- 20:42–22:07कालअशुभ
- 22:07–23:31लाभशुभ
- 23:31–00:56 शनिउद्वेगअशुभ
- 00:56–02:20 शनिशुभ
- 02:20–03:45 शनिअमृतशुभ
- 03:45–05:09 शनिचरसामान्य
- 05:09–06:34 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 30 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 05:04–05:49, शुभ
- चर, सामान्य, 06:34–08:10
- लाभ, शुभ, 08:10–09:45
- अमृत, शुभ, 09:45–11:21
- काल, अशुभ, 11:21–12:56
- शुभ, 12:56–14:32
- रोग, अशुभ, 14:32–16:07
- उद्वेग, अशुभ, 16:07–17:42
- चर, सामान्य, 17:42–19:18
- रोग, अशुभ, 19:18–20:42
- काल, अशुभ, 20:42–22:07
- लाभ, शुभ, 22:07–23:31
- उद्वेग, अशुभ, 23:31–00:56 शनि
- शुभ, 00:56–02:20 शनि
- अमृत, शुभ, 02:20–03:45 शनि
- चर, सामान्य, 03:45–05:09 शनि
- रोग, अशुभ, 05:09–06:34 शनि
- गुलिक काल, 08:10–09:45, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:07–09:58, अशुभ
- राहु काल, 11:21–12:56, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 12:31–13:22, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 13:22–14:12, अशुभ
- यमगण्ड, 16:07–17:42, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 05:04–05:49 शनि
हर मान कैसे निकलता है
Ipameri में छठ शुक्र 30 अक्टूबर को क्यों है?
छठ · संध्या अर्घ्य शुक्र 30 अक्टूबर को है: उस शाम सूर्यास्त पर षष्ठी है।
संध्या अर्घ्य सूर्यास्त पर दिया जाता है। षष्ठी शुक्र 30 अक्टूबर को 14:37 से शनि 31 अक्टूबर को 16:02 तक है, इसलिए सूर्यास्त पर वह केवल शुक्र 30 अक्टूबर को है, 19:18 पर। छठ · संध्या अर्घ्य का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्यास्त Tithika की परिपाटी है।
शुक्र 30 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल पञ्चमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 56.1° आगे था: शुक्ल पञ्चमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 48°–60° पाँचवीं है, शुक्ल पञ्चमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:34। चतुर्थी उससे पहले 13:56 गुरु पर समाप्त हुई। पञ्चमी 14:37 को समाप्त होगी, जब बढ़त 60° होगी। बढ़त 25 अक्टूबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
शुक्र 30 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 05:04–05:49
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 05:04–05:49।
गुरु 29 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 19:18 गुरु से सूर्योदय 06:34 तक थी, 11 घं 16 मि। इसे 45 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 30 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 12:31–13:22
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 12:31–13:22।
शुक्र 30 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 09:07–09:58
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:07–09:58 और 13:22–14:12।
शुक्र 30 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 13:22–14:12
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 09:07–09:58 और 13:22–14:12।
यहाँ दिन, 06:34 से 19:18, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 50 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 09:07–09:58 और 13:22–14:12।
शुक्र 30 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:34–08:10 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:34 से 19:18, 1 घं 35 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:18 से 06:34 शनि, 1 घं 24 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 30 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 11:21–12:56
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 11:21–12:56।
शुक्र 30 अक्टूबर को यमगंड कब है? 16:07–17:42
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 16:07–17:42।
शुक्र 30 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 08:10–09:45
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 08:10–09:45।
यहाँ दिन 06:34 से 19:18 तक है, 12 घं 44 मि। इसे 1 घं 35 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 30 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:34
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:34, सूर्यास्त 19:18, 12 घं 44 मि का दिन।
शुक्र 30 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:18
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:34, सूर्यास्त 19:18, 12 घं 44 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 44 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 44 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 16 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 30 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? मूल
सूर्योदय पर चंद्रमा 249.5° पर था: मूल, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। मूल 240°00′–253°20′ तक है; चंद्रमा 246°40′ पर उसके पद 3 में आया। वह 13:49 को निकलेगा, पूर्वाषाढा में।
शुक्र 30 अक्टूबर को कौन सा योग है? सुकर्मा
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 442.9° थे, एक चक्कर और 82.9°: सुकर्मा।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 193.4° + 249.5° = 442.9°, एक पूरा चक्कर और 82.9°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 80°00′–93°20′ सातवाँ है, सुकर्मा। यह 01:02 शनि को समाप्त होता है, फिर धृति।
शुक्र 30 अक्टूबर को कौन सा करण है? बालव
सूर्योदय पर बढ़त 56.1° थी: पञ्चमी का दूसरा आधा, बालव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पञ्चमी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 02:11 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 54° हुई; बालव 14:37 तक है।
शुक्र 30 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 06:34, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:34 से 06:34 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 30 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? कार्तिक
यह मास 25 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य तुला में था: कार्तिक।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: तुला से कार्तिक। सूर्य 15 नवंबर को, मास के भीतर, वृश्चिक में जाता है। अगली अमावस्या, 24 नवंबर, उसे वृश्चिक में पाती है और मार्गशीर्ष शुरू करती है।
शुक्र 30 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 25 अक्टूबर की अमावस्या ने, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में कार्तिक है।
शुक्र 30 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2049 · शक 1914
विक्रम संवत 2049 3 अप्रैल 1992 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 1992, 02:01 शुक्र। तब से सूर्य तारों के बीच 203.5° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2049 गिनता है; शक संवत 1914।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 30 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 10:30
चंद्रमा यहाँ 10:30 पर उदय होता है।
शुक्र 30 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 23:55
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 10:30 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 23:55 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 10:30 पर उदय हुआ; वह फिर 23:55 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।