Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग शुक्र 10 मई 1991
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
व्रत
परमा एकादशी
परमा एकादशी शुक्र 10 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है। शुक्र 10 मई क्यों?
परमा एकादशी: Ipameri में हर तारीख़10 मई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 10 मई
- 04:47–05:38ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:28 से
- 07:53–09:18लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 09:30–10:43अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:09–12:31अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 12:09–12:31शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 13:17–13:34शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- सूर्यास्त 17:49 के बाद
- 20:59–22:34लाभ चौघड़िया
-
22:09–23:43अमृत कालउत्तर भाद्रपद में
- 00:09–01:44 शनिशुभ चौघड़िया
- 01:44–03:19 शनिअमृत चौघड़िया
- 04:47–05:38 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:28–07:53चरसामान्य
- 07:53–09:18लाभगुलिक काल में
- 09:18–10:43अमृतशुभ
- 10:43–12:09कालअशुभ
- 12:09–13:34शुभ
- 13:34–14:59रोगअशुभ
- 14:59–16:24उद्वेगअशुभ
- 16:24–17:49चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 17:49–19:24रोगअशुभ
- 19:24–20:59कालअशुभ
- 20:59–22:34लाभशुभ
- 22:34–00:09 शनिउद्वेगअशुभ
- 00:09–01:44 शनिशुभ
- 01:44–03:19 शनिअमृतशुभ
- 03:19–04:54 शनिचरसामान्य
- 04:54–06:28 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 10 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:47–05:38, शुभ
- चर, सामान्य, 06:28–07:53
- लाभ, शुभ, 07:53–09:18
- अमृत, शुभ, 09:18–10:43
- काल, अशुभ, 10:43–12:09
- शुभ, 12:09–13:34
- रोग, अशुभ, 13:34–14:59
- उद्वेग, अशुभ, 14:59–16:24
- चर, सामान्य, 16:24–17:49
- रोग, अशुभ, 17:49–19:24
- काल, अशुभ, 19:24–20:59
- लाभ, शुभ, 20:59–22:34
- उद्वेग, अशुभ, 22:34–00:09 शनि
- शुभ, 00:09–01:44 शनि
- अमृत, शुभ, 01:44–03:19 शनि
- चर, सामान्य, 03:19–04:54 शनि
- रोग, अशुभ, 04:54–06:28 शनि
- गुलिक काल, 07:53–09:18, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 08:44–09:30, अशुभ
- राहु काल, 10:43–12:09, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:46–12:31, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 12:31–13:17, अशुभ
- यमगण्ड, 14:59–16:24, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:47–05:38 शनि
हर मान कैसे निकलता है
Ipameri में परमा एकादशी शुक्र 10 मई को क्यों है?
परमा एकादशी शुक्र 10 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 10 मई को सूर्योदय पर है, 06:28: शुक्र 10 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 11:45 गुरु पर, उससे (04:52–06:28) पहले, समाप्त हुई।
शुक्र 10 मई को कौन सी तिथि है? कृष्ण एकादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 309.6° आगे था: कृष्ण एकादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 300°–312° छब्बीसवीं है, कृष्ण एकादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:28। दशमी उससे पहले 11:45 गुरु पर समाप्त हुई। एकादशी 11:06 को समाप्त होगी, जब बढ़त 312° होगी। बढ़त 28 अप्रैल की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
शुक्र 10 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:47–05:38
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:47–05:38।
गुरु 9 मई की रात सूर्यास्त 17:49 गुरु से सूर्योदय 06:28 तक थी, 12 घं 39 मि। इसे 50 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 10 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:46–12:31
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:46–12:31।
शुक्र 10 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 08:44–09:30
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 08:44–09:30 और 12:31–13:17।
शुक्र 10 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 12:31–13:17
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 08:44–09:30 और 12:31–13:17।
यहाँ दिन, 06:28 से 17:49, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 45 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 08:44–09:30 और 12:31–13:17।
शुक्र 10 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:28–07:53 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:28 से 17:49, 1 घं 25 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:49 से 06:28 शनि, 1 घं 34 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 10 मई को राहुकाल कब है? 10:43–12:09
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:43–12:09।
शुक्र 10 मई को यमगंड कब है? 14:59–16:24
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 14:59–16:24।
शुक्र 10 मई को गुलिक काल कब है? 07:53–09:18
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 07:53–09:18।
यहाँ दिन 06:28 से 17:49 तक है, 11 घं 21 मि। इसे 1 घं 25 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 10 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 06:28
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:28, सूर्यास्त 17:49, 11 घं 21 मि का दिन।
शुक्र 10 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:49
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:28, सूर्यास्त 17:49, 11 घं 21 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 21 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 39 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 21 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 39 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 10 मई को कौन सा नक्षत्र है? उत्तर भाद्रपद
सूर्योदय पर चंद्रमा 335.1° पर था: उत्तर भाद्रपद, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तर भाद्रपद 333°20′–346°40′ तक है; चंद्रमा 333°20′ पर उसके पद 1 में आया। वह 02:51 शनि को निकलेगा, रेवती में।
शुक्र 10 मई को कौन सा योग है? विष्कम्भ
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 360.6° थे, एक चक्कर और 0.6°: विष्कम्भ।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 25.5° + 335.1° = 360.6°, एक पूरा चक्कर और 0.6°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 0°00′–13°20′ पहला है, विष्कम्भ। यह 03:25 शनि को समाप्त होता है, फिर प्रीति।
शुक्र 10 मई को कौन सा करण है? बालव
सूर्योदय पर बढ़त 309.6° थी: एकादशी का दूसरा आधा, बालव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए एकादशी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 23:32 गुरु पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 306° हुई; बालव 11:06 तक है।
शुक्र 10 मई को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 06:28, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:28 से 06:28 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 10 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख (अधिक)
14 अप्रैल और 14 मई की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक वैशाख।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 14 अप्रैल 16:37 रवि से 14 मई 01:35 मंगल तक सूर्य मेष में रहा; वृषभ में वह अमावस्या के बाद 14 मई 22:25 मंगल को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक वैशाख है, जो वैशाख से पहले आता है।
शुक्र 10 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष वैशाख (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 14 मई की अमावस्या, सूर्य मेष में, वैशाख (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ वैशाख (अधिक) है, और अमान्त गणना में वैशाख (अधिक)।
शुक्र 10 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 2048 · शक 1913
विक्रम संवत 2048 16 मार्च 1991 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 16 मार्च 1991, 05:10 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 54° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2048 गिनता है; शक संवत 1913।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 10 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 03:42 शनि
चंद्रमा यहाँ 03:42 शनि पर उदय होता है।
शुक्र 10 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 14:58
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:58 पर अस्त हुआ; वह फिर 03:42 शनि पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:58 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 03:42 शनि पर उदय होगा।