Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग गुरु 23 दिसंबर 1976
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
23 दिसंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 23 दिसंबर
- 04:09–04:53ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:36 से
- 05:36–07:15शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:45–12:38अभिजीत मुहूर्त
- 12:12–13:51लाभ चौघड़िया
- 13:51–15:29अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 17:08–18:47शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:47 के बाद
- 18:47–20:09अमृत चौघड़िया
-
20:57–22:30अमृत कालश्रवण में
- 00:12–01:33 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 02:54–04:15 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:15–05:36 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:10–04:53 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:36–07:15शुभयमगण्ड में
- 07:15–08:54रोगअशुभ
- 08:54–10:33उद्वेगअशुभ
- 10:33–12:12चरसामान्य
- 12:12–13:51लाभशुभ
- 13:51–15:29अमृतराहु काल में
- 15:29–17:08कालअशुभ
- 17:08–18:47शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:47–20:09अमृतशुभ
- 20:09–21:30चरसामान्य
- 21:30–22:51रोगअशुभ
- 22:51–00:12 शुक्रकालअशुभ
- 00:12–01:33 शुक्रलाभशुभ
- 01:33–02:54 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 02:54–04:15 शुक्रशुभ
- 04:15–05:36 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 23 दिसंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:09–04:53, शुभ
- शुभ, 05:36–07:15
- रोग, अशुभ, 07:15–08:54
- उद्वेग, अशुभ, 08:54–10:33
- चर, सामान्य, 10:33–12:12
- लाभ, शुभ, 12:12–13:51
- अमृत, शुभ, 13:51–15:29
- काल, अशुभ, 15:29–17:08
- शुभ, 17:08–18:47
- अमृत, शुभ, 18:47–20:09
- चर, सामान्य, 20:09–21:30
- रोग, अशुभ, 21:30–22:51
- काल, अशुभ, 22:51–00:12 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:12–01:33 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:33–02:54 शुक्र
- शुभ, 02:54–04:15 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:15–05:36 शुक्र
- यमगण्ड, 05:36–07:15, अशुभ
- गुलिक काल, 08:54–10:33, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:00–10:52, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:45–12:38, शुभ
- राहु काल, 13:51–15:29, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:16–16:09, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:10–04:53 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
गुरु 23 दिसंबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल तृतीया
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 30.6° आगे था: शुक्ल तृतीया।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 24°–36° तीसरी है, शुक्ल तृतीया। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:36। द्वितीया उससे पहले 17:36 बुध पर समाप्त हुई। तृतीया 15:38 को समाप्त होगी, जब बढ़त 36° होगी। बढ़त 20 दिसंबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
गुरु 23 दिसंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:09–04:53
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:09–04:53।
बुध 22 दिसंबर की रात सूर्यास्त 18:47 बुध से सूर्योदय 05:36 तक थी, 10 घं 49 मि। इसे 43 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 23 दिसंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:45–12:38
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:45–12:38।
गुरु 23 दिसंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 10:00–10:52
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:00–10:52 और 15:16–16:09।
गुरु 23 दिसंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 15:16–16:09
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:00–10:52 और 15:16–16:09।
यहाँ दिन, 05:36 से 18:47, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 52 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:00–10:52 और 15:16–16:09।
गुरु 23 दिसंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:36–07:15 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:36 से 18:47, 1 घं 38 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:47 से 05:36 शुक्र, 1 घं 21 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 23 दिसंबर को राहुकाल कब है? 13:51–15:29
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:51–15:29।
गुरु 23 दिसंबर को यमगंड कब है? 05:36–07:15
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:36–07:15।
गुरु 23 दिसंबर को गुलिक काल कब है? 08:54–10:33
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 08:54–10:33।
यहाँ दिन 05:36 से 18:47 तक है, 13 घं 11 मि। इसे 1 घं 38 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 23 दिसंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 05:36
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:36, सूर्यास्त 18:47, 13 घं 11 मि का दिन।
गुरु 23 दिसंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:47
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:36, सूर्यास्त 18:47, 13 घं 11 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 11 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 49 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 11 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 49 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 23 दिसंबर को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराषाढा
सूर्योदय पर चंद्रमा 278.7° पर था: उत्तराषाढा, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराषाढा 266°40′–280°00′ तक है; चंद्रमा 276°40′ पर उसके पद 4 में आया। वह 07:49 को निकलेगा, श्रवण में।
गुरु 23 दिसंबर को कौन सा योग है? व्याघात
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 526.8° थे, एक चक्कर और 166.8°: व्याघात।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 248.1° + 278.7° = 526.8°, एक पूरा चक्कर और 166.8°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 160°00′–173°20′ तेरहवाँ है, व्याघात। यह 16:02 को समाप्त होता है, फिर हर्षण।
गुरु 23 दिसंबर को कौन सा करण है? गर
सूर्योदय पर बढ़त 30.6° थी: तृतीया का दूसरा आधा, गर।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए तृतीया का पहला आधा तैतिल है और दूसरा गर। तैतिल 04:32 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 30° हुई; गर 15:38 तक है।
गुरु 23 दिसंबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 05:36, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:36 से 05:36 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 23 दिसंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? पौष
यह मास 20 दिसंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य धनु में था: पौष।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: धनु से पौष। सूर्य 13 जनवरी को, मास के भीतर, मकर में जाता है। अगली अमावस्या, 19 जनवरी, उसे मकर में पाती है और माघ शुरू करती है।
गुरु 23 दिसंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? पौष
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष पौष का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 20 दिसंबर की अमावस्या ने, सूर्य धनु में, पौष शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में पौष है।
गुरु 23 दिसंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2033 · शक 1898
विक्रम संवत 2033 30 मार्च 1976 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 30 मार्च 1976, 14:07 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 261.5° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2033 गिनता है; शक संवत 1898।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 23 दिसंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 08:05
चंद्रमा यहाँ 08:05 पर उदय होता है।
गुरु 23 दिसंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 21:07
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 08:05 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 21:07 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 08:05 पर उदय हुआ; वह फिर 21:07 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।