Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग शनि 3 अप्रैल 1954
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
1970 से पहले के समय UTC−3:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
त्योहार
चैत्र नवरात्रि · घटस्थापना
चैत्र नवरात्रि · घटस्थापना शनि 3 अप्रैल को है: प्रतिपदा किसी भी सुबह प्रातःकाल को नहीं छूती, और पहला दिन लिया जाता है। शनि 3 अप्रैल क्यों?
चैत्र नवरात्रि: Ipameri में हर तारीख़त्योहार
नव संवत्सर
नव संवत्सर शनि 3 अप्रैल को है: उस दिन विक्रम संवत् 2011 आरंभ होता है। शनि 3 अप्रैल क्यों?
नव संवत्सर: Ipameri में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या शनि 3 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। शनि 3 अप्रैल क्यों?
अमावस्या: Ipameri में हर तारीख़3 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 3 अप्रैल
- 04:42–05:30ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:19 से
- 07:54–09:17शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 11:52–12:39अभिजीत मुहूर्त
- 13:45–15:14लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 15:14–16:43अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:12 के बाद
- 18:12–19:43लाभ चौघड़िया
- 21:14–22:45शुभ चौघड़िया
- 22:45–00:16 रविअमृत चौघड़िया
-
22:59–00:23 रविअमृत कालरेवती में
- 04:48–06:19 रविलाभ चौघड़िया
- 04:42–05:31 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:19–07:48कालअशुभ
- 07:48–09:17शुभ
- 09:17–10:46रोगअशुभ
- 10:46–12:16उद्वेगअशुभ
- 12:16–13:45चरसामान्य
- 13:45–15:14लाभयमगण्ड में
- 15:14–16:43अमृतशुभ
- 16:43–18:12कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:12–19:43लाभशुभ
- 19:43–21:14उद्वेगअशुभ
- 21:14–22:45शुभ
- 22:45–00:16 रविअमृतशुभ
- 00:16–01:47 रविचरसामान्य
- 01:47–03:17 रविरोगअशुभ
- 03:17–04:48 रविकालअशुभ
- 04:48–06:19 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 3 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 04:42–05:30, शुभ
- काल, अशुभ, 06:19–07:48
- शुभ, 07:48–09:17
- रोग, अशुभ, 09:17–10:46
- उद्वेग, अशुभ, 10:46–12:16
- चर, सामान्य, 12:16–13:45
- लाभ, शुभ, 13:45–15:14
- अमृत, शुभ, 15:14–16:43
- काल, अशुभ, 16:43–18:12
- लाभ, शुभ, 18:12–19:43
- उद्वेग, अशुभ, 19:43–21:14
- शुभ, 21:14–22:45
- अमृत, शुभ, 22:45–00:16 रवि
- चर, सामान्य, 00:16–01:47 रवि
- रोग, अशुभ, 01:47–03:17 रवि
- काल, अशुभ, 03:17–04:48 रवि
- लाभ, शुभ, 04:48–06:19 रवि
- गुलिक काल, 06:19–07:48, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:19–07:06, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:06–07:54, अशुभ
- राहु काल, 09:17–10:46, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:52–12:39, शुभ
- यमगण्ड, 13:45–15:14, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:42–05:31 रवि
हर मान कैसे निकलता है
Ipameri में चैत्र नवरात्रि शनि 3 अप्रैल को क्यों है?
चैत्र नवरात्रि · घटस्थापना शनि 3 अप्रैल को है: प्रतिपदा किसी भी सुबह प्रातःकाल को नहीं छूती, और पहला दिन लिया जाता है।
घटस्थापना प्रातःकाल में होती है, दिन का पहला पाँचवाँ भाग। प्रतिपदा शनि 3 अप्रैल को 09:24 से रवि 4 अप्रैल को 05:29 तक है, दोनों सुबह के प्रातःकाल के बीच, किसी को नहीं छूती। तब निर्णयसिंधु पहला दिन लेता है: शनि 3 अप्रैल। चैत्र नवरात्रि · घटस्थापना का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रातःकाल Tithika की परिपाटी है।
Ipameri में नव संवत्सर शनि 3 अप्रैल को क्यों है?
नव संवत्सर शनि 3 अप्रैल को है: उस दिन विक्रम संवत् 2011 आरंभ होता है।
विक्रम संवत् 2011 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होता है। यहाँ प्रतिपदा किसी सूर्योदय पर नहीं है, इसलिए वर्ष उसी दिन आरंभ होता है जिस दिन वह चलती है: शनि 3 अप्रैल।
Ipameri में अमावस्या शनि 3 अप्रैल को क्यों है?
अमावस्या शनि 3 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या शुक्र 2 अप्रैल को 13:16 से शनि 3 अप्रैल को 09:24 तक है, इसलिए वह केवल शनि 3 अप्रैल के सूर्योदय (06:19) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
शनि 3 अप्रैल को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 358.2° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:19। चतुर्दशी उससे पहले 13:16 शुक्र पर समाप्त हुई। अमावस्या 09:24 को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 19 मार्च की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
प्रतिपदा क्षय क्यों है?
प्रतिपदा एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन प्रतिपदा नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। प्रतिपदा 09:24 को शुरू हुई और 05:29 रवि को समाप्त, 06:19 और 06:19 रवि के सूर्योदयों के बीच। शनिवार को अमावस्या है और रविवार को द्वितीया: प्रतिपदा यहाँ क्षय तिथि है।
शनि 3 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:42–05:30
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:42–05:30।
शुक्र 2 अप्रैल की रात सूर्यास्त 18:13 शुक्र से सूर्योदय 06:19 तक थी, 12 घं 6 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 3 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:52–12:39
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:52–12:39।
शनि 3 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 06:19–07:06
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:19–07:06 और 07:06–07:54।
शनि 3 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 07:06–07:54
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 06:19–07:06 और 07:06–07:54।
यहाँ दिन, 06:19 से 18:12, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 06:19–07:06 और 07:06–07:54।
शनि 3 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:19–07:48 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:19 से 18:12, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:12 से 06:19 रवि, 1 घं 30 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 3 अप्रैल को राहुकाल कब है? 09:17–10:46
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:17–10:46।
शनि 3 अप्रैल को यमगंड कब है? 13:45–15:14
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:45–15:14।
शनि 3 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 06:19–07:48
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:19–07:48।
यहाँ दिन 06:19 से 18:12 तक है, 11 घं 53 मि। इसे 1 घं 29 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 3 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 06:19
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:19, सूर्यास्त 18:12, 11 घं 53 मि का दिन।
शनि 3 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:12
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:19, सूर्यास्त 18:12, 11 घं 53 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 53 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 7 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 53 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 7 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 3 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? रेवती
सूर्योदय पर चंद्रमा 348° पर था: रेवती, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। रेवती 346°40′–360°00′ तक है; चंद्रमा 346°40′ पर उसके पद 1 में आया। वह 01:04 रवि को निकलेगा, अश्विनी में।
शनि 3 अप्रैल को कौन सा योग है? इन्द्र
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 697.9° थे, एक चक्कर और 337.9°: इन्द्र।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 349.9° + 348° = 697.9°, एक पूरा चक्कर और 337.9°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 333°20′–346°40′ छब्बीसवाँ है, इन्द्र। यह 19:15 को समाप्त होता है, फिर वैधृति।
शनि 3 अप्रैल को कौन सा करण है? नाग
सूर्योदय पर बढ़त 358.2° थी: अमावस्या का दूसरा आधा, नाग।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 23:21 शुक्र पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 354° हुई; नाग 09:24 तक है।
शनि 3 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 06:19, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:19 से 06:19 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 3 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन
यह मास 5 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 14 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 3 अप्रैल, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।
शनि 3 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष चैत्र का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 3 अप्रैल की अमावस्या, सूर्य मीन में, चैत्र शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ चैत्र है, और अमान्त गणना में फाल्गुन।
शनि 3 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2011 · शक 1876
विक्रम संवत 2011 3 अप्रैल 1954 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 1954, 09:24। तब से सूर्य तारों के बीच -0.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2011 गिनता है; शक संवत 1876।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 3 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 18:11
चंद्रमा यहाँ 18:11 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 18:11 पर, दिन में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।