Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग गुरु 23 जनवरी 1936
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
1970 से पहले के समय UTC−3:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
त्योहार
मौनी अमावस्या
मौनी अमावस्या गुरु 23 जनवरी को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। गुरु 23 जनवरी क्यों?
मौनी अमावस्या: Ipameri में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या गुरु 23 जनवरी को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। गुरु 23 जनवरी क्यों?
अमावस्या: Ipameri में हर तारीख़23 जनवरी का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 23 जनवरी
- 04:26–05:10ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:54 से
- 05:54–07:32शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:58–12:50अभिजीत मुहूर्त
- 12:24–14:01लाभ चौघड़िया
- 14:01–15:39अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 17:16–18:54शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:54 के बाद
- 18:54–20:17अमृत चौघड़िया
-
22:00–23:30अमृत कालउत्तराषाढा में
- 00:24–01:47 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:09–04:32 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:32–05:55 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:27–05:11 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:54–07:32शुभयमगण्ड में
- 07:32–09:09रोगअशुभ
- 09:09–10:47उद्वेगअशुभ
- 10:47–12:24चरसामान्य
- 12:24–14:01लाभशुभ
- 14:01–15:39अमृतराहु काल में
- 15:39–17:16कालअशुभ
- 17:16–18:54शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:54–20:17अमृतशुभ
- 20:17–21:39चरसामान्य
- 21:39–23:02रोगअशुभ
- 23:02–00:24 शुक्रकालअशुभ
- 00:24–01:47 शुक्रलाभशुभ
- 01:47–03:09 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:09–04:32 शुक्रशुभ
- 04:32–05:55 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 23 जनवरी: ब्रह्म मुहूर्त, 04:26–05:10, शुभ
- शुभ, 05:54–07:32
- रोग, अशुभ, 07:32–09:09
- उद्वेग, अशुभ, 09:09–10:47
- चर, सामान्य, 10:47–12:24
- लाभ, शुभ, 12:24–14:01
- अमृत, शुभ, 14:01–15:39
- काल, अशुभ, 15:39–17:16
- शुभ, 17:16–18:54
- अमृत, शुभ, 18:54–20:17
- चर, सामान्य, 20:17–21:39
- रोग, अशुभ, 21:39–23:02
- काल, अशुभ, 23:02–00:24 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:24–01:47 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:47–03:09 शुक्र
- शुभ, 03:09–04:32 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:32–05:55 शुक्र
- यमगण्ड, 05:54–07:32, अशुभ
- गुलिक काल, 09:09–10:47, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:14–11:06, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:58–12:50, शुभ
- राहु काल, 14:01–15:39, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:26–16:18, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:27–05:11 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Ipameri में मौनी अमावस्या गुरु 23 जनवरी को क्यों है?
मौनी अमावस्या गुरु 23 जनवरी को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।
मौनी अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या गुरु 23 जनवरी को 06:28 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और शुक्र 24 जनवरी को 04:18 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 23 जनवरी। मौनी अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
Ipameri में अमावस्या गुरु 23 जनवरी को क्यों है?
अमावस्या गुरु 23 जनवरी को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या गुरु 23 जनवरी को 06:28 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और शुक्र 24 जनवरी को 04:18 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 23 जनवरी। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 23 जनवरी को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्दशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 347.7° आगे था: कृष्ण चतुर्दशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 336°–348° उनतीसवीं है, कृष्ण चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:54। त्रयोदशी उससे पहले 08:07 बुध पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 06:28 को समाप्त होगी, जब बढ़त 348° होगी। बढ़त 8 जनवरी की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
अमावस्या क्षय क्यों है?
अमावस्या एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन अमावस्या नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। अमावस्या 06:28 को शुरू हुई और 04:18 शुक्र को समाप्त, 05:54 और 05:55 शुक्र के सूर्योदयों के बीच। गुरुवार को चतुर्दशी है और शुक्रवार को प्रतिपदा: अमावस्या यहाँ क्षय तिथि है।
गुरु 23 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:26–05:10
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:26–05:10।
बुध 22 जनवरी की रात सूर्यास्त 18:54 बुध से सूर्योदय 05:54 तक थी, 11 घं 0 मि। इसे 44 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 23 जनवरी को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:58–12:50
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:58–12:50।
गुरु 23 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 10:14–11:06
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:14–11:06 और 15:26–16:18।
गुरु 23 जनवरी को दुर्मुहूर्त कब है? 15:26–16:18
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:14–11:06 और 15:26–16:18।
यहाँ दिन, 05:54 से 18:54, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 52 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:14–11:06 और 15:26–16:18।
गुरु 23 जनवरी का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:54–07:32 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:54 से 18:54, 1 घं 37 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:54 से 05:55 शुक्र, 1 घं 22 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 23 जनवरी को राहुकाल कब है? 14:01–15:39
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:01–15:39।
गुरु 23 जनवरी को यमगंड कब है? 05:54–07:32
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:54–07:32।
गुरु 23 जनवरी को गुलिक काल कब है? 09:09–10:47
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:09–10:47।
यहाँ दिन 05:54 से 18:54 तक है, 13 घं 0 मि। इसे 1 घं 37 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 23 जनवरी को सूर्योदय कितने बजे है? 05:54
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:54, सूर्यास्त 18:54, 13 घं 0 मि का दिन।
गुरु 23 जनवरी को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:54
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:54, सूर्यास्त 18:54, 13 घं 0 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 0 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 1 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 0 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 1 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराषाढा
सूर्योदय पर चंद्रमा 266.9° पर था: उत्तराषाढा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराषाढा 266°40′–280°00′ तक है; चंद्रमा 266°40′ पर उसके पद 1 में आया। वह 04:00 शुक्र को निकलेगा, श्रवण में।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा योग है? हर्षण
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 546.1° थे, एक चक्कर और 186.1°: हर्षण।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 279.2° + 266.9° = 546.1°, एक पूरा चक्कर और 186.1°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 173°20′–186°40′ चौदहवाँ है, हर्षण। यह 06:45 को समाप्त होता है, फिर वज्र।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा करण है? शकुनि
सूर्योदय पर बढ़त 347.7° थी: चतुर्दशी का दूसरा आधा, शकुनि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा विष्टि है और दूसरा शकुनि। विष्टि 19:22 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 342° हुई; शकुनि 06:28 तक है।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 05:54, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:54 से 05:55 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? पौष
यह मास 25 दिसंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य धनु में था: पौष।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: धनु से पौष। सूर्य 14 जनवरी को, मास के भीतर, मकर में जाता है। अगली अमावस्या, 24 जनवरी, उसे मकर में पाती है और माघ शुरू करती है।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? माघ
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष माघ का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 24 जनवरी की अमावस्या, सूर्य मकर में, माघ शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ माघ है, और अमान्त गणना में पौष।
गुरु 23 जनवरी को कौन सा संवत है? विक्रम 1992 · शक 1857
विक्रम संवत 1992 3 अप्रैल 1935 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 1935, 09:10 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 289.3° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1992 गिनता है; शक संवत 1857।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 23 जनवरी को चंद्रास्त कितने बजे है? 18:25
चंद्रमा यहाँ 18:25 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 18:25 पर, दिन में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।