tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग रवि 4 दिसंबर 1927

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में

1970 से पहले के समय UTC−3:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।

दशमी

शुक्ल पक्ष · 06:02 तक

फिर एकादशी · 03:12 सोम तक

यहाँ कोई दिन एकादशी नहीं कारण जानें

त्योहार

गीता जयंती

गीता जयंती रवि 4 दिसंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। रवि 4 दिसंबर क्यों?

गीता जयंती: Ipameri में हर तारीख़

व्रत

मोक्षदा एकादशी

पारण समय
08:25⁠–⁠18:37 सोम
सोम 5 दिसंबर
व्रत आरंभ
05:29

स्मार्त परंपरा में मोक्षदा एकादशी रवि 4 दिसंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव सोम 5 दिसंबर को व्रत रखते हैं। रवि 4 दिसंबर क्यों?

मोक्षदा एकादशी: Ipameri में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

04:02 05:29 18:36अगला सूर्योदय 05:29 सोम

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 05:29–07:07उद्वेगअशुभ
  • 07:07–08:45चरसामान्य
  • 08:45–10:24लाभशुभ
  • 10:24–12:02अमृतशुभ
  • 12:02–13:41कालअशुभ
  • 13:41–15:19शुभ
  • 15:19–16:58रोगअशुभ
  • 16:58–18:36उद्वेगअशुभ

रात का चौघड़िया

  • 18:36–19:58शुभ
  • 19:58–21:19अमृतशुभ
  • 21:19–22:41चरसामान्य
  • 22:41–00:02 सोमरोगअशुभ
  • 00:02–01:24 सोमकालअशुभ
  • 01:24–02:46 सोमलाभशुभ
  • 02:46–04:07 सोमउद्वेगअशुभ
  • 04:07–05:29 सोमशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, रवि 4 दिसंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:02–04:45, शुभ
  • उद्वेग, अशुभ, 05:29–07:07
  • चर, सामान्य, 07:07–08:45
  • लाभ, शुभ, 08:45–10:24
  • अमृत, शुभ, 10:24–12:02
  • काल, अशुभ, 12:02–13:41
  • शुभ, 13:41–15:19
  • रोग, अशुभ, 15:19–16:58
  • उद्वेग, अशुभ, 16:58–18:36
  • शुभ, 18:36–19:58
  • अमृत, शुभ, 19:58–21:19
  • चर, सामान्य, 21:19–22:41
  • रोग, अशुभ, 22:41–00:02 सोम
  • काल, अशुभ, 00:02–01:24 सोम
  • लाभ, शुभ, 01:24–02:46 सोम
  • उद्वेग, अशुभ, 02:46–04:07 सोम
  • शुभ, 04:07–05:29 सोम
  • अभिजीत मुहूर्त, 11:36–12:29, शुभ
  • यमगण्ड, 12:02–13:41, अशुभ
  • गुलिक काल, 15:19–16:58, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 16:51–17:44, अशुभ
  • राहु काल, 16:58–18:36, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:02–04:45 सोम

हर मान कैसे निकलता है

Ipameri में गीता जयंती रवि 4 दिसंबर को क्यों है?

गीता जयंती रवि 4 दिसंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।

दशमी एकादशी 06:02 03:00 04:00 05:00 07:00 रवि 4 दिसंबर स्मार्त · वैष्णव सूर्योदय 05:29
दशमी एकादशी 06:02 03:00 04:00 05:00 07:00 रवि 4 दिसंबर स्मार्त · वैष्णव सूर्योदय 05:29
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। रेखा: सूर्योदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

गीता जयंती सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। एकादशी रवि 4 दिसंबर को 06:02 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और सोम 5 दिसंबर को 03:12 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: रवि 4 दिसंबर। गीता जयंती का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।

गीता जयंती: Ipameri में हर तारीख़

Ipameri में मोक्षदा एकादशी रवि 4 दिसंबर को क्यों है?

स्मार्त परंपरा में मोक्षदा एकादशी रवि 4 दिसंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव सोम 5 दिसंबर को व्रत रखते हैं।

दशमी एकादशी 05:29 06:02 02:00 03:00 04:00 05:00 07:00 रवि 4 दिसंबर स्मार्त अरुणोदय 03:53–05:29
दशमी 05:29 06:02 02:00 04:00 रवि 4 दिसंबर स्मार्त अरुणोदय 03:53–05:29 एकादशी 06:02 से
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह रवि 4 दिसंबर को 06:02 पर, उस सूर्योदय (05:29) के बाद, लगती है और सोम 5 दिसंबर को 03:12 पर, अगले सूर्योदय (05:29 सोम) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: रवि 4 दिसंबर।

मोक्षदा एकादशी: Ipameri में हर तारीख़

रवि 4 दिसंबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल दशमी

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 119.7° आगे था: शुक्ल दशमी।

सूर्य अमावस्या 0° 119.7° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण दशमी 108°–120° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 119.7° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण दशमी 108°–120° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 108°–120° दसवीं है, शुक्ल दशमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:29। नवमी उससे पहले 08:29 शनि पर समाप्त हुई। दशमी 06:02 को समाप्त होगी, जब बढ़त 120° होगी। बढ़त 24 नवंबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।

एकादशी क्षय क्यों है?

एकादशी एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन एकादशी नहीं होता।

दशमी एकादशी एकादशी द्वादशी रवि 4 दिसंबर सुबह सोम 5 दिसंबर सुबह Ipameri UTC−3 06:02 03:12 05:29 दशमी 05:29 द्वादशी एकादशी इस सूर्योदय के बाद शुरू और इससे पहले समाप्त
दशमी एकादशी एकादशी द्वादशी रवि 4 दिसंबर सुबह सोम 5 दिसंबर सुबह Ipameri UTC−3 06:02 03:12 05:29 दशमी 05:29 द्वादशी एकादशी इस सूर्योदय के बाद शुरू और इससे पहले समाप्त
समय नीचे की ओर · धारीदार रेखा: तिथि बदली

दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। एकादशी 06:02 को शुरू हुई और 03:12 सोम को समाप्त, 05:29 और 05:29 सोम के सूर्योदयों के बीच। रविवार को दशमी है और सोमवार को द्वादशी: एकादशी यहाँ क्षय तिथि है।

रवि 4 दिसंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:02–04:45

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:02–04:45।

सूर्यास्त 18:36 शनि सूर्योदय 05:29 रवि समय, ऊँचाई नहीं शनि 3 दिसंबर का दिन 14 1
सूर्यास्त 18:36 शनि सूर्योदय 05:29 रवि समय, ऊँचाई नहीं शनि 3 दिसंबर का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · शनिवार का दिन धुँधला

शनि 3 दिसंबर की रात सूर्यास्त 18:36 शनि से सूर्योदय 05:29 तक थी, 10 घं 53 मि। इसे 43 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

रवि 4 दिसंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:36–12:29

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:36–12:29।

रवि 4 दिसंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 16:51–17:44

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 16:51–17:44।

सूर्योदय 05:29 सूर्यास्त 18:36 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं 8 14 1
सूर्योदय 05:29 सूर्यास्त 18:36 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं 8 1
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 14

यहाँ दिन, 05:29 से 18:36, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 52 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 16:51–17:44।

रवि 4 दिसंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

05:29–07:07 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।

सूर्योदय 05:29 सूर्यास्त 18:36 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं उद्वेग
सूर्योदय 05:29 सूर्यास्त 18:36 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं उद्वेग
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 05:29 से 18:36, 1 घं 38 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 18:36 से 05:29 सोम, 1 घं 21 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

रवि 4 दिसंबर को राहुकाल कब है? 16:58–18:36

राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 16:58–18:36।

रवि 4 दिसंबर को यमगंड कब है? 12:02–13:41

यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:02–13:41।

रवि 4 दिसंबर को गुलिक काल कब है? 15:19–16:58

गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:19–16:58।

सूर्योदय 05:29 सूर्यास्त 18:36 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 05:29 सूर्यास्त 18:36 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: यमगण्ड 5, गुलिक काल 7

यहाँ दिन 05:29 से 18:36 तक है, 13 घं 7 मि। इसे 1 घं 38 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।

सूर्योदय और सूर्यास्त

रवि 4 दिसंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 05:29

यहाँ दिन: सूर्योदय 05:29, सूर्यास्त 18:36, 13 घं 7 मि का दिन।

रवि 4 दिसंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:36

यहाँ दिन: सूर्योदय 05:29, सूर्यास्त 18:36, 13 घं 7 मि का दिन।

सूर्योदय 05:29 सूर्यास्त 18:36 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 02:48 सोम चंद्रोदय 14:33
सूर्योदय 05:29 सूर्यास्त 18:36 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 02:48 सोम चंद्रोदय 14:33
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 7 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 53 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 7 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 53 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

रवि 4 दिसंबर को कौन सा नक्षत्र है? रेवती

सूर्योदय पर चंद्रमा 348° पर था: रेवती, पद 1।

चंद्रमा सूर्य 0° रेवती चंद्रमा 348.0° अगला: अश्विनी पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° रेवती चंद्रमा 348.0° अगला: अश्विनी पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। रेवती 346°40′–360°00′ तक है; चंद्रमा 346°40′ पर उसके पद 1 में आया। वह 01:08 सोम को निकलेगा, अश्विनी में।

रवि 4 दिसंबर को कौन सा योग है? व्यतीपात

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 576.4° थे, एक चक्कर और 216.4°: व्यतीपात।

सूर्य 228.4° + चंद्रमा 348.0° = 576.4° एक चक्कर + 216.4° व्यतीपात 213°20′–226°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 228.4° + चंद्रमा 348.0° = 576.4° एक चक्कर + 216.4° व्यतीपात 213°20′–226°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 228.4° + 348° = 576.4°, एक पूरा चक्कर और 216.4°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 213°20′–226°40′ सत्रहवाँ है, व्यतीपात। यह 21:17 को समाप्त होता है, फिर वरीयान्।

रवि 4 दिसंबर को कौन सा करण है? गर

सूर्योदय पर बढ़त 119.7° थी: दशमी का दूसरा आधा, गर।

सूर्य अमावस्या 0° 119.7° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण दशमी 108°–120° गर 114°–120° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 119.7° चंद्रमा की बढ़त शुक्ल कृष्ण दशमी 108°–120° गर 114°–120° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए दशमी का पहला आधा तैतिल है और दूसरा गर। तैतिल 19:18 शनि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 114° हुई; गर 06:02 तक है।

रवि 4 दिसंबर को कौन सा वार है, और कब से? रविवार

यह दिन रविवार को सूर्योदय, 05:29, पर शुरू हुआ: रविवार।

रविवार सूर्योदय 05:29 सूर्यास्त 18:36 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं 00:00 सोम अब भी रविवार
रविवार सूर्योदय 05:29 सूर्यास्त 18:36 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं 00:00 सोम अब भी रविवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:29 से 05:29 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।

रवि 4 दिसंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? मार्गशीर्ष

यह मास 24 नवंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य वृश्चिक में था: मार्गशीर्ष।

1 2 3 4 5 6 7 वृश्चिक 10 11 12 0° पृथ्वी धनु
1 2 3 4 5 6 7 वृश्चिक 10 11 12 0° पृथ्वी धनु
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ

अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: वृश्चिक से मार्गशीर्ष। सूर्य 15 दिसंबर को, मास के भीतर, धनु में जाता है। अगली अमावस्या, 24 दिसंबर, उसे धनु में पाती है और पौष शुरू करती है।

रवि 4 दिसंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? मार्गशीर्ष

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष मार्गशीर्ष का है।

अमान्त मार्गशीर्ष पूर्णिमान्त मार्गशीर्ष कृष्ण शुक्ल रवि 4 दिसंबर पूर्णिमा 9 नव॰ अमावस्या 24 नव॰ पूर्णिमा 8 दिस॰ अमावस्या 24 दिस॰
अमान्त मार्गशीर्ष पूर्णिमान्त मार्गशीर्ष कृष्ण शुक्ल रवि 4 दिसंबर पूर्णिमा 9 नव॰ अमावस्या 24 नव॰ पूर्णिमा 8 दिस॰ अमावस्या 24 दिस॰
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 24 नवंबर की अमावस्या ने, सूर्य वृश्चिक में, मार्गशीर्ष शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में मार्गशीर्ष है।

रवि 4 दिसंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 1984 · शक 1849

विक्रम संवत 1984 2 अप्रैल 1927 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 2 अप्रैल 1927 01:24 · सूर्य मीन में सूर्योदय, रवि 4 दिसंबर सूर्य 228.4° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 2 अप्रैल 1927 01:24 · सूर्य मीन में सूर्योदय, रवि 4 दिसंबर सूर्य 228.4° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 2 अप्रैल 1927, 01:24 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 239.8° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1984 गिनता है; शक संवत 1849।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

रवि 4 दिसंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 14:33

चंद्रमा यहाँ 14:33 पर उदय होता है।

रवि 4 दिसंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 02:48 सोम

सूर्योदय 05:29 सूर्यास्त 18:36 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 02:48 सोम चंद्रोदय 14:33
सूर्योदय 05:29 सूर्यास्त 18:36 सूर्योदय 05:29 सोम समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 02:48 सोम चंद्रोदय 14:33
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा

चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 14:33 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 02:48 सोम पर अस्त होगा।

चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 14:33 पर उदय हुआ; वह फिर 02:48 सोम पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।