Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग मंगल 1 मई 1923
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
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1 मई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, मंगल 1 मई
- 04:45–05:35ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:25 से
- 10:43–12:09लाभ चौघड़िया
- 11:46–12:09अभिजीत मुहूर्तगुलिक काल छोड़कर
- 12:09–13:35अमृत चौघड़ियागुलिक काल में
-
13:35–14:27अमृत कालगुलिक काल छोड़कर · विशाखा में
- 15:01–16:27शुभ चौघड़ियाराहु काल में
- सूर्यास्त 17:53 के बाद
- 19:27–21:01लाभ चौघड़िया
- 22:35–22:54शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 23:44–00:09 बुधशुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 00:09–01:43 बुधअमृत चौघड़िया
- 04:45–05:35 बुधअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:25–07:51रोगअशुभ
- 07:51–09:17उद्वेगअशुभ
- 09:17–10:43चरसामान्य
- 10:43–12:09लाभशुभ
- 12:09–13:35अमृतगुलिक काल में
- 13:35–15:01कालअशुभ
- 15:01–16:27शुभराहु काल में
- 16:27–17:53रोगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 17:53–19:27कालअशुभ
- 19:27–21:01लाभशुभ
- 21:01–22:35उद्वेगअशुभ
- 22:35–00:09 बुधशुभ
- 00:09–01:43 बुधअमृतशुभ
- 01:43–03:17 बुधचरसामान्य
- 03:17–04:51 बुधरोगअशुभ
- 04:51–06:25 बुधकालअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, मंगल 1 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:45–05:35, शुभ
- रोग, अशुभ, 06:25–07:51
- उद्वेग, अशुभ, 07:51–09:17
- चर, सामान्य, 09:17–10:43
- लाभ, शुभ, 10:43–12:09
- अमृत, शुभ, 12:09–13:35
- काल, अशुभ, 13:35–15:01
- शुभ, 15:01–16:27
- रोग, अशुभ, 16:27–17:53
- काल, अशुभ, 17:53–19:27
- लाभ, शुभ, 19:27–21:01
- उद्वेग, अशुभ, 21:01–22:35
- शुभ, 22:35–00:09 बुध
- अमृत, शुभ, 00:09–01:43 बुध
- चर, सामान्य, 01:43–03:17 बुध
- रोग, अशुभ, 03:17–04:51 बुध
- काल, अशुभ, 04:51–06:25 बुध
- दुर्मुहूर्त, 08:43–09:29, अशुभ
- यमगण्ड, 09:17–10:43, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:46–12:32, शुभ
- गुलिक काल, 12:09–13:35, अशुभ
- राहु काल, 15:01–16:27, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 22:54–23:44, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:45–05:35 बुध
हर मान कैसे निकलता है
मंगल 1 मई को कौन सी तिथि है? कृष्ण प्रतिपदा
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 187.1° आगे था: कृष्ण प्रतिपदा।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 180°–192° सोलहवीं है, कृष्ण प्रतिपदा। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:25। पूर्णिमा उससे पहले 18:30 सोम पर समाप्त हुई। प्रतिपदा 14:45 को समाप्त होगी, जब बढ़त 192° होगी। बढ़त 30 अप्रैल की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
मंगल 1 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:45–05:35
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:45–05:35।
सोम 30 अप्रैल की रात सूर्यास्त 17:54 सोम से सूर्योदय 06:25 तक थी, 12 घं 31 मि। इसे 50 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
मंगल 1 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:46–12:32
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:46–12:32।
मंगल 1 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 08:43–09:29
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 08:43–09:29, और रात के 15 में से सातवाँ, 22:54–23:44।
मंगल 1 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 22:54–23:44
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा है, 08:43–09:29, और रात के 15 में से सातवाँ, 22:54–23:44।
यहाँ दिन, 06:25 से 17:53, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 45 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। मंगलवार को दुर्मुहूर्त चौथा और रात का सातवाँ है, 08:43–09:29 और 22:54–23:44।
मंगल 1 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:25–07:51 रोग है, जिसके स्वामी मंगल हैं, मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:25 से 17:53, 1 घं 26 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:53 से 06:25 बुध, 1 घं 34 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
मंगल 1 मई को राहुकाल कब है? 15:01–16:27
राहु काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:01–16:27।
मंगल 1 मई को यमगंड कब है? 09:17–10:43
यमगण्ड मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:17–10:43।
मंगल 1 मई को गुलिक काल कब है? 12:09–13:35
गुलिक काल मंगलवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:09–13:35।
यहाँ दिन 06:25 से 17:53 तक है, 11 घं 28 मि। इसे 1 घं 26 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: मंगलवार को राहु काल सातवाँ भाग है, यमगण्ड तीसरा और गुलिक काल पाँचवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
मंगल 1 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 06:25
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:25, सूर्यास्त 17:53, 11 घं 28 मि का दिन।
मंगल 1 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:53
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:25, सूर्यास्त 17:53, 11 घं 28 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 28 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 32 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 28 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 32 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
मंगल 1 मई को कौन सा नक्षत्र है? विशाखा
सूर्योदय पर चंद्रमा 204.3° पर था: विशाखा, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। विशाखा 200°00′–213°20′ तक है; चंद्रमा 203°20′ पर उसके पद 2 में आया। वह 20:47 को निकलेगा, अनुराधा में।
मंगल 1 मई को कौन सा योग है? व्यतीपात
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 221.5° थे: व्यतीपात।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 17.2° + 204.3° = 221.5°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 213°20′–226°40′ सत्रहवाँ है, व्यतीपात। यह 14:08 को समाप्त होता है, फिर वरीयान्।
मंगल 1 मई को कौन सा करण है? कौलव
सूर्योदय पर बढ़त 187.1° थी: प्रतिपदा का दूसरा आधा, कौलव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए प्रतिपदा का पहला आधा बालव है और दूसरा कौलव। बालव 04:36 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 186° हुई; कौलव 14:45 तक है।
मंगल 1 मई को कौन सा वार है, और कब से? मंगलवार
यह दिन मंगलवार को सूर्योदय, 06:25, पर शुरू हुआ: मंगलवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:25 से 06:25 बुध तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी मंगलवार के हैं।
मंगल 1 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख
यह मास 16 अप्रैल की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 14 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 15 मई, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।
मंगल 1 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? ज्येष्ठ
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष ज्येष्ठ का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 15 मई की अमावस्या, सूर्य वृषभ में, ज्येष्ठ शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ ज्येष्ठ है, और अमान्त गणना में वैशाख।
मंगल 1 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 1980 · शक 1845
विक्रम संवत 1980 17 मार्च 1923 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 17 मार्च 1923, 09:51 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 44.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1980 गिनता है; शक संवत 1845।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
मंगल 1 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 18:54
चंद्रमा यहाँ 18:54 पर उदय होता है।
मंगल 1 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 07:00
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 07:00 पर अस्त हुआ; वह फिर 18:54 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 07:00 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 18:54 पर उदय होगा।