Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल का पंचांग गुरु 13 मई 1915
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
1970 से पहले के समय UTC−3:00 पर हैं, जो इस तारीख़ के लिए टाइम ज़ोन डेटाबेस का ऑफ़सेट है; इतने पुराने उसके रिकॉर्ड अनिश्चित हैं। आकाश से निकाला गया पंचांग इससे नहीं बदलता।
व्रत
अमावस्या
अमावस्या गुरु 13 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। गुरु 13 मई क्यों?
अमावस्या: Ipameri में हर तारीख़13 मई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 13 मई
- 04:47–05:38ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:29 से
- 06:29–07:54शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:46–12:31अभिजीत मुहूर्त
- 12:08–13:33लाभ चौघड़िया
-
13:13–13:33अमृत कालराहु काल, दुर्मुहूर्त छोड़कर · भरणी में
- 13:33–14:58अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:23–17:48शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:48 के बाद
- 17:48–19:23अमृत चौघड़िया
- 00:09–01:44 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:19–04:54 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:54–06:29 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:48–05:38 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:29–07:54शुभयमगण्ड में
- 07:54–09:19रोगअशुभ
- 09:19–10:44उद्वेगअशुभ
- 10:44–12:08चरसामान्य
- 12:08–13:33लाभशुभ
- 13:33–14:58अमृतराहु काल में
- 14:58–16:23कालअशुभ
- 16:23–17:48शुभ
रात का चौघड़िया
- 17:48–19:23अमृतशुभ
- 19:23–20:58चरसामान्य
- 20:58–22:33रोगअशुभ
- 22:33–00:09 शुक्रकालअशुभ
- 00:09–01:44 शुक्रलाभशुभ
- 01:44–03:19 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:19–04:54 शुक्रशुभ
- 04:54–06:29 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 13 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 04:47–05:38, शुभ
- शुभ, 06:29–07:54
- रोग, अशुभ, 07:54–09:19
- उद्वेग, अशुभ, 09:19–10:44
- चर, सामान्य, 10:44–12:08
- लाभ, शुभ, 12:08–13:33
- अमृत, शुभ, 13:33–14:58
- काल, अशुभ, 14:58–16:23
- शुभ, 16:23–17:48
- अमृत, शुभ, 17:48–19:23
- चर, सामान्य, 19:23–20:58
- रोग, अशुभ, 20:58–22:33
- काल, अशुभ, 22:33–00:09 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:09–01:44 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:44–03:19 शुक्र
- शुभ, 03:19–04:54 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:54–06:29 शुक्र
- यमगण्ड, 06:29–07:54, अशुभ
- गुलिक काल, 09:19–10:44, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:15–11:01, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:46–12:31, शुभ
- राहु काल, 13:33–14:58, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:47–15:32, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:48–05:38 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Ipameri में अमावस्या गुरु 13 मई को क्यों है?
अमावस्या गुरु 13 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या बुध 12 मई को 22:10 से शुक्र 14 मई को 00:30 तक है, इसलिए वह केवल गुरु 13 मई के सूर्योदय (06:29) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 13 मई को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 351.8° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:29। चतुर्दशी उससे पहले 22:10 बुध पर समाप्त हुई। अमावस्या 00:30 शुक्र को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 29 अप्रैल की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
नई दिल्ली में चतुर्दशी क्यों है?
नई दिल्ली में चतुर्दशी है, Ipameri में अमावस्या।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो।
नई दिल्ली · IST
यहाँ सूर्योदय, 05:32, चतुर्दशी की समाप्ति 06:40 से पहले हुआ: यह दिन चतुर्दशी है।
Ipameri · UTC−3
यहाँ सूर्योदय, 06:29, चतुर्दशी की समाप्ति 22:10 बुध के बाद हुआ: यह दिन अमावस्या है।
गुरु 13 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:47–05:38
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:47–05:38।
बुध 12 मई की रात सूर्यास्त 17:48 बुध से सूर्योदय 06:29 तक थी, 12 घं 41 मि। इसे 50 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 13 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:46–12:31
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:46–12:31।
गुरु 13 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 10:15–11:01
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:15–11:01 और 14:47–15:32।
गुरु 13 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 14:47–15:32
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:15–11:01 और 14:47–15:32।
यहाँ दिन, 06:29 से 17:48, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 45 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:15–11:01 और 14:47–15:32।
गुरु 13 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:29–07:54 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:29 से 17:48, 1 घं 24 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:48 से 06:29 शुक्र, 1 घं 35 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 13 मई को राहुकाल कब है? 13:33–14:58
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:33–14:58।
गुरु 13 मई को यमगंड कब है? 06:29–07:54
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:29–07:54।
गुरु 13 मई को गुलिक काल कब है? 09:19–10:44
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:19–10:44।
यहाँ दिन 06:29 से 17:48 तक है, 11 घं 19 मि। इसे 1 घं 24 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 13 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 06:29
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:29, सूर्यास्त 17:48, 11 घं 19 मि का दिन।
गुरु 13 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:48
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:29, सूर्यास्त 17:48, 11 घं 19 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 19 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 41 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 19 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 41 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 13 मई को कौन सा नक्षत्र है? भरणी
सूर्योदय पर चंद्रमा 20.7° पर था: भरणी, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। भरणी 13°20′–26°40′ तक है; चंद्रमा 20° पर उसके पद 3 में आया। वह 18:36 को निकलेगा, कृत्तिका में।
गुरु 13 मई को कौन सा योग है? सौभाग्य
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 49.6° थे: सौभाग्य।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 28.9° + 20.7° = 49.6°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 40°00′–53°20′ चौथा है, सौभाग्य। यह 13:35 को समाप्त होता है, फिर शोभन।
गुरु 13 मई को कौन सा करण है? चतुष्पाद
सूर्योदय पर बढ़त 351.8° थी: अमावस्या का पहला आधा, चतुष्पाद।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 11:19 तक है, जब बढ़त 354° होगी; नाग 00:30 शुक्र तक।
गुरु 13 मई को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:29, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:29 से 06:29 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 13 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख (अधिक)
14 अप्रैल और 14 मई की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक वैशाख।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 14 अप्रैल 08:35 बुध से 14 मई 00:30 शुक्र तक सूर्य मेष में रहा; वृषभ में वह अमावस्या के बाद 14 मई 10:42 शुक्र को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक वैशाख है, जो वैशाख से पहले आता है।
गुरु 13 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष वैशाख (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 14 मई की अमावस्या, सूर्य मेष में, वैशाख (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ वैशाख (अधिक) है, और अमान्त गणना में वैशाख (अधिक)।
गुरु 13 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 1972 · शक 1837
विक्रम संवत 1972 15 मार्च 1915 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 15 मार्च 1915, 16:41 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 57.4° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 1972 गिनता है; शक संवत 1837।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 13 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:19
चंद्रमा यहाँ 17:19 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 17:19 पर, दिन में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।