दिफ्फा, नाइजर का पंचांग रवि 23 अक्टूबर 2033
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय WAT में
कृष्ण पक्ष · 08:28 तक
फिर प्रतिपदा · 10:58 सोम तक
अमावस्या यहाँ दो सूर्योदयों तक है कारण जानें23 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 23 अक्टूबर
- 04:23–05:12ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:01 से
- 08:57–10:25लाभ चौघड़िया
- 10:25–11:53अमृत चौघड़िया
- 11:30–11:53अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 13:21–14:49शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:46 के बाद
- 17:46–19:18शुभ चौघड़िया
- 19:18–20:50अमृत चौघड़िया
- 01:25–02:57 सोमलाभ चौघड़िया
-
03:09–04:57 सोमअमृत कालस्वाती में
- 04:29–06:01 सोमशुभ चौघड़िया
- 04:23–05:12 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:01–07:29उद्वेगअशुभ
- 07:29–08:57चरसामान्य
- 08:57–10:25लाभशुभ
- 10:25–11:53अमृतशुभ
- 11:53–13:21कालअशुभ
- 13:21–14:49शुभ
- 14:49–16:18रोगअशुभ
- 16:18–17:46उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 17:46–19:18शुभ
- 19:18–20:50अमृतशुभ
- 20:50–22:21चरसामान्य
- 22:21–23:53रोगअशुभ
- 23:53–01:25 सोमकालअशुभ
- 01:25–02:57 सोमलाभशुभ
- 02:57–04:29 सोमउद्वेगअशुभ
- 04:29–06:01 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 23 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:23–05:12, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 06:01–07:29
- चर, सामान्य, 07:29–08:57
- लाभ, शुभ, 08:57–10:25
- अमृत, शुभ, 10:25–11:53
- काल, अशुभ, 11:53–13:21
- शुभ, 13:21–14:49
- रोग, अशुभ, 14:49–16:18
- उद्वेग, अशुभ, 16:18–17:46
- शुभ, 17:46–19:18
- अमृत, शुभ, 19:18–20:50
- चर, सामान्य, 20:50–22:21
- रोग, अशुभ, 22:21–23:53
- काल, अशुभ, 23:53–01:25 सोम
- लाभ, शुभ, 01:25–02:57 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 02:57–04:29 सोम
- शुभ, 04:29–06:01 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 11:30–12:17, शुभ
- यमगण्ड, 11:53–13:21, अशुभ
- गुलिक काल, 14:49–16:18, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 16:12–16:59, अशुभ
- राहु काल, 16:18–17:46, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:23–05:12 सोम
हर मान कैसे निकलता है
रवि 23 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 358.9° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:01। चतुर्दशी उससे पहले 05:48 शनि पर समाप्त हुई। अमावस्या 08:28 को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 8 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
अमावस्या दो सूर्योदयों पर क्यों है?
अमावस्या यहाँ शनि 22 और रवि 23 अक्टूबर दोनों के सूर्योदय पर है।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। अमावस्या 05:48 शनि को, सूर्योदय 06:01 शनि से पहले, शुरू हुई और 08:28 को, अगले सूर्योदय 06:01 के बाद, समाप्त होगी। दोनों दिन अमावस्या है: यह यहाँ वृद्धि तिथि है।
रवि 23 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:23–05:12
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:23–05:12।
शनि 22 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 17:46 शनि से सूर्योदय 06:01 तक थी, 12 घं 15 मि। इसे 49 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 23 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:30–12:17
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:30–12:17।
रवि 23 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 16:12–16:59
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 16:12–16:59।
यहाँ दिन, 06:01 से 17:46, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 16:12–16:59।
रवि 23 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:01–07:29 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:01 से 17:46, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:46 से 06:01 सोम, 1 घं 31 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 23 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 16:18–17:46
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 16:18–17:46।
रवि 23 अक्टूबर को यमगंड कब है? 11:53–13:21
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 11:53–13:21।
रवि 23 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 14:49–16:18
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 14:49–16:18।
यहाँ दिन 06:01 से 17:46 तक है, 11 घं 45 मि। इसे 1 घं 28 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 23 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:01
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:01, सूर्यास्त 17:46, 11 घं 45 मि का दिन।
रवि 23 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:46
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:01, सूर्यास्त 17:46, 11 घं 45 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 45 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 15 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 45 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 15 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? चित्रा
सूर्योदय पर चंद्रमा 184.7° पर था: चित्रा, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। चित्रा 173°20′–186°40′ तक है; चंद्रमा 183°20′ पर उसके पद 4 में आया। वह 10:04 को निकलेगा, स्वाती में।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा योग है? विष्कम्भ
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 370.5° थे, एक चक्कर और 10.5°: विष्कम्भ।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 185.8° + 184.7° = 370.5°, एक पूरा चक्कर और 10.5°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 0°00′–13°20′ पहला है, विष्कम्भ। यह 11:25 को समाप्त होता है, फिर प्रीति।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा करण है? नाग
सूर्योदय पर बढ़त 358.9° थी: अमावस्या का दूसरा आधा, नाग।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 19:09 शनि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 354° हुई; नाग 08:28 तक है।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 06:01, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:01 से 06:01 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन
यह मास 23 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 23 अक्टूबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 23 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।
रवि 23 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2090 · शक 1955
विक्रम संवत 2090 30 मार्च 2033 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 30 मार्च 2033, 18:51 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 199.8° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2090 गिनता है; शक संवत 1955।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 23 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 06:01
चंद्रमा यहाँ 06:01 पर उदय होता है।
रवि 23 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 18:02
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 06:01 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 18:02 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 06:01 पर उदय हुआ; वह फिर 18:02 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।