दिफ्फा, नाइजर का पंचांग रवि 4 अगस्त 2030
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय WAT में
त्योहार
नाग पंचमी
नाग पंचमी रवि 4 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर पञ्चमी है। रवि 4 अगस्त क्यों?
नाग पंचमी: दिफ्फा में हर तारीख़4 अगस्त का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 4 अगस्त
- 04:24–05:10ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:55 से
- 09:05–10:40लाभ चौघड़िया
- 10:40–12:15अमृत चौघड़िया
- 11:50–12:15अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 13:50–15:25शुभ चौघड़िया
-
13:50–15:23अमृत कालयमगण्ड छोड़कर · हस्त में
- सूर्यास्त 18:35 के बाद
- 18:35–20:00शुभ चौघड़िया
- 20:00–21:25अमृत चौघड़िया
- 01:40–03:05 सोमलाभ चौघड़िया
- 04:30–05:55 सोमशुभ चौघड़िया
- 04:24–05:10 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:55–07:30उद्वेगअशुभ
- 07:30–09:05चरसामान्य
- 09:05–10:40लाभशुभ
- 10:40–12:15अमृतशुभ
- 12:15–13:50कालअशुभ
- 13:50–15:25शुभ
- 15:25–17:00रोगअशुभ
- 17:00–18:35उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:35–20:00शुभ
- 20:00–21:25अमृतशुभ
- 21:25–22:50चरसामान्य
- 22:50–00:15 सोमरोगअशुभ
- 00:15–01:40 सोमकालअशुभ
- 01:40–03:05 सोमलाभशुभ
- 03:05–04:30 सोमउद्वेगअशुभ
- 04:30–05:55 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 4 अगस्त: ब्रह्म मुहूर्त, 04:24–05:10, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 05:55–07:30
- चर, सामान्य, 07:30–09:05
- लाभ, शुभ, 09:05–10:40
- अमृत, शुभ, 10:40–12:15
- काल, अशुभ, 12:15–13:50
- शुभ, 13:50–15:25
- रोग, अशुभ, 15:25–17:00
- उद्वेग, अशुभ, 17:00–18:35
- शुभ, 18:35–20:00
- अमृत, शुभ, 20:00–21:25
- चर, सामान्य, 21:25–22:50
- रोग, अशुभ, 22:50–00:15 सोम
- काल, अशुभ, 00:15–01:40 सोम
- लाभ, शुभ, 01:40–03:05 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 03:05–04:30 सोम
- शुभ, 04:30–05:55 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 11:50–12:41, शुभ
- यमगण्ड, 12:15–13:50, अशुभ
- गुलिक काल, 15:25–17:00, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 16:54–17:45, अशुभ
- राहु काल, 17:00–18:35, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:24–05:10 सोम
हर मान कैसे निकलता है
दिफ्फा में नाग पंचमी रवि 4 अगस्त को क्यों है?
नाग पंचमी रवि 4 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर पञ्चमी है।
नाग पंचमी सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पञ्चमी शनि 3 अगस्त को 11:08 से रवि 4 अगस्त को 09:56 तक है, इसलिए वह केवल रवि 4 अगस्त के सूर्योदय (05:55) पर है। नाग पंचमी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
रवि 4 अगस्त को कौन सी तिथि है? शुक्ल पञ्चमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 57.9° आगे था: शुक्ल पञ्चमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 48°–60° पाँचवीं है, शुक्ल पञ्चमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:55। चतुर्थी उससे पहले 11:08 शनि पर समाप्त हुई। पञ्चमी 09:56 को समाप्त होगी, जब बढ़त 60° होगी। बढ़त 30 जुलाई की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
रवि 4 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:24–05:10
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:24–05:10।
शनि 3 अगस्त की रात सूर्यास्त 18:36 शनि से सूर्योदय 05:55 तक थी, 11 घं 19 मि। इसे 45 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 4 अगस्त को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:50–12:41
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:50–12:41।
रवि 4 अगस्त को दुर्मुहूर्त कब है? 16:54–17:45
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 16:54–17:45।
यहाँ दिन, 05:55 से 18:35, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 50 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 16:54–17:45।
रवि 4 अगस्त का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:55–07:30 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:55 से 18:35, 1 घं 35 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:35 से 05:55 सोम, 1 घं 25 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 4 अगस्त को राहुकाल कब है? 17:00–18:35
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 17:00–18:35।
रवि 4 अगस्त को यमगंड कब है? 12:15–13:50
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:15–13:50।
रवि 4 अगस्त को गुलिक काल कब है? 15:25–17:00
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:25–17:00।
यहाँ दिन 05:55 से 18:35 तक है, 12 घं 40 मि। इसे 1 घं 35 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 4 अगस्त को सूर्योदय कितने बजे है? 05:55
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:55, सूर्यास्त 18:35, 12 घं 40 मि का दिन।
रवि 4 अगस्त को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:35
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:55, सूर्यास्त 18:35, 12 घं 40 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 40 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 20 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 40 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 20 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 4 अगस्त को कौन सा नक्षत्र है? हस्त
सूर्योदय पर चंद्रमा 165.5° पर था: हस्त, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। हस्त 160°00′–173°20′ तक है; चंद्रमा 163°20′ पर उसके पद 2 में आया। वह 19:41 को निकलेगा, चित्रा में।
रवि 4 अगस्त को कौन सा योग है? सिद्ध
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 273.1° थे: सिद्ध।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 107.6° + 165.5° = 273.1°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 266°40′–280°00′ इक्कीसवाँ है, सिद्ध। यह 17:16 को समाप्त होता है, फिर साध्य।
रवि 4 अगस्त को कौन सा करण है? बालव
सूर्योदय पर बढ़त 57.9° थी: पञ्चमी का दूसरा आधा, बालव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पञ्चमी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 22:35 शनि पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 54° हुई; बालव 09:56 तक है।
रवि 4 अगस्त को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 05:55, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:55 से 05:55 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 4 अगस्त को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? श्रावण
यह मास 30 जुलाई की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कर्क में था: श्रावण।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कर्क से श्रावण। सूर्य 17 अगस्त को, मास के भीतर, सिंह में जाता है। अगली अमावस्या, 29 अगस्त, उसे सिंह में पाती है और भाद्रपद शुरू करती है।
रवि 4 अगस्त को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? श्रावण
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष श्रावण का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 30 जुलाई की अमावस्या ने, सूर्य कर्क में, श्रावण शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में श्रावण है।
रवि 4 अगस्त को कौन सा संवत है? विक्रम 2087 · शक 1952
विक्रम संवत 2087 2 अप्रैल 2030 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 2 अप्रैल 2030, 23:02 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 118.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2087 गिनता है; शक संवत 1952।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 4 अगस्त को चंद्रोदय कितने बजे है? 10:04
चंद्रमा यहाँ 10:04 पर उदय होता है।
रवि 4 अगस्त को चंद्रास्त कितने बजे है? 22:07
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 10:04 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 22:07 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 10:04 पर उदय हुआ; वह फिर 22:07 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।