दिफ्फा, नाइजर का पंचांग बुध 19 सितंबर 2029
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय WAT में
व्रत
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत बुध 19 सितंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं। बुध 19 सितंबर क्यों?
प्रदोष व्रत: दिफ्फा में हर तारीख़व्रत का पारण
पार्श्व एकादशी
19 सितंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, बुध 19 सितंबर
- 04:23–05:11ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:58 से
- 05:58–07:29लाभ चौघड़िया
- 07:29–09:00अमृत चौघड़ियायमगण्ड में
- 10:32–12:03शुभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 16:36–18:07लाभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:07 के बाद
- 19:36–21:05शुभ चौघड़िया
- 21:05–22:34अमृत चौघड़िया
-
21:45–23:27अमृत कालधनिष्ठा में
- 03:00–04:29 गुरुलाभ चौघड़िया
- 04:23–05:11 गुरुअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:58–07:29लाभशुभ
- 07:29–09:00अमृतयमगण्ड में
- 09:00–10:32कालअशुभ
- 10:32–12:03शुभगुलिक काल में
- 12:03–13:34रोगअशुभ
- 13:34–15:05उद्वेगअशुभ
- 15:05–16:36चरसामान्य
- 16:36–18:07लाभशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:07–19:36उद्वेगअशुभ
- 19:36–21:05शुभ
- 21:05–22:34अमृतशुभ
- 22:34–00:03 गुरुचरसामान्य
- 00:03–01:32 गुरुरोगअशुभ
- 01:32–03:00 गुरुकालअशुभ
- 03:00–04:29 गुरुलाभशुभ
- 04:29–05:58 गुरुउद्वेगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, बुध 19 सितंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:23–05:11, शुभ
- लाभ, शुभ, 05:58–07:29
- अमृत, शुभ, 07:29–09:00
- काल, अशुभ, 09:00–10:32
- शुभ, 10:32–12:03
- रोग, अशुभ, 12:03–13:34
- उद्वेग, अशुभ, 13:34–15:05
- चर, सामान्य, 15:05–16:36
- लाभ, शुभ, 16:36–18:07
- उद्वेग, अशुभ, 18:07–19:36
- शुभ, 19:36–21:05
- अमृत, शुभ, 21:05–22:34
- चर, सामान्य, 22:34–00:03 गुरु
- रोग, अशुभ, 00:03–01:32 गुरु
- काल, अशुभ, 01:32–03:00 गुरु
- लाभ, शुभ, 03:00–04:29 गुरु
- उद्वेग, अशुभ, 04:29–05:58 गुरु
- यमगण्ड, 07:29–09:00, अशुभ
- गुलिक काल, 10:32–12:03, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 11:38–12:27, अशुभ
- राहु काल, 12:03–13:34, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:23–05:11 गुरु
हर मान कैसे निकलता है
दिफ्फा में प्रदोष व्रत बुध 19 सितंबर को क्यों है?
प्रदोष व्रत बुध 19 सितंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
प्रदोष की शिव पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी बुध 19 सितंबर को 13:29 से गुरु 20 सितंबर को 14:27 तक है, इसलिए केवल बुधवार का प्रदोष काल (18:07–20:29) उसके भीतर है। प्रदोष व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
बुध 19 सितंबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल द्वादशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 140.4° आगे था: शुक्ल द्वादशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 132°–144° बारहवीं है, शुक्ल द्वादशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:58। एकादशी उससे पहले 12:53 मंगल पर समाप्त हुई। द्वादशी 13:29 को समाप्त होगी, जब बढ़त 144° होगी। बढ़त 8 सितंबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
बुध 19 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:23–05:11
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:23–05:11।
मंगल 18 सितंबर की रात सूर्यास्त 18:08 मंगल से सूर्योदय 05:58 तक थी, 11 घं 50 मि। इसे 47 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
बुध 19 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 11:38–12:27
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है: 11:38–12:27।
यहाँ दिन, 05:58 से 18:07, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 48 मि का। बुधवार को दुर्मुहूर्त आठवाँ है, 11:38–12:27: वह आठवाँ, बीच वाला, मुहूर्त लेता है, इसलिए बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं होता।
बुध 19 सितंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:58–07:29 लाभ है, जिसके स्वामी बुध हैं, बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:58 से 18:07, 1 घं 31 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:07 से 05:58 गुरु, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
बुध 19 सितंबर को राहुकाल कब है? 12:03–13:34
राहु काल बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:03–13:34।
बुध 19 सितंबर को यमगंड कब है? 07:29–09:00
यमगण्ड बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 07:29–09:00।
बुध 19 सितंबर को गुलिक काल कब है? 10:32–12:03
गुलिक काल बुधवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:32–12:03।
यहाँ दिन 05:58 से 18:07 तक है, 12 घं 9 मि। इसे 1 घं 31 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: बुधवार को राहु काल पाँचवाँ भाग है, यमगण्ड दूसरा और गुलिक काल चौथा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
बुध 19 सितंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 05:58
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:58, सूर्यास्त 18:07, 12 घं 9 मि का दिन।
बुध 19 सितंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:07
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:58, सूर्यास्त 18:07, 12 घं 9 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 9 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 51 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 9 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 51 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
बुध 19 सितंबर को कौन सा नक्षत्र है? श्रवण
सूर्योदय पर चंद्रमा 292.6° पर था: श्रवण, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। श्रवण 280°00′–293°20′ तक है; चंद्रमा 290° पर उसके पद 4 में आया। वह 07:18 को निकलेगा, धनिष्ठा में।
बुध 19 सितंबर को कौन सा योग है? सुकर्मा
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 444.9° थे, एक चक्कर और 84.9°: सुकर्मा।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 152.3° + 292.6° = 444.9°, एक पूरा चक्कर और 84.9°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 80°00′–93°20′ सातवाँ है, सुकर्मा। यह 20:52 को समाप्त होता है, फिर धृति।
बुध 19 सितंबर को कौन सा करण है? बालव
सूर्योदय पर बढ़त 140.4° थी: द्वादशी का दूसरा आधा, बालव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वादशी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 01:08 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 138° हुई; बालव 13:29 तक है।
बुध 19 सितंबर को कौन सा वार है, और कब से? बुधवार
यह दिन बुधवार को सूर्योदय, 05:58, पर शुरू हुआ: बुधवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:58 से 05:58 गुरु तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी बुधवार के हैं।
बुध 19 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? भाद्रपद
यह मास 8 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य सिंह में था: भाद्रपद।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: सिंह से भाद्रपद। सूर्य 16 सितंबर को, मास के भीतर, कन्या में जाता है। अगली अमावस्या, 7 अक्टूबर, उसे कन्या में पाती है और आश्विन शुरू करती है।
बुध 19 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? भाद्रपद
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष भाद्रपद का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 8 सितंबर की अमावस्या ने, सूर्य सिंह में, भाद्रपद शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में भाद्रपद है।
बुध 19 सितंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2086 · शक 1951
विक्रम संवत 2086 15 मार्च 2029 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 15 मार्च 2029, 05:19 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 181.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2086 गिनता है; शक संवत 1951।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
बुध 19 सितंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 15:57
चंद्रमा यहाँ 15:57 पर उदय होता है।
बुध 19 सितंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 04:00 गुरु
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 15:57 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 04:00 गुरु पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 15:57 पर उदय हुआ; वह फिर 04:00 गुरु पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।