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दिफ्फा, नाइजर का पंचांग गुरु 31 अक्टूबर 2024

सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय WAT में

चतुर्दशी

कृष्ण पक्ष · 11:23 तक

फिर अमावस्या · 13:47 शुक्र तक

त्योहार

दीवाली · लक्ष्मी पूजा

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
18:36⁠–⁠20:10
प्रदोष काल 17:42⁠–⁠20:10

दीवाली · लक्ष्मी पूजा गुरु 31 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं। गुरु 31 अक्टूबर क्यों?

दीवाली: दिफ्फा में हर तारीख़

त्योहार

नरक चतुर्दशी

अभ्यंग स्नान मुहूर्त
04:27⁠–⁠06:03
अरुणोदय 04:27⁠–⁠06:03

नरक चतुर्दशी गुरु 31 अक्टूबर को है: उस सुबह पूरे अरुणोदय में चतुर्दशी है, और किसी सुबह नहीं। गुरु 31 अक्टूबर क्यों?

नरक चतुर्दशी: दिफ्फा में हर तारीख़

सूर्योदय और सूर्यास्त

04:24 06:03 17:42अगला सूर्योदय 06:03 शुक्र

पंचांग

चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

  • 06:03–07:30शुभयमगण्ड में
  • 07:30–08:58रोगअशुभ
  • 08:58–10:25उद्वेगअशुभ
  • 10:25–11:53चरसामान्य
  • 11:53–13:20लाभशुभ
  • 13:20–14:47अमृतराहु काल में
  • 14:47–16:15कालअशुभ
  • 16:15–17:42शुभ

रात का चौघड़िया

  • 17:42–19:15अमृतशुभ
  • 19:15–20:48चरसामान्य
  • 20:48–22:20रोगअशुभ
  • 22:20–23:53कालअशुभ
  • 23:53–01:25 शुक्रलाभशुभ
  • 01:25–02:58 शुक्रउद्वेगअशुभ
  • 02:58–04:31 शुक्रशुभ
  • 04:31–06:03 शुक्रअमृतशुभ

दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक

समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।

  • सूर्योदय से पहले, गुरु 31 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:24–05:14, शुभ
  • शुभ, 06:03–07:30
  • रोग, अशुभ, 07:30–08:58
  • उद्वेग, अशुभ, 08:58–10:25
  • चर, सामान्य, 10:25–11:53
  • लाभ, शुभ, 11:53–13:20
  • अमृत, शुभ, 13:20–14:47
  • काल, अशुभ, 14:47–16:15
  • शुभ, 16:15–17:42
  • अमृत, शुभ, 17:42–19:15
  • चर, सामान्य, 19:15–20:48
  • रोग, अशुभ, 20:48–22:20
  • काल, अशुभ, 22:20–23:53
  • लाभ, शुभ, 23:53–01:25 शुक्र
  • उद्वेग, अशुभ, 01:25–02:58 शुक्र
  • शुभ, 02:58–04:31 शुक्र
  • अमृत, शुभ, 04:31–06:03 शुक्र
  • यमगण्ड, 06:03–07:30, अशुभ
  • गुलिक काल, 08:58–10:25, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 09:56–10:43, अशुभ
  • अभिजीत मुहूर्त, 11:29–12:16, शुभ
  • राहु काल, 13:20–14:47, अशुभ
  • दुर्मुहूर्त, 14:36–15:22, अशुभ
  • अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:24–05:14 शुक्र

हर मान कैसे निकलता है

दिफ्फा में दीवाली गुरु 31 अक्टूबर को क्यों है?

दीवाली · लक्ष्मी पूजा गुरु 31 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं।

अमावस्या 16:00 18:00 20:00 22:00 गुरु 31 अक्टूबर स्मार्त · वैष्णव प्रदोष काल 17:42–20:10
अमावस्या 16:00 18:00 20:00 22:00 गुरु 31 अक्टूबर स्मार्त · वैष्णव प्रदोष काल 17:42–20:10
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+1)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। अमावस्या गुरु 31 अक्टूबर को 11:23 से शुक्र 1 नवंबर को 13:47 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का प्रदोष काल (17:42–20:10) उसके भीतर है। हर मत यही दिन लेता है।

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 17:42–20:10। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 18:36 से 20:10 तक उदित रहता है।

दीवाली: दिफ्फा में हर तारीख़

दिफ्फा में नरक चतुर्दशी गुरु 31 अक्टूबर को क्यों है?

नरक चतुर्दशी गुरु 31 अक्टूबर को है: उस सुबह पूरे अरुणोदय में चतुर्दशी है, और किसी सुबह नहीं।

त्रयोदशी 06:03 08:46 03:00 05:00 07:00 बुध 30 अक्टूबर अरुणोदय 04:27–06:03 चतुर्दशी 08:46 से
त्रयोदशी 06:03 08:46 03:00 05:00 07:00 बुध 30 अक्टूबर अरुणोदय 04:27–06:03 चतुर्दशी 08:46 से
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+1)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

अभ्यंग स्नान अरुणोदय में होता है, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। चतुर्दशी बुध 30 अक्टूबर को 08:46 से गुरु 31 अक्टूबर को 11:23 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का अरुणोदय (04:27–06:03) उसके भीतर है। नरक चतुर्दशी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; अरुणोदय Tithika की परिपाटी है।

नरक चतुर्दशी: दिफ्फा में हर तारीख़

गुरु 31 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्दशी

सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 345.6° आगे था: कृष्ण चतुर्दशी।

सूर्य अमावस्या 0° 345.6° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल चतुर्दशी 336°–348° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 345.6° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल चतुर्दशी 336°–348° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · पैमाने पर नहीं

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 336°–348° उनतीसवीं है, कृष्ण चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:03। त्रयोदशी उससे पहले 08:46 बुध पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 11:23 को समाप्त होगी, जब बढ़त 348° होगी। बढ़त 17 अक्टूबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।

गुरु 31 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:24–05:14

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:24–05:14।

सूर्यास्त 17:43 बुध सूर्योदय 06:03 गुरु समय, ऊँचाई नहीं बुध 30 अक्टूबर का दिन 14 1
सूर्यास्त 17:43 बुध सूर्योदय 06:03 गुरु समय, ऊँचाई नहीं बुध 30 अक्टूबर का दिन 1
रेखा के नीचे रात, 15 मुहूर्तों में, सूर्यास्त से दक्षिणावर्त · बुधवार का दिन धुँधला

बुध 30 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 17:43 बुध से सूर्योदय 06:03 तक थी, 12 घं 20 मि। इसे 49 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।

दिन के 15 मुहूर्त

गुरु 31 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:29–12:16

अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:29–12:16।

गुरु 31 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 09:56–10:43

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:56–10:43 और 14:36–15:22।

गुरु 31 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:36–15:22

दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:56–10:43 और 14:36–15:22।

सूर्योदय 06:03 सूर्यास्त 17:42 सूर्योदय 06:03 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 8 6 12 1
सूर्योदय 06:03 सूर्यास्त 17:42 सूर्योदय 06:03 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 8 6 1
रेखा के ऊपर दिन, 15 मुहूर्तों में · धारीदार: दुर्मुहूर्त 6, 12

यहाँ दिन, 06:03 से 17:42, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 46 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 09:56–10:43 और 14:36–15:22।

गुरु 31 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?

06:03–07:30 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।

सूर्योदय 06:03 सूर्यास्त 17:42 सूर्योदय 06:03 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं शुभ
सूर्योदय 06:03 सूर्यास्त 17:42 सूर्योदय 06:03 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं शुभ
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त

यहाँ दिन, 06:03 से 17:42, 1 घं 27 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

यहाँ रात, 17:42 से 06:03 शुक्र, 1 घं 32 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।

दिन के 8 भाग

गुरु 31 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 13:20–14:47

राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:20–14:47।

गुरु 31 अक्टूबर को यमगंड कब है? 06:03–07:30

यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:03–07:30।

गुरु 31 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 08:58–10:25

गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 08:58–10:25।

सूर्योदय 06:03 सूर्यास्त 17:42 सूर्योदय 06:03 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
सूर्योदय 06:03 सूर्यास्त 17:42 सूर्योदय 06:03 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 1 2 3 4 5 6 7 8
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · धारीदार: यमगण्ड 1, गुलिक काल 3

यहाँ दिन 06:03 से 17:42 तक है, 11 घं 39 मि। इसे 1 घं 27 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।

सूर्योदय और सूर्यास्त

गुरु 31 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:03

यहाँ दिन: सूर्योदय 06:03, सूर्यास्त 17:42, 11 घं 39 मि का दिन।

गुरु 31 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:42

यहाँ दिन: सूर्योदय 06:03, सूर्यास्त 17:42, 11 घं 39 मि का दिन।

सूर्योदय 06:03 सूर्यास्त 17:42 सूर्योदय 06:03 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:00 चंद्रोदय 05:51 शुक्र
सूर्योदय 06:03 सूर्यास्त 17:42 सूर्योदय 06:03 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:00 चंद्रोदय 05:51 शुक्र
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 39 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 21 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 39 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 21 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।

गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? चित्रा

सूर्योदय पर चंद्रमा 179.7° पर था: चित्रा, पद 2।

चंद्रमा सूर्य 0° चित्रा चंद्रमा 179.7° अगला: स्वाती पृथ्वी
चंद्रमा सूर्य 0° चित्रा चंद्रमा 179.7° अगला: स्वाती पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। चित्रा 173°20′–186°40′ तक है; चंद्रमा 176°40′ पर उसके पद 2 में आया। वह 20:14 को निकलेगा, स्वाती में।

गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा योग है? प्रीति

सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 373.8° थे, एक चक्कर और 13.8°: प्रीति।

सूर्य 194.1° + चंद्रमा 179.7° = 373.8° एक चक्कर + 13.8° प्रीति 13°20′–26°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
सूर्य 194.1° + चंद्रमा 179.7° = 373.8° एक चक्कर + 13.8° प्रीति 13°20′–26°40′ चंद्रमा सूर्य 0°
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · 0° ऊपर, वामावर्त

तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 194.1° + 179.7° = 373.8°, एक पूरा चक्कर और 13.8°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 13°20′–26°40′ दूसरा है, प्रीति। यह 06:10 शुक्र को समाप्त होता है, फिर आयुष्मान्।

गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा करण है? शकुनि

सूर्योदय पर बढ़त 345.6° थी: चतुर्दशी का दूसरा आधा, शकुनि।

सूर्य अमावस्या 0° 345.6° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल चतुर्दशी 336°–348° शकुनि 342°–348° पूर्णिमा 180°
सूर्य अमावस्या 0° 345.6° चंद्रमा की बढ़त कृष्ण शुक्ल चतुर्दशी 336°–348° शकुनि 342°–348° पूर्णिमा 180°
केंद्र में पृथ्वी · सूर्य ऊपर स्थिर · चंद्रमा वामावर्त चलता है · हर 12° की तिथि दो करणों में · पैमाने पर नहीं

करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा विष्टि है और दूसरा शकुनि। विष्टि 22:06 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 342° हुई; शकुनि 11:23 तक है।

गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार

यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:03, पर शुरू हुआ: गुरुवार।

गुरुवार सूर्योदय 06:03 सूर्यास्त 17:42 सूर्योदय 06:03 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शुक्र अब भी गुरुवार
गुरुवार सूर्योदय 06:03 सूर्यास्त 17:42 सूर्योदय 06:03 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं 00:00 शुक्र अब भी गुरुवार
पहिये का एक चक्कर एक वार है, सूर्योदय से सूर्योदय · दक्षिणावर्त

हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:03 से 06:03 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।

गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? आश्विन

यह मास 2 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कन्या में था: आश्विन।

1 2 3 4 5 कन्या तुला 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
1 2 3 4 5 कन्या तुला 8 9 10 11 12 0° पृथ्वी
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · अमावस्या से अमावस्या तक सूर्य का पथ

अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कन्या से आश्विन। सूर्य 17 अक्टूबर को, मास के भीतर, तुला में जाता है। अगली अमावस्या, 1 नवंबर, उसे तुला में पाती है और कार्तिक शुरू करती है।

गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक

पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष कार्तिक का है।

अमान्त पूर्णिमान्त कार्तिक आश्विन कृष्ण शुक्ल गुरु 31 अक्टूबर अमावस्या 2 अक्टू॰ पूर्णिमा 17 अक्टू॰ अमावस्या 1 नव॰ पूर्णिमा 15 नव॰
अमान्त पूर्णिमान्त कार्तिक आश्विन कृष्ण शुक्ल गुरु 31 अक्टूबर अमावस्या 2 अक्टू॰ पूर्णिमा 17 अक्टू॰ अमावस्या 1 नव॰ पूर्णिमा 15 नव॰
समय बाएँ से दाएँ · अमान्त: अमावस्या से अमावस्या · पूर्णिमान्त: पूर्णिमा से पूर्णिमा

पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 1 नवंबर की अमावस्या, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ कार्तिक है, और अमान्त गणना में आश्विन।

गुरु 31 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2081 · शक 1946

विक्रम संवत 2081 8 अप्रैल 2024 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 8 अप्रैल 2024 19:20 · सूर्य मीन में सूर्योदय, गुरु 31 अक्टूबर सूर्य 194.1° पर
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 मीन 0° पृथ्वी चैत्र अमावस्या 8 अप्रैल 2024 19:20 · सूर्य मीन में सूर्योदय, गुरु 31 अक्टूबर सूर्य 194.1° पर
तारे स्थिर · निरयन, लाहिड़ी · वलय: सूर्य का वार्षिक पथ, 30° की 12 राशियाँ, 0° से गिनी · वर्ष के आरंभ से सूर्य का पथ

संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 8 अप्रैल 2024, 19:20 सोम। तब से सूर्य तारों के बीच 198.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2081 गिनता है; शक संवत 1946।

चंद्रोदय और चंद्रास्त

गुरु 31 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 05:51 शुक्र

चंद्रमा यहाँ 05:51 शुक्र पर उदय होता है।

गुरु 31 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:00

सूर्योदय 06:03 सूर्यास्त 17:42 सूर्योदय 06:03 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:00 चंद्रोदय 05:51 शुक्र
सूर्योदय 06:03 सूर्यास्त 17:42 सूर्योदय 06:03 शुक्र समय, ऊँचाई नहीं चंद्रास्त 17:00 चंद्रोदय 05:51 शुक्र
रेखा के ऊपर दिन, नीचे रात · सूर्योदय से दक्षिणावर्त · भीतरी चाप: क्षितिज के ऊपर चंद्रमा, दो बार

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:00 पर अस्त हुआ; वह फिर 05:51 शुक्र पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।

चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:00 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 05:51 शुक्र पर उदय होगा।