दिफ्फा, नाइजर का पंचांग गुरु 4 अप्रैल 2024
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय WAT में
4 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 4 अप्रैल
- 04:29–05:16ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:03 से
- 06:03–07:35शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:47–12:37अभिजीत मुहूर्त
- 12:12–13:44लाभ चौघड़िया
- 13:44–15:17अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:49–18:21शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:21 के बाद
- 18:21–19:49अमृत चौघड़िया
- 00:12–01:39 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:07–04:35 शुक्रशुभ चौघड़िया
-
04:07–05:34 शुक्रअमृत कालधनिष्ठा में
- 04:35–06:02 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:29–05:16 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:03–07:35शुभयमगण्ड में
- 07:35–09:08रोगअशुभ
- 09:08–10:40उद्वेगअशुभ
- 10:40–12:12चरसामान्य
- 12:12–13:44लाभशुभ
- 13:44–15:17अमृतराहु काल में
- 15:17–16:49कालअशुभ
- 16:49–18:21शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:21–19:49अमृतशुभ
- 19:49–21:16चरसामान्य
- 21:16–22:44रोगअशुभ
- 22:44–00:12 शुक्रकालअशुभ
- 00:12–01:39 शुक्रलाभशुभ
- 01:39–03:07 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:07–04:35 शुक्रशुभ
- 04:35–06:02 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 4 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 04:29–05:16, शुभ
- शुभ, 06:03–07:35
- रोग, अशुभ, 07:35–09:08
- उद्वेग, अशुभ, 09:08–10:40
- चर, सामान्य, 10:40–12:12
- लाभ, शुभ, 12:12–13:44
- अमृत, शुभ, 13:44–15:17
- काल, अशुभ, 15:17–16:49
- शुभ, 16:49–18:21
- अमृत, शुभ, 18:21–19:49
- चर, सामान्य, 19:49–21:16
- रोग, अशुभ, 21:16–22:44
- काल, अशुभ, 22:44–00:12 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:12–01:39 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:39–03:07 शुक्र
- शुभ, 03:07–04:35 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:35–06:02 शुक्र
- यमगण्ड, 06:03–07:35, अशुभ
- गुलिक काल, 09:08–10:40, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:09–10:58, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:47–12:37, शुभ
- राहु काल, 13:44–15:17, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:04–15:53, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:29–05:16 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
गुरु 4 अप्रैल को कौन सी तिथि है? कृष्ण दशमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 296.8° आगे था: कृष्ण दशमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 288°–300° पच्चीसवीं है, कृष्ण दशमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:03। नवमी उससे पहले 13:59 बुध पर समाप्त हुई। दशमी 11:44 को समाप्त होगी, जब बढ़त 300° होगी। बढ़त 25 मार्च की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
गुरु 4 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:29–05:16
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:29–05:16।
बुध 3 अप्रैल की रात सूर्यास्त 18:21 बुध से सूर्योदय 06:03 तक थी, 11 घं 42 मि। इसे 46 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 4 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:47–12:37
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:47–12:37।
गुरु 4 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 10:09–10:58
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:09–10:58 और 15:04–15:53।
गुरु 4 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 15:04–15:53
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:09–10:58 और 15:04–15:53।
यहाँ दिन, 06:03 से 18:21, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 49 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:09–10:58 और 15:04–15:53।
गुरु 4 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:03–07:35 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:03 से 18:21, 1 घं 32 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:21 से 06:02 शुक्र, 1 घं 27 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 4 अप्रैल को राहुकाल कब है? 13:44–15:17
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:44–15:17।
गुरु 4 अप्रैल को यमगंड कब है? 06:03–07:35
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:03–07:35।
गुरु 4 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 09:08–10:40
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:08–10:40।
यहाँ दिन 06:03 से 18:21 तक है, 12 घं 18 मि। इसे 1 घं 32 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 4 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 06:03
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:03, सूर्यास्त 18:21, 12 घं 18 मि का दिन।
गुरु 4 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:21
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:03, सूर्यास्त 18:21, 12 घं 18 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 18 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 41 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 18 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 41 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 4 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? श्रवण
सूर्योदय पर चंद्रमा 287.6° पर था: श्रवण, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। श्रवण 280°00′–293°20′ तक है; चंद्रमा 286°40′ पर उसके पद 3 में आया। वह 15:41 को निकलेगा, धनिष्ठा में।
गुरु 4 अप्रैल को कौन सा योग है? सिद्ध
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 638.3° थे, एक चक्कर और 278.3°: सिद्ध।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 350.7° + 287.6° = 638.3°, एक पूरा चक्कर और 278.3°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 266°40′–280°00′ इक्कीसवाँ है, सिद्ध। यह 08:45 को समाप्त होता है, फिर साध्य।
गुरु 4 अप्रैल को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 296.8° थी: दशमी का दूसरा आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए दशमी का पहला आधा वणिज है और दूसरा विष्टि। वणिज 00:56 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 294° हुई; विष्टि 11:44 तक है।
गुरु 4 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:03, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:03 से 06:02 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 4 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन
यह मास 10 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 14 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 8 अप्रैल, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।
गुरु 4 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष चैत्र का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 8 अप्रैल की अमावस्या, सूर्य मीन में, चैत्र शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ चैत्र है, और अमान्त गणना में फाल्गुन।
गुरु 4 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2080 · शक 1945
विक्रम संवत 2080 21 मार्च 2023 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 21 मार्च 2023, 18:23 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 374.1° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2080 गिनता है; शक संवत 1945।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 4 अप्रैल को चंद्रोदय कितने बजे है? 03:24 शुक्र
चंद्रमा यहाँ 03:24 शुक्र पर उदय होता है।
गुरु 4 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 14:17
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:17 पर अस्त हुआ; वह फिर 03:24 शुक्र पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 14:17 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 03:24 शुक्र पर उदय होगा।