दिफ्फा, नाइजर का पंचांग शनि 4 जून 2016
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय WAT में
त्योहार
वट सावित्री व्रत
वट सावित्री व्रत शनि 4 जून को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। शनि 4 जून क्यों?
वट सावित्री व्रत: दिफ्फा में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या शनि 4 जून को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। शनि 4 जून क्यों?
अमावस्या: दिफ्फा में हर तारीख़4 जून का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 4 जून
- 04:12–04:57ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:41 से
- 07:24–08:54शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
-
08:26–08:54अमृत कालराहु काल छोड़कर · कृत्तिका में
- 11:42–12:33अभिजीत मुहूर्त
- 13:44–15:21लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 15:21–16:57अमृत चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:34 के बाद
- 18:34–19:57लाभ चौघड़िया
- 21:21–22:44शुभ चौघड़िया
- 22:44–00:08 रविअमृत चौघड़िया
- 04:18–05:41 रविलाभ चौघड़िया
-
05:13–06:39 रविअमृत कालरोहिणी में
- 04:12–04:57 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:41–07:18कालअशुभ
- 07:18–08:54शुभ
- 08:54–10:31रोगअशुभ
- 10:31–12:08उद्वेगअशुभ
- 12:08–13:44चरसामान्य
- 13:44–15:21लाभयमगण्ड में
- 15:21–16:57अमृतशुभ
- 16:57–18:34कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:34–19:57लाभशुभ
- 19:57–21:21उद्वेगअशुभ
- 21:21–22:44शुभ
- 22:44–00:08 रविअमृतशुभ
- 00:08–01:31 रविचरसामान्य
- 01:31–02:54 रविरोगअशुभ
- 02:54–04:18 रविकालअशुभ
- 04:18–05:41 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 4 जून: ब्रह्म मुहूर्त, 04:12–04:57, शुभ
- काल, अशुभ, 05:41–07:18
- शुभ, 07:18–08:54
- रोग, अशुभ, 08:54–10:31
- उद्वेग, अशुभ, 10:31–12:08
- चर, सामान्य, 12:08–13:44
- लाभ, शुभ, 13:44–15:21
- अमृत, शुभ, 15:21–16:57
- काल, अशुभ, 16:57–18:34
- लाभ, शुभ, 18:34–19:57
- उद्वेग, अशुभ, 19:57–21:21
- शुभ, 21:21–22:44
- अमृत, शुभ, 22:44–00:08 रवि
- चर, सामान्य, 00:08–01:31 रवि
- रोग, अशुभ, 01:31–02:54 रवि
- काल, अशुभ, 02:54–04:18 रवि
- लाभ, शुभ, 04:18–05:41 रवि
- गुलिक काल, 05:41–07:18, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 05:41–06:33, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:33–07:24, अशुभ
- राहु काल, 08:54–10:31, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:42–12:33, शुभ
- यमगण्ड, 13:44–15:21, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:12–04:57 रवि
हर मान कैसे निकलता है
दिफ्फा में वट सावित्री व्रत शनि 4 जून को क्यों है?
वट सावित्री व्रत शनि 4 जून को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।
वट सावित्री व्रत सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या शनि 4 जून को 07:19 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और रवि 5 जून को 03:59 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: शनि 4 जून। वट सावित्री व्रत का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
दिफ्फा में अमावस्या शनि 4 जून को क्यों है?
अमावस्या शनि 4 जून को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या शनि 4 जून को 07:19 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और रवि 5 जून को 03:59 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: शनि 4 जून। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
शनि 4 जून को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्दशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 347° आगे था: कृष्ण चतुर्दशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 336°–348° उनतीसवीं है, कृष्ण चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:41। त्रयोदशी उससे पहले 10:46 शुक्र पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 07:19 को समाप्त होगी, जब बढ़त 348° होगी। बढ़त 21 मई की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
अमावस्या क्षय क्यों है?
अमावस्या एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन अमावस्या नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। अमावस्या 07:19 को शुरू हुई और 03:59 रवि को समाप्त, 05:41 और 05:41 रवि के सूर्योदयों के बीच। शनिवार को चतुर्दशी है और रविवार को प्रतिपदा: अमावस्या यहाँ क्षय तिथि है।
शनि 4 जून को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:12–04:57
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:12–04:57।
शुक्र 3 जून की रात सूर्यास्त 18:33 शुक्र से सूर्योदय 05:41 तक थी, 11 घं 8 मि। इसे 44 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 4 जून को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:42–12:33
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:42–12:33।
शनि 4 जून को दुर्मुहूर्त कब है? 05:41–06:33
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 05:41–06:33 और 06:33–07:24।
शनि 4 जून को दुर्मुहूर्त कब है? 06:33–07:24
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 05:41–06:33 और 06:33–07:24।
यहाँ दिन, 05:41 से 18:34, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 51 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 05:41–06:33 और 06:33–07:24।
शनि 4 जून का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:41–07:18 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:41 से 18:34, 1 घं 36 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:34 से 05:41 रवि, 1 घं 23 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 4 जून को राहुकाल कब है? 08:54–10:31
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 08:54–10:31।
शनि 4 जून को यमगंड कब है? 13:44–15:21
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:44–15:21।
शनि 4 जून को गुलिक काल कब है? 05:41–07:18
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:41–07:18।
यहाँ दिन 05:41 से 18:34 तक है, 12 घं 53 मि। इसे 1 घं 36 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 4 जून को सूर्योदय कितने बजे है? 05:41
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:41, सूर्यास्त 18:34, 12 घं 53 मि का दिन।
शनि 4 जून को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:34
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:41, सूर्यास्त 18:34, 12 घं 53 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 53 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 7 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 53 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 7 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 4 जून को कौन सा नक्षत्र है? कृत्तिका
सूर्योदय पर चंद्रमा 37° पर था: कृत्तिका, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। कृत्तिका 26°40′–40°00′ तक है; चंद्रमा 36°40′ पर उसके पद 4 में आया। वह 10:34 को निकलेगा, रोहिणी में।
शनि 4 जून को कौन सा योग है? सुकर्मा
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 86.9° थे: सुकर्मा।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 49.9° + 37° = 86.9°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 80°00′–93°20′ सातवाँ है, सुकर्मा। यह 15:27 को समाप्त होता है, फिर धृति।
शनि 4 जून को कौन सा करण है? शकुनि
सूर्योदय पर बढ़त 347° थी: चतुर्दशी का दूसरा आधा, शकुनि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा विष्टि है और दूसरा शकुनि। विष्टि 21:03 शुक्र पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 342° हुई; शकुनि 07:19 तक है।
शनि 4 जून को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 05:41, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:41 से 05:41 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 4 जून को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख
यह मास 6 मई की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 14 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 5 जून, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।
शनि 4 जून को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? ज्येष्ठ
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष ज्येष्ठ का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 5 जून की अमावस्या, सूर्य वृषभ में, ज्येष्ठ शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ ज्येष्ठ है, और अमान्त गणना में वैशाख।
शनि 4 जून को कौन सा संवत है? विक्रम 2073 · शक 1938
विक्रम संवत 2073 7 अप्रैल 2016 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 7 अप्रैल 2016, 12:23 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 55.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2073 गिनता है; शक संवत 1938।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 4 जून को चंद्रास्त कितने बजे है? 18:02
चंद्रमा यहाँ 18:02 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 18:02 पर, दिन में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।