Devarshola, तमिलनाडु का पंचांग शुक्र 11 सितंबर 2026
तमिलनाडु, भारत
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय IST में
व्रत
अमावस्या
अमावस्या शुक्र 11 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। शुक्र 11 सितंबर क्यों?
अमावस्या: Devarshola में हर तारीख़11 सितंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 11 सितंबर
- 04:39–05:27ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:14 से
-
07:05–07:45अमृत कालगुलिक काल छोड़कर · पूर्वाफाल्गुनी में
- 07:45–09:17लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 09:29–10:49अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 12:21–12:45अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 12:21–12:45शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 13:34–13:52शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- सूर्यास्त 18:28 के बाद
- 21:24–22:52लाभ चौघड़िया
- 00:21–01:49 शनिशुभ चौघड़िया
- 01:49–03:17 शनिअमृत चौघड़िया
-
05:49–06:13 शनिअमृत कालगुलिक काल छोड़कर · उत्तराफाल्गुनी में
- 04:39–05:26 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:14–07:45चरसामान्य
- 07:45–09:17लाभगुलिक काल में
- 09:17–10:49अमृतशुभ
- 10:49–12:21कालअशुभ
- 12:21–13:52शुभ
- 13:52–15:24रोगअशुभ
- 15:24–16:56उद्वेगअशुभ
- 16:56–18:28चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 18:28–19:56रोगअशुभ
- 19:56–21:24कालअशुभ
- 21:24–22:52लाभशुभ
- 22:52–00:21 शनिउद्वेगअशुभ
- 00:21–01:49 शनिशुभ
- 01:49–03:17 शनिअमृतशुभ
- 03:17–04:45 शनिचरसामान्य
- 04:45–06:13 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 11 सितंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:39–05:27, शुभ
- चर, सामान्य, 06:14–07:45
- लाभ, शुभ, 07:45–09:17
- अमृत, शुभ, 09:17–10:49
- काल, अशुभ, 10:49–12:21
- शुभ, 12:21–13:52
- रोग, अशुभ, 13:52–15:24
- उद्वेग, अशुभ, 15:24–16:56
- चर, सामान्य, 16:56–18:28
- रोग, अशुभ, 18:28–19:56
- काल, अशुभ, 19:56–21:24
- लाभ, शुभ, 21:24–22:52
- उद्वेग, अशुभ, 22:52–00:21 शनि
- शुभ, 00:21–01:49 शनि
- अमृत, शुभ, 01:49–03:17 शनि
- चर, सामान्य, 03:17–04:45 शनि
- रोग, अशुभ, 04:45–06:13 शनि
- गुलिक काल, 07:45–09:17, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 08:40–09:29, अशुभ
- राहु काल, 10:49–12:21, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:56–12:45, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 12:45–13:34, अशुभ
- यमगण्ड, 15:24–16:56, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:39–05:26 शनि
हर मान कैसे निकलता है
Devarshola में अमावस्या शुक्र 11 सितंबर को क्यों है?
अमावस्या शुक्र 11 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या गुरु 10 सितंबर को 10:33 से शुक्र 11 सितंबर को 08:57 तक है, इसलिए वह केवल शुक्र 11 सितंबर के सूर्योदय (06:14) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
शुक्र 11 सितंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 358.6° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:14। चतुर्दशी उससे पहले 10:33 गुरु पर समाप्त हुई। अमावस्या 08:57 को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 28 अगस्त की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
शुक्र 11 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:39–05:27
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:39–05:27।
गुरु 10 सितंबर की रात सूर्यास्त 18:28 गुरु से सूर्योदय 06:14 तक थी, 11 घं 46 मि। इसे 47 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 11 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:56–12:45
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:56–12:45।
शुक्र 11 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 08:40–09:29
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 08:40–09:29 और 12:45–13:34।
शुक्र 11 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 12:45–13:34
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 08:40–09:29 और 12:45–13:34।
यहाँ दिन, 06:14 से 18:28, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 48 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 08:40–09:29 और 12:45–13:34।
शुक्र 11 सितंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:14–07:45 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:14 से 18:28, 1 घं 31 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:28 से 06:13 शनि, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 11 सितंबर को राहुकाल कब है? 10:49–12:21
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:49–12:21।
शुक्र 11 सितंबर को यमगंड कब है? 15:24–16:56
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:24–16:56।
शुक्र 11 सितंबर को गुलिक काल कब है? 07:45–09:17
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 07:45–09:17।
यहाँ दिन 06:14 से 18:28 तक है, 12 घं 14 मि। इसे 1 घं 31 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 11 सितंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:14
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:14, सूर्यास्त 18:28, 12 घं 14 मि का दिन।
शुक्र 11 सितंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:28
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:14, सूर्यास्त 18:28, 12 घं 14 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 14 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 45 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 14 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 45 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 11 सितंबर को कौन सा नक्षत्र है? पूर्वाफाल्गुनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 142.6° पर था: पूर्वाफाल्गुनी, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पूर्वाफाल्गुनी 133°20′–146°40′ तक है; चंद्रमा 140° पर उसके पद 3 में आया। वह 13:16 को निकलेगा, उत्तराफाल्गुनी में।
शुक्र 11 सितंबर को कौन सा योग है? साध्य
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 286.7° थे: साध्य।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 144.1° + 142.6° = 286.7°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 280°00′–293°20′ बाईसवाँ है, साध्य। यह 17:02 को समाप्त होता है, फिर शुभ।
शुक्र 11 सितंबर को कौन सा करण है? नाग
सूर्योदय पर बढ़त 358.6° थी: अमावस्या का दूसरा आधा, नाग।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 21:42 गुरु पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 354° हुई; नाग 08:57 तक है।
शुक्र 11 सितंबर को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 06:14, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:14 से 06:13 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 11 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? श्रावण
यह मास 12 अगस्त की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कर्क में था: श्रावण।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कर्क से श्रावण। सूर्य 17 अगस्त को, मास के भीतर, सिंह में जाता है। अगली अमावस्या, 11 सितंबर, उसे सिंह में पाती है और भाद्रपद शुरू करती है।
शुक्र 11 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? भाद्रपद
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष भाद्रपद का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 11 सितंबर की अमावस्या, सूर्य सिंह में, भाद्रपद शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ भाद्रपद है, और अमान्त गणना में श्रावण।
शुक्र 11 सितंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2083 · शक 1948
विक्रम संवत 2083 19 मार्च 2026 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 19 मार्च 2026, 06:53 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 169.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2083 गिनता है; शक संवत 1948।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 11 सितंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 18:36
चंद्रमा यहाँ 18:36 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 18:36 पर, रात में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।