Davinópolis, मरान्हाओ, ब्राज़िल का पंचांग रवि 11 अप्रैल 2021
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
व्रत
अमावस्या
अमावस्या रवि 11 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। रवि 11 अप्रैल क्यों?
अमावस्या: Davinópolis में हर तारीख़11 अप्रैल का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, रवि 11 अप्रैल
- 04:34–05:22ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:10 से
- 09:10–10:40लाभ चौघड़िया
- 10:40–12:10अमृत चौघड़िया
- 11:46–12:10अभिजीत मुहूर्तयमगण्ड छोड़कर
- 13:40–15:10शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:10 के बाद
- 18:10–19:40शुभ चौघड़िया
- 19:40–21:10अमृत चौघड़िया
-
00:20–02:06 सोमअमृत कालरेवती में
- 01:40–03:10 सोमलाभ चौघड़िया
- 04:40–06:10 सोमशुभ चौघड़िया
- 04:34–05:22 सोमअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:10–07:40उद्वेगअशुभ
- 07:40–09:10चरसामान्य
- 09:10–10:40लाभशुभ
- 10:40–12:10अमृतशुभ
- 12:10–13:40कालअशुभ
- 13:40–15:10शुभ
- 15:10–16:40रोगअशुभ
- 16:40–18:10उद्वेगअशुभ
रात का चौघड़िया
- 18:10–19:40शुभ
- 19:40–21:10अमृतशुभ
- 21:10–22:40चरसामान्य
- 22:40–00:10 सोमरोगअशुभ
- 00:10–01:40 सोमकालअशुभ
- 01:40–03:10 सोमलाभशुभ
- 03:10–04:40 सोमउद्वेगअशुभ
- 04:40–06:10 सोमशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, रवि 11 अप्रैल: ब्रह्म मुहूर्त, 04:34–05:22, शुभ
- उद्वेग, अशुभ, 06:10–07:40
- चर, सामान्य, 07:40–09:10
- लाभ, शुभ, 09:10–10:40
- अमृत, शुभ, 10:40–12:10
- काल, अशुभ, 12:10–13:40
- शुभ, 13:40–15:10
- रोग, अशुभ, 15:10–16:40
- उद्वेग, अशुभ, 16:40–18:10
- शुभ, 18:10–19:40
- अमृत, शुभ, 19:40–21:10
- चर, सामान्य, 21:10–22:40
- रोग, अशुभ, 22:40–00:10 सोम
- काल, अशुभ, 00:10–01:40 सोम
- लाभ, शुभ, 01:40–03:10 सोम
- उद्वेग, अशुभ, 03:10–04:40 सोम
- शुभ, 04:40–06:10 सोम
- अभिजीत मुहूर्त, 11:46–12:34, शुभ
- यमगण्ड, 12:10–13:40, अशुभ
- गुलिक काल, 15:10–16:40, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 16:34–17:22, अशुभ
- राहु काल, 16:40–18:10, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:34–05:22 सोम
हर मान कैसे निकलता है
Davinópolis में अमावस्या रवि 11 अप्रैल को क्यों है?
अमावस्या रवि 11 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या शनि 10 अप्रैल को 21:33 से रवि 11 अप्रैल को 23:30 तक है, इसलिए वह केवल रवि 11 अप्रैल के सूर्योदय (06:10) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
रवि 11 अप्रैल को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 352° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:10। चतुर्दशी उससे पहले 21:33 शनि पर समाप्त हुई। अमावस्या 23:30 को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 28 मार्च की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
नई दिल्ली में चतुर्दशी क्यों है?
नई दिल्ली में चतुर्दशी है, Davinópolis में अमावस्या।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो।
नई दिल्ली · IST
यहाँ सूर्योदय, 06:00, चतुर्दशी की समाप्ति 06:03 से पहले हुआ: यह दिन चतुर्दशी है।
Davinópolis · UTC−3
यहाँ सूर्योदय, 06:10, चतुर्दशी की समाप्ति 21:33 शनि के बाद हुआ: यह दिन अमावस्या है।
रवि 11 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:34–05:22
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:34–05:22।
शनि 10 अप्रैल की रात सूर्यास्त 18:10 शनि से सूर्योदय 06:10 तक थी, 12 घं 0 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
रवि 11 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:46–12:34
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:46–12:34।
रवि 11 अप्रैल को दुर्मुहूर्त कब है? 16:34–17:22
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 16:34–17:22।
यहाँ दिन, 06:10 से 18:10, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 48 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। रविवार को दुर्मुहूर्त चौदहवाँ है, 16:34–17:22।
रवि 11 अप्रैल का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:10–07:40 उद्वेग है, जिसके स्वामी सूर्य हैं, रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:10 से 18:10, 1 घं 30 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:10 से 06:10 सोम, 1 घं 30 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
रवि 11 अप्रैल को राहुकाल कब है? 16:40–18:10
राहु काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से आठवाँ है: 16:40–18:10।
रवि 11 अप्रैल को यमगंड कब है? 12:10–13:40
यमगण्ड रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पाँचवाँ है: 12:10–13:40।
रवि 11 अप्रैल को गुलिक काल कब है? 15:10–16:40
गुलिक काल रविवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 15:10–16:40।
यहाँ दिन 06:10 से 18:10 तक है, 12 घं 0 मि। इसे 1 घं 30 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: रविवार को राहु काल आठवाँ भाग है, यमगण्ड पाँचवाँ और गुलिक काल सातवाँ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
रवि 11 अप्रैल को सूर्योदय कितने बजे है? 06:10
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:10, सूर्यास्त 18:10, 12 घं 0 मि का दिन।
रवि 11 अप्रैल को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:10
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:10, सूर्यास्त 18:10, 12 घं 0 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 0 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 0 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 0 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 0 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
रवि 11 अप्रैल को कौन सा नक्षत्र है? रेवती
सूर्योदय पर चंद्रमा 349.6° पर था: रेवती, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। रेवती 346°40′–360°00′ तक है; चंद्रमा 346°40′ पर उसके पद 1 में आया। वह 02:59 सोम को निकलेगा, अश्विनी में।
रवि 11 अप्रैल को कौन सा योग है? वैधृति
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 707.2° थे, एक चक्कर और 347.2°: वैधृति।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 357.6° + 349.6° = 707.2°, एक पूरा चक्कर और 347.2°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 346°40′–360°00′ सत्ताईसवाँ है, वैधृति। यह 05:56 सोम को समाप्त होता है, फिर विष्कम्भ।
रवि 11 अप्रैल को कौन सा करण है? चतुष्पाद
सूर्योदय पर बढ़त 352° थी: अमावस्या का पहला आधा, चतुष्पाद।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 10:29 तक है, जब बढ़त 354° होगी; नाग 23:30 तक।
रवि 11 अप्रैल को कौन सा वार है, और कब से? रविवार
यह दिन रविवार को सूर्योदय, 06:10, पर शुरू हुआ: रविवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:10 से 06:10 सोम तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी रविवार के हैं।
रवि 11 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? फाल्गुन
यह मास 13 मार्च की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य कुंभ में था: फाल्गुन।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: कुंभ से फाल्गुन। सूर्य 14 मार्च को, मास के भीतर, मीन में जाता है। अगली अमावस्या, 11 अप्रैल, उसे मीन में पाती है और चैत्र शुरू करती है।
रवि 11 अप्रैल को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? चैत्र
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष चैत्र का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 11 अप्रैल की अमावस्या, सूर्य मीन में, चैत्र शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ चैत्र है, और अमान्त गणना में फाल्गुन।
रवि 11 अप्रैल को कौन सा संवत है? विक्रम 2077 · शक 1942
विक्रम संवत 2077 24 मार्च 2020 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 24 मार्च 2020, 06:28 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 377.5° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2077 गिनता है; शक संवत 1942।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
रवि 11 अप्रैल को चंद्रास्त कितने बजे है? 18:05
चंद्रमा यहाँ 18:05 पर अस्त होता है।
चंद्रमा इस सूर्योदय और अगले के बीच उदय नहीं होता।
चंद्रमा 18:05 पर, दिन में, अस्त होता है और अगले सूर्योदय से पहले उदय नहीं होता।