Davinópolis, मरान्हाओ, ब्राज़िल का पंचांग गुरु 30 नवंबर 2000
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−3 में
शुक्ल पक्ष · 06:49 शुक्र तक
नई दिल्ली से अलग तिथि कारण जानें पञ्चमी यहाँ दो सूर्योदयों तक है कारण जानेंत्योहार
विवाह पंचमी
विवाह पंचमी गुरु 30 नवंबर को है: पञ्चमी दो सूर्योदयों पर है, और पहला लिया जाता है। गुरु 30 नवंबर क्यों?
विवाह पंचमी: Davinópolis में हर तारीख़30 नवंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 30 नवंबर
- 04:13–04:59ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:45 से
- 05:45–07:19शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:33–12:23अभिजीत मुहूर्त
- 11:58–13:31लाभ चौघड़िया
-
12:05–13:31अमृत कालराहु काल छोड़कर · उत्तराषाढा में
- 13:31–15:04अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:37–18:10शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:10 के बाद
- 18:10–19:37अमृत चौघड़िया
- 23:58–01:25 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 02:52–04:19 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:19–05:46 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:13–04:59 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:45–07:19शुभयमगण्ड में
- 07:19–08:52रोगअशुभ
- 08:52–10:25उद्वेगअशुभ
- 10:25–11:58चरसामान्य
- 11:58–13:31लाभशुभ
- 13:31–15:04अमृतराहु काल में
- 15:04–16:37कालअशुभ
- 16:37–18:10शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:10–19:37अमृतशुभ
- 19:37–21:04चरसामान्य
- 21:04–22:31रोगअशुभ
- 22:31–23:58कालअशुभ
- 23:58–01:25 शुक्रलाभशुभ
- 01:25–02:52 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 02:52–04:19 शुक्रशुभ
- 04:19–05:46 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 30 नवंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:13–04:59, शुभ
- शुभ, 05:45–07:19
- रोग, अशुभ, 07:19–08:52
- उद्वेग, अशुभ, 08:52–10:25
- चर, सामान्य, 10:25–11:58
- लाभ, शुभ, 11:58–13:31
- अमृत, शुभ, 13:31–15:04
- काल, अशुभ, 15:04–16:37
- शुभ, 16:37–18:10
- अमृत, शुभ, 18:10–19:37
- चर, सामान्य, 19:37–21:04
- रोग, अशुभ, 21:04–22:31
- काल, अशुभ, 22:31–23:58
- लाभ, शुभ, 23:58–01:25 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:25–02:52 शुक्र
- शुभ, 02:52–04:19 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:19–05:46 शुक्र
- यमगण्ड, 05:45–07:19, अशुभ
- गुलिक काल, 08:52–10:25, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:54–10:43, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:33–12:23, शुभ
- राहु काल, 13:31–15:04, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:52–15:41, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:13–04:59 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Davinópolis में विवाह पंचमी गुरु 30 नवंबर को क्यों है?
विवाह पंचमी गुरु 30 नवंबर को है: पञ्चमी दो सूर्योदयों पर है, और पहला लिया जाता है।
विवाह पंचमी सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। पञ्चमी दोनों सूर्योदयों पर है, गुरु 30 नवंबर को 05:45 और शुक्र 1 दिसंबर को 05:46। दो सूर्योदयों पर हो तो निर्णयसिंधु पहला दिन लेता है: गुरु 30 नवंबर। विवाह पंचमी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 30 नवंबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल पञ्चमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 48.8° आगे था: शुक्ल पञ्चमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 48°–60° पाँचवीं है, शुक्ल पञ्चमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:45। चतुर्थी उससे पहले 04:04 पर समाप्त हुई। पञ्चमी 06:49 शुक्र को समाप्त होगी, जब बढ़त 60° होगी। बढ़त 25 नवंबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
पञ्चमी दो सूर्योदयों पर क्यों है?
पञ्चमी यहाँ गुरु 30 नवंबर और शुक्र 1 दिसंबर दोनों के सूर्योदय पर है।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। पञ्चमी 04:04 को, सूर्योदय 05:45 से पहले, शुरू हुई और 06:49 शुक्र को, अगले सूर्योदय 05:46 शुक्र के बाद, समाप्त होगी। दोनों दिन पञ्चमी है: यह यहाँ वृद्धि तिथि है।
नई दिल्ली में चतुर्थी क्यों है?
नई दिल्ली में चतुर्थी है, Davinópolis में पञ्चमी।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो।
नई दिल्ली · IST
यहाँ सूर्योदय, 06:55, चतुर्थी की समाप्ति 12:34 से पहले हुआ: यह दिन चतुर्थी है।
Davinópolis · UTC−3
यहाँ सूर्योदय, 05:45, चतुर्थी की समाप्ति 04:04 के बाद हुआ: यह दिन पञ्चमी है।
गुरु 30 नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:13–04:59
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:13–04:59।
बुध 29 नवंबर की रात सूर्यास्त 18:10 बुध से सूर्योदय 05:45 तक थी, 11 घं 35 मि। इसे 46 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 30 नवंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:33–12:23
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:33–12:23।
गुरु 30 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 09:54–10:43
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:54–10:43 और 14:52–15:41।
गुरु 30 नवंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:52–15:41
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:54–10:43 और 14:52–15:41।
यहाँ दिन, 05:45 से 18:10, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 49 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 09:54–10:43 और 14:52–15:41।
गुरु 30 नवंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:45–07:19 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:45 से 18:10, 1 घं 33 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:10 से 05:46 शुक्र, 1 घं 27 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 30 नवंबर को राहुकाल कब है? 13:31–15:04
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:31–15:04।
गुरु 30 नवंबर को यमगंड कब है? 05:45–07:19
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:45–07:19।
गुरु 30 नवंबर को गुलिक काल कब है? 08:52–10:25
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 08:52–10:25।
यहाँ दिन 05:45 से 18:10 तक है, 12 घं 25 मि। इसे 1 घं 33 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 30 नवंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 05:45
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:45, सूर्यास्त 18:10, 12 घं 25 मि का दिन।
गुरु 30 नवंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:10
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:45, सूर्यास्त 18:10, 12 घं 25 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 25 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 36 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 25 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 36 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 30 नवंबर को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराषाढा
सूर्योदय पर चंद्रमा 273.4° पर था: उत्तराषाढा, पद 3।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराषाढा 266°40′–280°00′ तक है; चंद्रमा 273°20′ पर उसके पद 3 में आया। वह 19:18 को निकलेगा, श्रवण में।
गुरु 30 नवंबर को कौन सा योग है? वृद्धि
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 498° थे, एक चक्कर और 138°: वृद्धि।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 224.6° + 273.4° = 498°, एक पूरा चक्कर और 138°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 133°20′–146°40′ ग्यारहवाँ है, वृद्धि। यह 22:08 को समाप्त होता है, फिर ध्रुव।
गुरु 30 नवंबर को कौन सा करण है? बव
सूर्योदय पर बढ़त 48.8° थी: पञ्चमी का पहला आधा, बव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए पञ्चमी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 17:26 तक है, जब बढ़त 54° होगी; बालव 06:49 शुक्र तक।
गुरु 30 नवंबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 05:45, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:45 से 05:46 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 30 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? मार्गशीर्ष
यह मास 25 नवंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य वृश्चिक में था: मार्गशीर्ष।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: वृश्चिक से मार्गशीर्ष। सूर्य 15 दिसंबर को, मास के भीतर, धनु में जाता है। अगली अमावस्या, 25 दिसंबर, उसे धनु में पाती है और पौष शुरू करती है।
गुरु 30 नवंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? मार्गशीर्ष
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष मार्गशीर्ष का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 25 नवंबर की अमावस्या ने, सूर्य वृश्चिक में, मार्गशीर्ष शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में मार्गशीर्ष है।
गुरु 30 नवंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2057 · शक 1922
विक्रम संवत 2057 4 अप्रैल 2000 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 4 अप्रैल 2000, 15:12 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 233.2° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2057 गिनता है; शक संवत 1922।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 30 नवंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 09:28
चंद्रमा यहाँ 09:28 पर उदय होता है।
गुरु 30 नवंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 22:08
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 09:28 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 22:08 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 09:28 पर उदय हुआ; वह फिर 22:08 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।