Cuenca, अज़ुये प्रांत, इक्वाडोर का पंचांग गुरु 26 सितंबर 2030
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC−5 में
त्योहार
सर्व पितृ अमावस्या
सर्व पितृ अमावस्या गुरु 26 सितंबर को है: उस दिन पूरे अपराह्न में अमावस्या है, और किसी दिन नहीं। गुरु 26 सितंबर क्यों?
सर्व पितृ अमावस्या: Cuenca में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या गुरु 26 सितंबर को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है। गुरु 26 सितंबर क्यों?
अमावस्या: Cuenca में हर तारीख़26 सितंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 26 सितंबर
- 04:28–05:16ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:03 से
- 06:03–07:34शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:43–12:31अभिजीत मुहूर्त
- 12:07–13:38लाभ चौघड़िया
- 13:38–15:09अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:39–18:10शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 18:10 के बाद
- 18:10–19:39अमृत चौघड़िया
-
21:56–23:28अमृत कालउत्तराफाल्गुनी में
- 00:07–01:36 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 03:05–04:34 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:34–06:03 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:28–05:15 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:03–07:34शुभयमगण्ड में
- 07:34–09:05रोगअशुभ
- 09:05–10:36उद्वेगअशुभ
- 10:36–12:07चरसामान्य
- 12:07–13:38लाभशुभ
- 13:38–15:09अमृतराहु काल में
- 15:09–16:39कालअशुभ
- 16:39–18:10शुभ
रात का चौघड़िया
- 18:10–19:39अमृतशुभ
- 19:39–21:08चरसामान्य
- 21:08–22:37रोगअशुभ
- 22:37–00:07 शुक्रकालअशुभ
- 00:07–01:36 शुक्रलाभशुभ
- 01:36–03:05 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 03:05–04:34 शुक्रशुभ
- 04:34–06:03 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 26 सितंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:28–05:16, शुभ
- शुभ, 06:03–07:34
- रोग, अशुभ, 07:34–09:05
- उद्वेग, अशुभ, 09:05–10:36
- चर, सामान्य, 10:36–12:07
- लाभ, शुभ, 12:07–13:38
- अमृत, शुभ, 13:38–15:09
- काल, अशुभ, 15:09–16:39
- शुभ, 16:39–18:10
- अमृत, शुभ, 18:10–19:39
- चर, सामान्य, 19:39–21:08
- रोग, अशुभ, 21:08–22:37
- काल, अशुभ, 22:37–00:07 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:07–01:36 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:36–03:05 शुक्र
- शुभ, 03:05–04:34 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:34–06:03 शुक्र
- यमगण्ड, 06:03–07:34, अशुभ
- गुलिक काल, 09:05–10:36, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 10:06–10:54, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:43–12:31, शुभ
- राहु काल, 13:38–15:09, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:56–15:45, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:28–05:15 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Cuenca में सर्व पितृ अमावस्या गुरु 26 सितंबर को क्यों है?
सर्व पितृ अमावस्या गुरु 26 सितंबर को है: उस दिन पूरे अपराह्न में अमावस्या है, और किसी दिन नहीं।
सब पितरों का श्राद्ध अपराह्न में होता है, दिन का चौथा पाँचवाँ भाग। अमावस्या गुरु 26 सितंबर को 06:45 से शुक्र 27 सितंबर को 04:54 तक है, इसलिए केवल गुरुवार का अपराह्न (13:19–15:45) उसके भीतर है। सर्व पितृ अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; अपराह्न Tithika की परिपाटी है।
Cuenca में अमावस्या गुरु 26 सितंबर को क्यों है?
अमावस्या गुरु 26 सितंबर को है: अमावस्या किसी सूर्योदय पर नहीं है, और उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या गुरु 26 सितंबर को 06:45 पर, उस सूर्योदय के बाद, लगती है और शुक्र 27 सितंबर को 04:54 पर, अगले सूर्योदय से पहले, समाप्त होती है: वह किसी सूर्योदय पर नहीं है। ऐसी तिथि उसी दिन मानी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 26 सितंबर। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 26 सितंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्दशी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 347.6° आगे था: कृष्ण चतुर्दशी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 336°–348° उनतीसवीं है, कृष्ण चतुर्दशी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:03। त्रयोदशी उससे पहले 08:05 बुध पर समाप्त हुई। चतुर्दशी 06:45 को समाप्त होगी, जब बढ़त 348° होगी। बढ़त 11 सितंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
अमावस्या क्षय क्यों है?
अमावस्या एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन अमावस्या नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। अमावस्या 06:45 को शुरू हुई और 04:54 शुक्र को समाप्त, 06:03 और 06:03 शुक्र के सूर्योदयों के बीच। गुरुवार को चतुर्दशी है और शुक्रवार को प्रतिपदा: अमावस्या यहाँ क्षय तिथि है।
गुरु 26 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:28–05:16
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:28–05:16।
बुध 25 सितंबर की रात सूर्यास्त 18:11 बुध से सूर्योदय 06:03 तक थी, 11 घं 52 मि। इसे 47 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 26 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:43–12:31
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:43–12:31।
गुरु 26 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 10:06–10:54
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:06–10:54 और 14:56–15:45।
गुरु 26 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:56–15:45
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 10:06–10:54 और 14:56–15:45।
यहाँ दिन, 06:03 से 18:10, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 48 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 10:06–10:54 और 14:56–15:45।
गुरु 26 सितंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:03–07:34 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:03 से 18:10, 1 घं 30 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 18:10 से 06:03 शुक्र, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 26 सितंबर को राहुकाल कब है? 13:38–15:09
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:38–15:09।
गुरु 26 सितंबर को यमगंड कब है? 06:03–07:34
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:03–07:34।
गुरु 26 सितंबर को गुलिक काल कब है? 09:05–10:36
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 09:05–10:36।
यहाँ दिन 06:03 से 18:10 तक है, 12 घं 7 मि। इसे 1 घं 30 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 26 सितंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:03
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:03, सूर्यास्त 18:10, 12 घं 7 मि का दिन।
गुरु 26 सितंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 18:10
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:03, सूर्यास्त 18:10, 12 घं 7 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 7 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 53 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 7 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 53 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराफाल्गुनी
सूर्योदय पर चंद्रमा 146.7° पर था: उत्तराफाल्गुनी, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराफाल्गुनी 146°40′–160°00′ तक है; चंद्रमा 146°40′ पर उसके पद 1 में आया। वह 04:48 शुक्र को निकलेगा, हस्त में।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा योग है? शुभ
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 305.8° थे: शुभ।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 159.1° + 146.7° = 305.8°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 293°20′–306°40′ तेईसवाँ है, शुभ। यह 07:21 को समाप्त होता है, फिर शुक्ल।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा करण है? शकुनि
सूर्योदय पर बढ़त 347.6° थी: चतुर्दशी का दूसरा आधा, शकुनि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्दशी का पहला आधा विष्टि है और दूसरा शकुनि। विष्टि 19:29 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 342° हुई; शकुनि 06:45 तक है।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:03, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:03 से 06:03 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? भाद्रपद
यह मास 28 अगस्त की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य सिंह में था: भाद्रपद।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: सिंह से भाद्रपद। सूर्य 16 सितंबर को, मास के भीतर, कन्या में जाता है। अगली अमावस्या, 27 सितंबर, उसे कन्या में पाती है और आश्विन शुरू करती है।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष आश्विन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 27 सितंबर की अमावस्या, सूर्य कन्या में, आश्विन शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ आश्विन है, और अमान्त गणना में भाद्रपद।
गुरु 26 सितंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2087 · शक 1952
विक्रम संवत 2087 2 अप्रैल 2030 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 2 अप्रैल 2030, 17:02 मंगल। तब से सूर्य तारों के बीच 170.2° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2087 गिनता है; शक संवत 1952।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 26 सितंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 06:01 शुक्र
चंद्रमा यहाँ 06:01 शुक्र पर उदय होता है।
गुरु 26 सितंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:37
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:37 पर अस्त हुआ; वह फिर 06:01 शुक्र पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 17:37 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 06:01 शुक्र पर उदय होगा।