Codcod, पश्चिमी विसाया, फिलिपींस का पंचांग गुरु 11 सितंबर 2031
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय PST में
11 सितंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 11 सितंबर
- 04:03–04:50ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:37 से
- 05:37–07:08शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:19–12:08अभिजीत मुहूर्त
- 11:43–13:15लाभ चौघड़िया
- 13:15–14:47अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:19–17:50शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:50 के बाद
- 17:50–19:19अमृत चौघड़िया
- 23:43–01:12 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 02:40–04:08 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:08–05:37 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:02–04:50 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:37–07:08शुभयमगण्ड में
- 07:08–08:40रोगअशुभ
- 08:40–10:12उद्वेगअशुभ
- 10:12–11:43चरसामान्य
- 11:43–13:15लाभशुभ
- 13:15–14:47अमृतराहु काल में
- 14:47–16:19कालअशुभ
- 16:19–17:50शुभ
रात का चौघड़िया
- 17:50–19:19अमृतशुभ
- 19:19–20:47चरसामान्य
- 20:47–22:15रोगअशुभ
- 22:15–23:43कालअशुभ
- 23:43–01:12 शुक्रलाभशुभ
- 01:12–02:40 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 02:40–04:08 शुक्रशुभ
- 04:08–05:37 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 11 सितंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:03–04:50, शुभ
- शुभ, 05:37–07:08
- रोग, अशुभ, 07:08–08:40
- उद्वेग, अशुभ, 08:40–10:12
- चर, सामान्य, 10:12–11:43
- लाभ, शुभ, 11:43–13:15
- अमृत, शुभ, 13:15–14:47
- काल, अशुभ, 14:47–16:19
- शुभ, 16:19–17:50
- अमृत, शुभ, 17:50–19:19
- चर, सामान्य, 19:19–20:47
- रोग, अशुभ, 20:47–22:15
- काल, अशुभ, 22:15–23:43
- लाभ, शुभ, 23:43–01:12 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:12–02:40 शुक्र
- शुभ, 02:40–04:08 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:08–05:37 शुक्र
- यमगण्ड, 05:37–07:08, अशुभ
- गुलिक काल, 08:40–10:12, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:41–10:30, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:19–12:08, शुभ
- राहु काल, 13:15–14:47, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:35–15:24, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:02–04:50 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
गुरु 11 सितंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण दशमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 294.3° आगे था: कृष्ण दशमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 288°–300° पच्चीसवीं है, कृष्ण दशमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:37। नवमी उससे पहले 15:40 बुध पर समाप्त हुई। दशमी 18:11 को समाप्त होगी, जब बढ़त 300° होगी। बढ़त 1 सितंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
गुरु 11 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:03–04:50
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:03–04:50।
बुध 10 सितंबर की रात सूर्यास्त 17:51 बुध से सूर्योदय 05:37 तक थी, 11 घं 46 मि। इसे 47 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 11 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:19–12:08
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:19–12:08।
गुरु 11 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 09:41–10:30
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:41–10:30 और 14:35–15:24।
गुरु 11 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:35–15:24
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:41–10:30 और 14:35–15:24।
यहाँ दिन, 05:37 से 17:50, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 48 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 09:41–10:30 और 14:35–15:24।
गुरु 11 सितंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:37–07:08 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:37 से 17:50, 1 घं 31 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:50 से 05:37 शुक्र, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 11 सितंबर को राहुकाल कब है? 13:15–14:47
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:15–14:47।
गुरु 11 सितंबर को यमगंड कब है? 05:37–07:08
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:37–07:08।
गुरु 11 सितंबर को गुलिक काल कब है? 08:40–10:12
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 08:40–10:12।
यहाँ दिन 05:37 से 17:50 तक है, 12 घं 13 मि। इसे 1 घं 31 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 11 सितंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 05:37
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:37, सूर्यास्त 17:50, 12 घं 13 मि का दिन।
गुरु 11 सितंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:50
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:37, सूर्यास्त 17:50, 12 घं 13 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 13 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 47 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 13 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 47 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 11 सितंबर को कौन सा नक्षत्र है? आर्द्रा
सूर्योदय पर चंद्रमा 78° पर था: आर्द्रा, पद 4।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। आर्द्रा 66°40′–80°00′ तक है; चंद्रमा 76°40′ पर उसके पद 4 में आया। वह 09:41 को निकलेगा, पुनर्वसु में।
गुरु 11 सितंबर को कौन सा योग है? व्यतीपात
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 221.7° थे: व्यतीपात।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 143.7° + 78° = 221.7°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 213°20′–226°40′ सत्रहवाँ है, व्यतीपात। यह 14:58 को समाप्त होता है, फिर वरीयान्।
गुरु 11 सितंबर को कौन सा करण है? विष्टि
सूर्योदय पर बढ़त 294.3° थी: दशमी का दूसरा आधा, विष्टि।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए दशमी का पहला आधा वणिज है और दूसरा विष्टि। वणिज 04:55 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 294° हुई; विष्टि 18:11 तक है।
गुरु 11 सितंबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 05:37, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:37 से 05:37 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 11 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? भाद्रपद (अधिक)
18 अगस्त और 17 सितंबर की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक भाद्रपद।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 18 अगस्त 12:32 सोम से 17 सितंबर 02:46 बुध तक सूर्य सिंह में रहा; कन्या में वह अमावस्या के बाद 17 सितंबर 17:19 बुध को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक भाद्रपद है, जो भाद्रपद से पहले आता है।
गुरु 11 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? भाद्रपद (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष भाद्रपद (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 17 सितंबर की अमावस्या, सूर्य सिंह में, भाद्रपद (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ भाद्रपद (अधिक) है, और अमान्त गणना में भाद्रपद (अधिक)।
गुरु 11 सितंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2088 · शक 1953
विक्रम संवत 2088 23 मार्च 2031 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 23 मार्च 2031, 11:49 रवि। तब से सूर्य तारों के बीच 165.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2088 गिनता है; शक संवत 1953।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 11 सितंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 01:45 शुक्र
चंद्रमा यहाँ 01:45 शुक्र पर उदय होता है।
गुरु 11 सितंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 13:49
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 13:49 पर अस्त हुआ; वह फिर 01:45 शुक्र पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 13:49 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 01:45 शुक्र पर उदय होगा।