Codcod, पश्चिमी विसाया, फिलिपींस का पंचांग शुक्र 31 अक्टूबर 2025
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय PST में
31 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 31 अक्टूबर
- 04:00–04:49ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:38 से
- 07:06–08:34लाभ चौघड़ियागुलिक काल में
- 08:46–10:02अमृत चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 11:30–11:54अभिजीत मुहूर्तराहु काल छोड़कर
- 11:30–11:54शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
-
11:30–11:54अमृत कालराहु काल, दुर्मुहूर्त छोड़कर · धनिष्ठा में
- 12:41–12:58शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- सूर्यास्त 17:23 के बाद
- 20:27–21:59लाभ चौघड़िया
- 23:30–01:02 शनिशुभ चौघड़िया
- 01:02–02:34 शनिअमृत चौघड़िया
- 04:00–04:49 शनिअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:38–07:06चरसामान्य
- 07:06–08:34लाभगुलिक काल में
- 08:34–10:02अमृतशुभ
- 10:02–11:30कालअशुभ
- 11:30–12:58शुभ
- 12:58–14:27रोगअशुभ
- 14:27–15:55उद्वेगअशुभ
- 15:55–17:23चरसामान्य
रात का चौघड़िया
- 17:23–18:55रोगअशुभ
- 18:55–20:27कालअशुभ
- 20:27–21:59लाभशुभ
- 21:59–23:30उद्वेगअशुभ
- 23:30–01:02 शनिशुभ
- 01:02–02:34 शनिअमृतशुभ
- 02:34–04:06 शनिचरसामान्य
- 04:06–05:38 शनिरोगअशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शुक्र 31 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:00–04:49, शुभ
- चर, सामान्य, 05:38–07:06
- लाभ, शुभ, 07:06–08:34
- अमृत, शुभ, 08:34–10:02
- काल, अशुभ, 10:02–11:30
- शुभ, 11:30–12:58
- रोग, अशुभ, 12:58–14:27
- उद्वेग, अशुभ, 14:27–15:55
- चर, सामान्य, 15:55–17:23
- रोग, अशुभ, 17:23–18:55
- काल, अशुभ, 18:55–20:27
- लाभ, शुभ, 20:27–21:59
- उद्वेग, अशुभ, 21:59–23:30
- शुभ, 23:30–01:02 शनि
- अमृत, शुभ, 01:02–02:34 शनि
- चर, सामान्य, 02:34–04:06 शनि
- रोग, अशुभ, 04:06–05:38 शनि
- गुलिक काल, 07:06–08:34, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 07:59–08:46, अशुभ
- राहु काल, 10:02–11:30, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:07–11:54, शुभ
- दुर्मुहूर्त, 11:54–12:41, अशुभ
- यमगण्ड, 14:27–15:55, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:00–04:49 शनि
हर मान कैसे निकलता है
शुक्र 31 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? शुक्ल नवमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 104.5° आगे था: शुक्ल नवमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 96°–108° नौवीं है, शुक्ल नवमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:38। अष्टमी उससे पहले 12:37 गुरु पर समाप्त हुई। नवमी 12:34 को समाप्त होगी, जब बढ़त 108° होगी। बढ़त 21 अक्टूबर की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
शुक्र 31 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:00–04:49
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:00–04:49।
गुरु 30 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 17:23 गुरु से सूर्योदय 05:38 तक थी, 12 घं 15 मि। इसे 49 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शुक्र 31 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:07–11:54
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:07–11:54।
शुक्र 31 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 07:59–08:46
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 07:59–08:46 और 11:54–12:41।
शुक्र 31 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 11:54–12:41
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से चौथा और नौवाँ है: 07:59–08:46 और 11:54–12:41।
यहाँ दिन, 05:38 से 17:23, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शुक्रवार को दुर्मुहूर्त चौथा और नौवाँ है, 07:59–08:46 और 11:54–12:41।
शुक्र 31 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:38–07:06 चर है, जिसके स्वामी शुक्र हैं, शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, सामान्य माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:38 से 17:23, 1 घं 28 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:23 से 05:38 शनि, 1 घं 31 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शुक्र 31 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 10:02–11:30
राहु काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से चौथा है: 10:02–11:30।
शुक्र 31 अक्टूबर को यमगंड कब है? 14:27–15:55
यमगण्ड शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से सातवाँ है: 14:27–15:55।
शुक्र 31 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 07:06–08:34
गुलिक काल शुक्रवार के दिन के 8 बराबर भागों में से दूसरा है: 07:06–08:34।
यहाँ दिन 05:38 से 17:23 तक है, 11 घं 45 मि। इसे 1 घं 28 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शुक्रवार को राहु काल चौथा भाग है, यमगण्ड सातवाँ और गुलिक काल दूसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शुक्र 31 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 05:38
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:38, सूर्यास्त 17:23, 11 घं 45 मि का दिन।
शुक्र 31 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:23
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:38, सूर्यास्त 17:23, 11 घं 45 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 45 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 15 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 45 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 15 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शुक्र 31 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? धनिष्ठा
सूर्योदय पर चंद्रमा 298° पर था: धनिष्ठा, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। धनिष्ठा 293°20′–306°40′ तक है; चंद्रमा 296°40′ पर उसके पद 2 में आया। वह 21:21 को निकलेगा, शतभिषा में।
शुक्र 31 अक्टूबर को कौन सा योग है? गण्ड
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 491.5° थे, एक चक्कर और 131.5°: गण्ड।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 193.5° + 298° = 491.5°, एक पूरा चक्कर और 131.5°। चक्कर के बाद, 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 120°00′–133°20′ दसवाँ है, गण्ड। यह 08:45 को समाप्त होता है, फिर वृद्धि।
शुक्र 31 अक्टूबर को कौन सा करण है? कौलव
सूर्योदय पर बढ़त 104.5° थी: नवमी का दूसरा आधा, कौलव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए नवमी का पहला आधा बालव है और दूसरा कौलव। बालव 00:41 पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 102° हुई; कौलव 12:34 तक है।
शुक्र 31 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? शुक्रवार
यह दिन शुक्रवार को सूर्योदय, 05:38, पर शुरू हुआ: शुक्रवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:38 से 05:38 शनि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शुक्रवार के हैं।
शुक्र 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? कार्तिक
यह मास 21 अक्टूबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य तुला में था: कार्तिक।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: तुला से कार्तिक। सूर्य 16 नवंबर को, मास के भीतर, वृश्चिक में जाता है। अगली अमावस्या, 20 नवंबर, उसे वृश्चिक में पाती है और मार्गशीर्ष शुरू करती है।
शुक्र 31 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? कार्तिक
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष कार्तिक का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 21 अक्टूबर की अमावस्या ने, सूर्य तुला में, कार्तिक शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में कार्तिक है।
शुक्र 31 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2082 · शक 1947
विक्रम संवत 2082 29 मार्च 2025 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 29 मार्च 2025, 18:57 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 208.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2082 गिनता है; शक संवत 1947।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शुक्र 31 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 13:16
चंद्रमा यहाँ 13:16 पर उदय होता है।
शुक्र 31 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 01:18 शनि
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 13:16 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 01:18 शनि पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 13:16 पर उदय हुआ; वह फिर 01:18 शनि पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।