Codcod, पश्चिमी विसाया, फिलिपींस का पंचांग गुरु 4 अक्टूबर 2018
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय PST में
4 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 4 अक्टूबर
- 03:59–04:47ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:35 से
- 05:35–07:05शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:11–11:59अभिजीत मुहूर्त
- 11:35–13:05लाभ चौघड़िया
- 13:05–14:36अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:06–17:36शुभ चौघड़िया
-
17:19–18:49अमृत कालपुष्य में
- सूर्यास्त 17:36 के बाद
- 17:36–19:06अमृत चौघड़िया
- 23:35–01:05 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 02:35–04:05 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:05–05:35 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 03:59–04:47 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:35–07:05शुभयमगण्ड में
- 07:05–08:35रोगअशुभ
- 08:35–10:05उद्वेगअशुभ
- 10:05–11:35चरसामान्य
- 11:35–13:05लाभशुभ
- 13:05–14:36अमृतराहु काल में
- 14:36–16:06कालअशुभ
- 16:06–17:36शुभ
रात का चौघड़िया
- 17:36–19:06अमृतशुभ
- 19:06–20:36चरसामान्य
- 20:36–22:05रोगअशुभ
- 22:05–23:35कालअशुभ
- 23:35–01:05 शुक्रलाभशुभ
- 01:05–02:35 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 02:35–04:05 शुक्रशुभ
- 04:05–05:35 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 4 अक्टूबर: ब्रह्म मुहूर्त, 03:59–04:47, शुभ
- शुभ, 05:35–07:05
- रोग, अशुभ, 07:05–08:35
- उद्वेग, अशुभ, 08:35–10:05
- चर, सामान्य, 10:05–11:35
- लाभ, शुभ, 11:35–13:05
- अमृत, शुभ, 13:05–14:36
- काल, अशुभ, 14:36–16:06
- शुभ, 16:06–17:36
- अमृत, शुभ, 17:36–19:06
- चर, सामान्य, 19:06–20:36
- रोग, अशुभ, 20:36–22:05
- काल, अशुभ, 22:05–23:35
- लाभ, शुभ, 23:35–01:05 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:05–02:35 शुक्र
- शुभ, 02:35–04:05 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:05–05:35 शुक्र
- यमगण्ड, 05:35–07:05, अशुभ
- गुलिक काल, 08:35–10:05, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:35–10:23, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:11–11:59, शुभ
- राहु काल, 13:05–14:36, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:24–15:12, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 03:59–04:47 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
गुरु 4 अक्टूबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण दशमी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 289.6° आगे था: कृष्ण दशमी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 288°–300° पच्चीसवीं है, कृष्ण दशमी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:35। नवमी उससे पहले 02:40 पर समाप्त हुई। दशमी 00:19 शुक्र को समाप्त होगी, जब बढ़त 300° होगी। बढ़त 25 सितंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
गुरु 4 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 03:59–04:47
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 03:59–04:47।
बुध 3 अक्टूबर की रात सूर्यास्त 17:36 बुध से सूर्योदय 05:35 तक थी, 11 घं 59 मि। इसे 47 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 4 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:11–11:59
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:11–11:59।
गुरु 4 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 09:35–10:23
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:35–10:23 और 14:24–15:12।
गुरु 4 अक्टूबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:24–15:12
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:35–10:23 और 14:24–15:12।
यहाँ दिन, 05:35 से 17:36, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 48 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 09:35–10:23 और 14:24–15:12।
गुरु 4 अक्टूबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:35–07:05 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:35 से 17:36, 1 घं 30 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:36 से 05:35 शुक्र, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 4 अक्टूबर को राहुकाल कब है? 13:05–14:36
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:05–14:36।
गुरु 4 अक्टूबर को यमगंड कब है? 05:35–07:05
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:35–07:05।
गुरु 4 अक्टूबर को गुलिक काल कब है? 08:35–10:05
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 08:35–10:05।
यहाँ दिन 05:35 से 17:36 तक है, 12 घं 1 मि। इसे 1 घं 30 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 4 अक्टूबर को सूर्योदय कितने बजे है? 05:35
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:35, सूर्यास्त 17:36, 12 घं 1 मि का दिन।
गुरु 4 अक्टूबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:36
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:35, सूर्यास्त 17:36, 12 घं 1 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 1 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 59 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 12 घं 1 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 11 घं 59 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 4 अक्टूबर को कौन सा नक्षत्र है? पुष्य
सूर्योदय पर चंद्रमा 96.1° पर था: पुष्य, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। पुष्य 93°20′–106°40′ तक है; चंद्रमा 93°20′ पर उसके पद 1 में आया। वह 23:18 को निकलेगा, अश्लेशा में।
गुरु 4 अक्टूबर को कौन सा योग है? शिव
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 262.6° थे: शिव।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 166.5° + 96.1° = 262.6°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 253°20′–266°40′ बीसवाँ है, शिव। यह 11:57 को समाप्त होता है, फिर सिद्ध।
गुरु 4 अक्टूबर को कौन सा करण है? वणिज
सूर्योदय पर बढ़त 289.6° थी: दशमी का पहला आधा, वणिज।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए दशमी का पहला आधा वणिज है और दूसरा विष्टि। वणिज 13:31 तक है, जब बढ़त 294° होगी; विष्टि 00:19 शुक्र तक।
गुरु 4 अक्टूबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 05:35, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:35 से 05:35 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 4 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? भाद्रपद
यह मास 10 सितंबर की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य सिंह में था: भाद्रपद।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: सिंह से भाद्रपद। सूर्य 17 सितंबर को, मास के भीतर, कन्या में जाता है। अगली अमावस्या, 9 अक्टूबर, उसे कन्या में पाती है और आश्विन शुरू करती है।
गुरु 4 अक्टूबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष आश्विन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 9 अक्टूबर की अमावस्या, सूर्य कन्या में, आश्विन शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ आश्विन है, और अमान्त गणना में भाद्रपद।
गुरु 4 अक्टूबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2075 · शक 1940
विक्रम संवत 2075 17 मार्च 2018 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 17 मार्च 2018, 21:11 शनि। तब से सूर्य तारों के बीच 193.7° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2075 गिनता है; शक संवत 1940।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 4 अक्टूबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 01:40 शुक्र
चंद्रमा यहाँ 01:40 शुक्र पर उदय होता है।
गुरु 4 अक्टूबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 13:39
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 13:39 पर अस्त हुआ; वह फिर 01:40 शुक्र पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 13:39 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 01:40 शुक्र पर उदय होगा।