Chahārbāgh, अल्बोर्ज़ प्रांत, ईरान का पंचांग गुरु 30 सितंबर 2027
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय UTC+3:30 में
त्योहार
शारदीय नवरात्रि · घटस्थापना
शारदीय नवरात्रि · घटस्थापना गुरु 30 सितंबर को है: उस सुबह प्रतिपदा प्रातःकाल को छूती है, और किसी सुबह नहीं। गुरु 30 सितंबर क्यों?
शारदीय नवरात्रि: Chahārbāgh में हर तारीख़व्रत
अमावस्या
अमावस्या गुरु 30 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है। गुरु 30 सितंबर क्यों?
अमावस्या: Chahārbāgh में हर तारीख़30 सितंबर का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 30 सितंबर
- 04:23–05:12ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 06:00 से
- 06:00–07:29शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:32–12:20अभिजीत मुहूर्त
- 11:56–13:25लाभ चौघड़िया
- 13:25–14:54अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 16:23–17:52शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 17:52 के बाद
- 17:52–19:23अमृत चौघड़िया
-
18:38–20:07अमृत कालहस्त में
- 23:57–01:28 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 02:59–04:30 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 04:30–06:01 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 04:24–05:12 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 06:00–07:29शुभयमगण्ड में
- 07:29–08:58रोगअशुभ
- 08:58–10:27उद्वेगअशुभ
- 10:27–11:56चरसामान्य
- 11:56–13:25लाभशुभ
- 13:25–14:54अमृतराहु काल में
- 14:54–16:23कालअशुभ
- 16:23–17:52शुभ
रात का चौघड़िया
- 17:52–19:23अमृतशुभ
- 19:23–20:54चरसामान्य
- 20:54–22:25रोगअशुभ
- 22:25–23:57कालअशुभ
- 23:57–01:28 शुक्रलाभशुभ
- 01:28–02:59 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 02:59–04:30 शुक्रशुभ
- 04:30–06:01 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 30 सितंबर: ब्रह्म मुहूर्त, 04:23–05:12, शुभ
- शुभ, 06:00–07:29
- रोग, अशुभ, 07:29–08:58
- उद्वेग, अशुभ, 08:58–10:27
- चर, सामान्य, 10:27–11:56
- लाभ, शुभ, 11:56–13:25
- अमृत, शुभ, 13:25–14:54
- काल, अशुभ, 14:54–16:23
- शुभ, 16:23–17:52
- अमृत, शुभ, 17:52–19:23
- चर, सामान्य, 19:23–20:54
- रोग, अशुभ, 20:54–22:25
- काल, अशुभ, 22:25–23:57
- लाभ, शुभ, 23:57–01:28 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:28–02:59 शुक्र
- शुभ, 02:59–04:30 शुक्र
- अमृत, शुभ, 04:30–06:01 शुक्र
- यमगण्ड, 06:00–07:29, अशुभ
- गुलिक काल, 08:58–10:27, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:57–10:45, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:32–12:20, शुभ
- राहु काल, 13:25–14:54, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 14:42–15:30, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 04:24–05:12 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Chahārbāgh में शारदीय नवरात्रि गुरु 30 सितंबर को क्यों है?
शारदीय नवरात्रि · घटस्थापना गुरु 30 सितंबर को है: उस सुबह प्रतिपदा प्रातःकाल को छूती है, और किसी सुबह नहीं।
घटस्थापना प्रातःकाल में होती है, दिन का पहला पाँचवाँ भाग। प्रतिपदा गुरु 30 सितंबर को 06:06 से शुक्र 1 अक्टूबर को 03:35 तक है, इसलिए वह केवल गुरुवार के प्रातःकाल (06:00–08:23) को छूती है।
Chahārbāgh में अमावस्या गुरु 30 सितंबर को क्यों है?
अमावस्या गुरु 30 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर अमावस्या है।
अमावस्या सूर्योदय की तिथि से मानी जाती है। अमावस्या बुध 29 सितंबर को 08:55 से गुरु 30 सितंबर को 06:06 तक है, इसलिए वह केवल गुरु 30 सितंबर के सूर्योदय (06:00) पर है। अमावस्या का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्योदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 30 सितंबर को कौन सी तिथि है? कृष्ण अमावस्या
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 359.9° आगे था: कृष्ण अमावस्या।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 348°–360° तीसवीं है, कृष्ण अमावस्या। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 06:00। चतुर्दशी उससे पहले 08:55 बुध पर समाप्त हुई। अमावस्या 06:06 को समाप्त होगी, जब बढ़त 360° होगी। बढ़त 16 सितंबर की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
प्रतिपदा क्षय क्यों है?
प्रतिपदा एक सूर्योदय के बाद शुरू हुई और अगले से पहले समाप्त, इसलिए यहाँ कोई दिन प्रतिपदा नहीं होता।
दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो। प्रतिपदा 06:06 को शुरू हुई और 03:35 शुक्र को समाप्त, 06:00 और 06:01 शुक्र के सूर्योदयों के बीच। गुरुवार को अमावस्या है और शुक्रवार को द्वितीया: प्रतिपदा यहाँ क्षय तिथि है।
गुरु 30 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 04:23–05:12
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 04:23–05:12।
बुध 29 सितंबर की रात सूर्यास्त 17:54 बुध से सूर्योदय 06:00 तक थी, 12 घं 6 मि। इसे 48 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 30 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:32–12:20
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:32–12:20।
गुरु 30 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 09:57–10:45
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:57–10:45 और 14:42–15:30।
गुरु 30 सितंबर को दुर्मुहूर्त कब है? 14:42–15:30
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:57–10:45 और 14:42–15:30।
यहाँ दिन, 06:00 से 17:52, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 47 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 09:57–10:45 और 14:42–15:30।
गुरु 30 सितंबर का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
06:00–07:29 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 06:00 से 17:52, 1 घं 29 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 17:52 से 06:01 शुक्र, 1 घं 31 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 30 सितंबर को राहुकाल कब है? 13:25–14:54
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:25–14:54।
गुरु 30 सितंबर को यमगंड कब है? 06:00–07:29
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 06:00–07:29।
गुरु 30 सितंबर को गुलिक काल कब है? 08:58–10:27
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 08:58–10:27।
यहाँ दिन 06:00 से 17:52 तक है, 11 घं 52 मि। इसे 1 घं 29 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 30 सितंबर को सूर्योदय कितने बजे है? 06:00
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:00, सूर्यास्त 17:52, 11 घं 52 मि का दिन।
गुरु 30 सितंबर को सूर्यास्त कितने बजे है? 17:52
यहाँ दिन: सूर्योदय 06:00, सूर्यास्त 17:52, 11 घं 52 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 52 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 9 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 11 घं 52 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 12 घं 9 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 30 सितंबर को कौन सा नक्षत्र है? हस्त
सूर्योदय पर चंद्रमा 162.4° पर था: हस्त, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। हस्त 160°00′–173°20′ तक है; चंद्रमा 160° पर उसके पद 1 में आया। वह 00:11 शुक्र को निकलेगा, चित्रा में।
गुरु 30 सितंबर को कौन सा योग है? ब्रह्म
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 324.9° थे: ब्रह्म।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 162.5° + 162.4° = 324.9°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 320°00′–333°20′ पच्चीसवाँ है, ब्रह्म। यह 19:09 को समाप्त होता है, फिर इन्द्र।
गुरु 30 सितंबर को कौन सा करण है? नाग
सूर्योदय पर बढ़त 359.9° थी: अमावस्या का दूसरा आधा, नाग।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए अमावस्या का पहला आधा चतुष्पाद है और दूसरा नाग। चतुष्पाद 19:29 बुध पर समाप्त हुआ, जब बढ़त 354° हुई; नाग 06:06 तक है।
गुरु 30 सितंबर को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 06:00, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 06:00 से 06:01 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 30 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? भाद्रपद
यह मास 31 अगस्त की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य सिंह में था: भाद्रपद।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: सिंह से भाद्रपद। सूर्य 17 सितंबर को, मास के भीतर, कन्या में जाता है। अगली अमावस्या, 30 सितंबर, उसे कन्या में पाती है और आश्विन शुरू करती है।
गुरु 30 सितंबर को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? आश्विन
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष आश्विन का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 30 सितंबर की अमावस्या, सूर्य कन्या में, आश्विन शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ आश्विन है, और अमान्त गणना में भाद्रपद।
गुरु 30 सितंबर को कौन सा संवत है? विक्रम 2084 · शक 1949
विक्रम संवत 2084 7 अप्रैल 2027 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 7 अप्रैल 2027, 03:21 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 169.8° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2084 गिनता है; शक संवत 1949।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 30 सितंबर को चंद्रोदय कितने बजे है? 06:10
चंद्रमा यहाँ 06:10 पर उदय होता है।
गुरु 30 सितंबर को चंद्रास्त कितने बजे है? 17:44
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 06:10 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 17:44 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 06:10 पर उदय हुआ; वह फिर 17:44 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त दिन में पड़ता है।