Baoding, चीन का पंचांग शनि 4 मई 2030
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय CST में
4 मई का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, शनि 4 मई
- 03:56–04:36ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 05:17 से
- 07:08–08:46शुभ चौघड़ियादुर्मुहूर्त छोड़कर
- 11:47–12:43अभिजीत मुहूर्त
- 13:59–15:44लाभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 15:44–17:28अमृत चौघड़िया
-
16:17–18:06अमृत कालकृत्तिका में
- सूर्यास्त 19:13 के बाद
- 19:13–20:28लाभ चौघड़िया
- 21:43–22:59शुभ चौघड़िया
- 22:59–00:14 रविअमृत चौघड़िया
- 04:00–05:16 रविलाभ चौघड़िया
- 03:55–04:35 रविअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 05:17–07:01कालअशुभ
- 07:01–08:46शुभ
- 08:46–10:30रोगअशुभ
- 10:30–12:15उद्वेगअशुभ
- 12:15–13:59चरसामान्य
- 13:59–15:44लाभयमगण्ड में
- 15:44–17:28अमृतशुभ
- 17:28–19:13कालअशुभ
रात का चौघड़िया
- 19:13–20:28लाभशुभ
- 20:28–21:43उद्वेगअशुभ
- 21:43–22:59शुभ
- 22:59–00:14 रविअमृतशुभ
- 00:14–01:29 रविचरसामान्य
- 01:29–02:45 रविरोगअशुभ
- 02:45–04:00 रविकालअशुभ
- 04:00–05:16 रविलाभशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, शनि 4 मई: ब्रह्म मुहूर्त, 03:56–04:36, शुभ
- काल, अशुभ, 05:17–07:01
- शुभ, 07:01–08:46
- रोग, अशुभ, 08:46–10:30
- उद्वेग, अशुभ, 10:30–12:15
- चर, सामान्य, 12:15–13:59
- लाभ, शुभ, 13:59–15:44
- अमृत, शुभ, 15:44–17:28
- काल, अशुभ, 17:28–19:13
- लाभ, शुभ, 19:13–20:28
- उद्वेग, अशुभ, 20:28–21:43
- शुभ, 21:43–22:59
- अमृत, शुभ, 22:59–00:14 रवि
- चर, सामान्य, 00:14–01:29 रवि
- रोग, अशुभ, 01:29–02:45 रवि
- काल, अशुभ, 02:45–04:00 रवि
- लाभ, शुभ, 04:00–05:16 रवि
- गुलिक काल, 05:17–07:01, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 05:17–06:12, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 06:12–07:08, अशुभ
- राहु काल, 08:46–10:30, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:47–12:43, शुभ
- यमगण्ड, 13:59–15:44, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 03:55–04:35 रवि
हर मान कैसे निकलता है
शनि 4 मई को कौन सी तिथि है? शुक्ल द्वितीया
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 14.1° आगे था: शुक्ल द्वितीया।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 12°–24° दूसरी है, शुक्ल द्वितीया। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 05:17। प्रतिपदा उससे पहले 00:43 पर समाप्त हुई। द्वितीया 03:20 रवि को समाप्त होगी, जब बढ़त 24° होगी। बढ़त 2 मई की अमावस्या पर 0° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा बढ़ रहा है: शुक्ल पक्ष।
शनि 4 मई को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 03:56–04:36
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 03:56–04:36।
शुक्र 3 मई की रात सूर्यास्त 19:12 शुक्र से सूर्योदय 05:17 तक थी, 10 घं 5 मि। इसे 40 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
शनि 4 मई को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:47–12:43
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:47–12:43।
शनि 4 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 05:17–06:12
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 05:17–06:12 और 06:12–07:08।
शनि 4 मई को दुर्मुहूर्त कब है? 06:12–07:08
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से पहला और दूसरा है: 05:17–06:12 और 06:12–07:08।
यहाँ दिन, 05:17 से 19:13, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 55 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। शनिवार को दुर्मुहूर्त पहला और दूसरा है, 05:17–06:12 और 06:12–07:08।
शनि 4 मई का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
05:17–07:01 काल है, जिसके स्वामी शनि हैं, शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, अशुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 05:17 से 19:13, 1 घं 44 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:13 से 05:16 रवि, 1 घं 15 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
शनि 4 मई को राहुकाल कब है? 08:46–10:30
राहु काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 08:46–10:30।
शनि 4 मई को यमगंड कब है? 13:59–15:44
यमगण्ड शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 13:59–15:44।
शनि 4 मई को गुलिक काल कब है? 05:17–07:01
गुलिक काल शनिवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 05:17–07:01।
यहाँ दिन 05:17 से 19:13 तक है, 13 घं 56 मि। इसे 1 घं 44 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: शनिवार को राहु काल तीसरा भाग है, यमगण्ड छठा और गुलिक काल पहला।
सूर्योदय और सूर्यास्त
शनि 4 मई को सूर्योदय कितने बजे है? 05:17
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:17, सूर्यास्त 19:13, 13 घं 56 मि का दिन।
शनि 4 मई को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:13
यहाँ दिन: सूर्योदय 05:17, सूर्यास्त 19:13, 13 घं 56 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 56 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 3 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 13 घं 56 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 10 घं 3 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
शनि 4 मई को कौन सा नक्षत्र है? कृत्तिका
सूर्योदय पर चंद्रमा 33.3° पर था: कृत्तिका, पद 2।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। कृत्तिका 26°40′–40°00′ तक है; चंद्रमा 30° पर उसके पद 2 में आया। वह 19:00 को निकलेगा, रोहिणी में।
शनि 4 मई को कौन सा योग है? सौभाग्य
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 52.5° थे: सौभाग्य।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 19.2° + 33.3° = 52.5°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 40°00′–53°20′ चौथा है, सौभाग्य। यह 06:55 को समाप्त होता है, फिर शोभन।
शनि 4 मई को कौन सा करण है? बालव
सूर्योदय पर बढ़त 14.1° थी: द्वितीया का पहला आधा, बालव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए द्वितीया का पहला आधा बालव है और दूसरा कौलव। बालव 14:01 तक है, जब बढ़त 18° होगी; कौलव 03:20 रवि तक।
शनि 4 मई को कौन सा वार है, और कब से? शनिवार
यह दिन शनिवार को सूर्योदय, 05:17, पर शुरू हुआ: शनिवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 05:17 से 05:16 रवि तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी शनिवार के हैं।
शनि 4 मई को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? वैशाख
यह मास 2 मई की अमावस्या से शुरू हुआ, जब सूर्य मेष में था: वैशाख।
अमान्त मास अमावस्या से अमावस्या तक चलता है और उसका नाम उस राशि से होता है जिसमें सूर्य आरंभ वाली अमावस्या पर हो: मेष से वैशाख। सूर्य 15 मई को, मास के भीतर, वृषभ में जाता है। अगली अमावस्या, 1 जून, उसे वृषभ में पाती है और ज्येष्ठ शुरू करती है।
शनि 4 मई को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? वैशाख
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह शुक्ल पक्ष वैशाख का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 2 मई की अमावस्या ने, सूर्य मेष में, वैशाख शुरू किया। यह शुक्ल पक्ष दोनों गणनाओं में वैशाख है।
शनि 4 मई को कौन सा संवत है? विक्रम 2087 · शक 1952
विक्रम संवत 2087 3 अप्रैल 2030 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 3 अप्रैल 2030, 06:02 बुध। तब से सूर्य तारों के बीच 30.3° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2087 गिनता है; शक संवत 1952।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
शनि 4 मई को चंद्रोदय कितने बजे है? 05:58
चंद्रमा यहाँ 05:58 पर उदय होता है।
शनि 4 मई को चंद्रास्त कितने बजे है? 20:56
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 05:58 पर, दिन में, उदय होता है; वह फिर 20:56 पर अस्त होगा।
चंद्रमा सूर्योदय पर नीचे था और 05:58 पर उदय हुआ; वह फिर 20:56 पर अस्त होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रास्त रात में पड़ता है।