Baoding, चीन का पंचांग गुरु 4 जून 2026
सूर्योदय से सूर्योदय तक · समय CST में
व्रत
संकष्टी चतुर्थी
संकष्टी चतुर्थी गुरु 4 जून को है: उस रात चंद्रोदय पर चतुर्थी है। गुरु 4 जून क्यों?
संकष्टी चतुर्थी: Baoding में हर तारीख़4 जून का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय से पहले, गुरु 4 जून
- 03:39–04:16ब्रह्म मुहूर्त
- सूर्योदय 04:53 से
- 04:53–06:44शुभ चौघड़ियायमगण्ड में
- 11:46–12:45अभिजीत मुहूर्त
- 12:16–14:07लाभ चौघड़िया
- 14:07–15:57अमृत चौघड़ियाराहु काल में
- 17:48–19:39शुभ चौघड़िया
- सूर्यास्त 19:39 के बाद
- 19:39–20:48अमृत चौघड़िया
-
23:04–00:51 शुक्रअमृत कालउत्तराषाढा में
- 00:16–01:25 शुक्रलाभ चौघड़िया
- 02:34–03:44 शुक्रशुभ चौघड़िया
- 03:44–04:53 शुक्रअमृत चौघड़िया
- 03:39–04:16 शुक्रअगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त
टालने योग्य समय
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
- 04:53–06:44शुभयमगण्ड में
- 06:44–08:35रोगअशुभ
- 08:35–10:25उद्वेगअशुभ
- 10:25–12:16चरसामान्य
- 12:16–14:07लाभशुभ
- 14:07–15:57अमृतराहु काल में
- 15:57–17:48कालअशुभ
- 17:48–19:39शुभ
रात का चौघड़िया
- 19:39–20:48अमृतशुभ
- 20:48–21:57चरसामान्य
- 21:57–23:07रोगअशुभ
- 23:07–00:16 शुक्रकालअशुभ
- 00:16–01:25 शुक्रलाभशुभ
- 01:25–02:34 शुक्रउद्वेगअशुभ
- 02:34–03:44 शुक्रशुभ
- 03:44–04:53 शुक्रअमृतशुभ
दिन, ब्रह्म मुहूर्त से अगले सूर्योदय तक
समय ऊपर से नीचे। पट्टियाँ: चौघड़िया। छड़ें: मुहूर्त और काल, अपने असली समय पर।
- सूर्योदय से पहले, गुरु 4 जून: ब्रह्म मुहूर्त, 03:39–04:16, शुभ
- शुभ, 04:53–06:44
- रोग, अशुभ, 06:44–08:35
- उद्वेग, अशुभ, 08:35–10:25
- चर, सामान्य, 10:25–12:16
- लाभ, शुभ, 12:16–14:07
- अमृत, शुभ, 14:07–15:57
- काल, अशुभ, 15:57–17:48
- शुभ, 17:48–19:39
- अमृत, शुभ, 19:39–20:48
- चर, सामान्य, 20:48–21:57
- रोग, अशुभ, 21:57–23:07
- काल, अशुभ, 23:07–00:16 शुक्र
- लाभ, शुभ, 00:16–01:25 शुक्र
- उद्वेग, अशुभ, 01:25–02:34 शुक्र
- शुभ, 02:34–03:44 शुक्र
- अमृत, शुभ, 03:44–04:53 शुक्र
- यमगण्ड, 04:53–06:44, अशुभ
- गुलिक काल, 08:35–10:25, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 09:48–10:47, अशुभ
- अभिजीत मुहूर्त, 11:46–12:45, शुभ
- राहु काल, 14:07–15:57, अशुभ
- दुर्मुहूर्त, 15:43–16:42, अशुभ
- अगले दिन का ब्रह्म मुहूर्त, 03:39–04:16 शुक्र
हर मान कैसे निकलता है
Baoding में संकष्टी चतुर्थी गुरु 4 जून को क्यों है?
संकष्टी चतुर्थी गुरु 4 जून को है: उस रात चंद्रोदय पर चतुर्थी है।
संकष्टी का व्रत चंद्रोदय पर खोला जाता है। चतुर्थी बुध 3 जून को 23:51 से शुक्र 5 जून को 02:00 तक है, इसलिए चंद्रोदय पर वह केवल गुरु 4 जून को है, 22:58 पर। संकष्टी चतुर्थी का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; चंद्रोदय Tithika की परिपाटी है।
गुरु 4 जून को कौन सी तिथि है? कृष्ण चतुर्थी
सूर्योदय पर चंद्रमा सूर्य से 218.3° आगे था: कृष्ण चतुर्थी।
चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12° आगे बढ़ता है। हर 12° की बढ़त एक तिथि है: 216°–228° उन्नीसवीं है, कृष्ण चतुर्थी। दिन वही तिथि लेता है जो उसके सूर्योदय पर हो, यहाँ 04:53। तृतीया उससे पहले 23:51 बुध पर समाप्त हुई। चतुर्थी 02:00 शुक्र को समाप्त होगी, जब बढ़त 228° होगी। बढ़त 31 मई की पूर्णिमा पर 180° पार कर गई, इसलिए चंद्रमा घट रहा है: कृष्ण पक्ष।
गुरु 4 जून को ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे है? 03:39–04:16
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात के 15 बराबर भागों में से चौदहवाँ है: 03:39–04:16।
बुध 3 जून की रात सूर्यास्त 19:38 बुध से सूर्योदय 04:53 तक थी, 9 घं 15 मि। इसे 37 मि के 15 मुहूर्तों में बाँटने पर उसका चौदहवाँ ब्रह्म मुहूर्त है, अंतिम से पहला।
दिन के 15 मुहूर्त
गुरु 4 जून को अभिजीत मुहूर्त कब है? 11:46–12:45
अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से आठवाँ है, मध्याह्न वाला: 11:46–12:45।
गुरु 4 जून को दुर्मुहूर्त कब है? 09:48–10:47
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:48–10:47 और 15:43–16:42।
गुरु 4 जून को दुर्मुहूर्त कब है? 15:43–16:42
दुर्मुहूर्त दिन के 15 बराबर भागों में से छठा और बारहवाँ है: 09:48–10:47 और 15:43–16:42।
यहाँ दिन, 04:53 से 19:39, 15 मुहूर्तों में बँटता है, हर एक 59 मि का। अभिजीत मुहूर्त आठवाँ है, बीच वाला। गुरुवार को दुर्मुहूर्त छठा और बारहवाँ है, 09:48–10:47 और 15:43–16:42।
गुरु 4 जून का चौघड़िया: कौन सा शुभ है?
04:53–06:44 शुभ है, जिसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला, शुभ माना जाता है।
यहाँ दिन, 04:53 से 19:39, 1 घं 50 मि के 8 चौघड़ियों में बँटता है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
यहाँ रात, 19:39 से 04:53 शुक्र, 1 घं 9 मि के 8 चौघड़ियों में बँटती है। उनके नाम वार से शुरू होने वाले एक तय क्रम में आते हैं, और हर नाम शुभ, सामान्य या अशुभ माना जाता है।
दिन के 8 भाग
गुरु 4 जून को राहुकाल कब है? 14:07–15:57
राहु काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से छठा है: 14:07–15:57।
गुरु 4 जून को यमगंड कब है? 04:53–06:44
यमगण्ड गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से पहला है: 04:53–06:44।
गुरु 4 जून को गुलिक काल कब है? 08:35–10:25
गुलिक काल गुरुवार के दिन के 8 बराबर भागों में से तीसरा है: 08:35–10:25।
यहाँ दिन 04:53 से 19:39 तक है, 14 घं 46 मि। इसे 1 घं 50 मि के 8 बराबर भागों में बाँटने से वार के अनुसार काल मिलते हैं: गुरुवार को राहु काल छठा भाग है, यमगण्ड पहला और गुलिक काल तीसरा।
सूर्योदय और सूर्यास्त
गुरु 4 जून को सूर्योदय कितने बजे है? 04:53
यहाँ दिन: सूर्योदय 04:53, सूर्यास्त 19:39, 14 घं 46 मि का दिन।
गुरु 4 जून को सूर्यास्त कितने बजे है? 19:39
यहाँ दिन: सूर्योदय 04:53, सूर्यास्त 19:39, 14 घं 46 मि का दिन।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 46 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 14 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त इसी स्थान के लिए निकाले जाते हैं। दिन 14 घं 46 मि का है और अगले सूर्योदय तक रात 9 घं 14 मि की; हर काल और चौघड़िया इन्हीं दो अवधियों से कटता है।
गुरु 4 जून को कौन सा नक्षत्र है? उत्तराषाढा
सूर्योदय पर चंद्रमा 267.4° पर था: उत्तराषाढा, पद 1।
स्थिर तारे चंद्रमा के पथ को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटते हैं, हर एक में 3°20′ के 4 पद। उत्तराषाढा 266°40′–280°00′ तक है; चंद्रमा 266°40′ पर उसके पद 1 में आया। वह 06:11 शुक्र को निकलेगा, श्रवण में।
गुरु 4 जून को कौन सा योग है? शुक्ल
सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा मिलकर 316.5° थे: शुक्ल।
तारों के बीच सूर्य और चंद्रमा के स्थान जोड़ें: 49.1° + 267.4° = 316.5°। 13°20′ के 27 भागों में बँटा यह योग देता है: 306°40′–320°00′ चौबीसवाँ है, शुक्ल। यह 11:33 को समाप्त होता है, फिर ब्रह्म।
गुरु 4 जून को कौन सा करण है? बव
सूर्योदय पर बढ़त 218.3° थी: चतुर्थी का पहला आधा, बव।
करण तिथि का आधा है: चंद्रमा की बढ़त के 6°, इसलिए चतुर्थी का पहला आधा बव है और दूसरा बालव। बव 12:58 तक है, जब बढ़त 222° होगी; बालव 02:00 शुक्र तक।
गुरु 4 जून को कौन सा वार है, और कब से? गुरुवार
यह दिन गुरुवार को सूर्योदय, 04:53, पर शुरू हुआ: गुरुवार।
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, आधी रात से आधी रात तक नहीं। यह दिन 04:53 से 04:53 शुक्र तक है, इसलिए आधी रात के बाद के घंटे भी गुरुवार के हैं।
गुरु 4 जून को कौन सा हिंदू महीना है (अमांत)? ज्येष्ठ (अधिक)
17 मई और 15 जून की अमावस्याओं के बीच कोई संक्रांति नहीं: अधिक ज्येष्ठ।
सामान्यतः एक मास में एक संक्रांति होती है, सूर्य का नई राशि में प्रवेश। 17 मई 04:01 रवि से 15 जून 10:54 सोम तक सूर्य वृषभ में रहा; मिथुन में वह अमावस्या के बाद 15 जून 15:22 सोम को गया। बिना संक्रांति का मास अधिक ज्येष्ठ है, जो ज्येष्ठ से पहले आता है।
गुरु 4 जून को कौन सा हिंदू महीना है (पूर्णिमांत)? ज्येष्ठ (अधिक)
पूर्णिमा से पूर्णिमा गिनने पर यह कृष्ण पक्ष ज्येष्ठ (अधिक) का है।
पूर्णिमान्त मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए उसका कृष्ण पक्ष पहले आता है। उसका नाम उस अमान्त मास का होता है जिसमें उसका दूसरा आधा पड़ता है: 15 जून की अमावस्या, सूर्य वृषभ में, ज्येष्ठ (अधिक) शुरू करती है। तब तक यह कृष्ण पक्ष यहाँ ज्येष्ठ (अधिक) है, और अमान्त गणना में ज्येष्ठ (अधिक)।
गुरु 4 जून को कौन सा संवत है? विक्रम 2083 · शक 1948
विक्रम संवत 2083 19 मार्च 2026 की चैत्र अमावस्या से शुरू हुआ।
संवत वर्ष चैत्र से शुरू होता है, वह मास जिसकी अमावस्या सूर्य को मीन में पाती है: 19 मार्च 2026, 09:23 गुरु। तब से सूर्य तारों के बीच 74.9° चला है। विक्रम संवत उस वर्ष को 2083 गिनता है; शक संवत 1948।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
गुरु 4 जून को चंद्रोदय कितने बजे है? 22:58
चंद्रमा यहाँ 22:58 पर उदय होता है।
गुरु 4 जून को चंद्रास्त कितने बजे है? 07:42
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 07:42 पर अस्त हुआ; वह फिर 22:58 पर उदय होगा, इसलिए इस दिन का चंद्रोदय रात में पड़ता है।
चंद्रमा सूर्योदय पर ऊपर था और 07:42 पर, दिन में, अस्त होता है; वह फिर 22:58 पर उदय होगा।