Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में योगिनी एकादशी 2025 शनि 21 जून या रवि 22 जून
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में योगिनी एकादशी 2025 कब है?
स्मार्त
शनिवार 21 जून
वैष्णव
रविवार 22 जून
आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Sevan में शनि 21 जून का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · रविवार 22 जून
वैष्णव · सोमवार 23 जून
योगिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शनिवार 21 जून
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05:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 22 जून
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08:11–20:34पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- रविवार 22 जून
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05:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 23 जून
-
05:30–20:34पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में योगिनी एकादशी शनि 21 जून या रवि 22 जून को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में योगिनी एकादशी शनि 21 जून को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव रवि 22 जून को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 05:49 से। एकादशी: 05:49 से 02:58 रवि तक।
एकादशी 02:58 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:49 शनि से 02:58 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शनि 21 जून को 05:49 पर, उस सूर्योदय (05:29) के बाद, लगती है और रवि 22 जून को 02:58 पर, अगले सूर्योदय (05:29 रवि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शनि 21 जून।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 21 जून को अरुणोदय (03:53–05:29) में दशमी है। रवि 22 जून को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 02:58 तक, फिर द्वादशी): रवि 22 जून।
व्रत का पारण
स्मार्त · रवि 22 जून, 08:11–20:34 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 22 जून 02:58 से रवि 22 जून 23:52 तक है; हरिवासर 08:11 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:34) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:30 तक, करते हैं।
वैष्णव · सोम 23 जून, 05:30–20:34 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी सोम 23 जून को 23:52 रवि पर, रात में, अरुणोदय (03:54) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:30) से सूर्यास्त (20:34) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।