tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में योगिनी एकादशी 2020 पारण समय 06:41⁠–⁠17:46, बुध 17 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में योगिनी एकादशी 2020 कब है?

मंगलवार 16 जून

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 16 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 17 जून

पारण समय
06:41–17:46
11 घं 5 मि · Tithika की परिपाटी

योगिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 16 जून
  • 06:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 17 जून
  • 06:41–17:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंयोगिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में योगिनी एकादशी मंगल 16 जून को क्यों है?

योगिनी एकादशी मंगल 16 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:10 सोम से 23:20 तक।

एकादशी 23:20 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 16 जून को सूर्योदय पर है, 06:41: मंगल 16 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:10 सोम पर, उससे (05:05–06:41) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 17 जून, 06:41–17:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 16 जून 23:20 से गुरु 18 जून 01:09 तक है; हरिवासर 05:48 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 17 जून को सूर्योदय (06:41) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:54 तक, करते हैं।

नियम

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।