Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में योगिनी एकादशी 2016 गुरु 30 जून या शुक्र 1 जुलाई
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में योगिनी एकादशी 2016 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 30 जून
वैष्णव
शुक्रवार 1 जुलाई
आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Sevan में गुरु 30 जून का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 1 जुलाई
वैष्णव · शनिवार 2 जुलाई
योगिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 30 जून
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05:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 1 जुलाई
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07:01–20:34पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 1 जुलाई
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05:33व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 2 जुलाई
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05:33–20:34पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में योगिनी एकादशी गुरु 30 जून या शुक्र 1 जुलाई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में योगिनी एकादशी गुरु 30 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 1 जुलाई को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:29 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:29 से 01:44 शुक्र तक।
एकादशी 01:44 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:29 गुरु से 01:44 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 30 जून को सूर्योदय पर है, 05:32: गुरु 30 जून।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 30 जून को दशमी 04:29 तक है, अरुणोदय (03:56–05:32) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 01:44 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 1 जुलाई को व्रत रखते हैं: शुक्र 1 जुलाई।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 1 जुलाई, 07:01–20:34 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 1 जुलाई 01:44 से शुक्र 1 जुलाई 22:53 तक है; हरिवासर 07:01 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:34) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:33 तक, करते हैं।
वैष्णव · शनि 2 जुलाई, 05:33–20:34 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 2 जुलाई को 22:53 शुक्र पर, रात में, अरुणोदय (03:57) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:33) से सूर्यास्त (20:34) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।