tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में योगिनी एकादशी 1990 सोम 18 जून या मंगल 19 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में योगिनी एकादशी 1990 कब है?

स्मार्त

सोमवार 18 जून

वैष्णव

मंगलवार 19 जून

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में सोम 18 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · मंगलवार 19 जून

पारण समय
10:57–17:46
6 घं 49 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · बुधवार 20 जून

पारण समय
06:42–17:46
11 घं 4 मि · Tithika की परिपाटी

योगिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • सोमवार 18 जून
  • 06:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 19 जून
  • 10:57–17:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • मंगलवार 19 जून
  • 06:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 20 जून
  • 06:42–17:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंयोगिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में योगिनी एकादशी सोम 18 जून या मंगल 19 जून को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में योगिनी एकादशी सोम 18 जून को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 19 जून को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:43 से। एकादशी: 08:43 से 05:46 मंगल तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:46 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 08:43 सोम से 05:46 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह सोम 18 जून को 08:43 पर, उस सूर्योदय (06:41) के बाद, लगती है और मंगल 19 जून को 05:46 पर, अगले सूर्योदय (06:41 मंगल) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: सोम 18 जून।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 18 जून को अरुणोदय (05:05–06:41) में दशमी है। मंगल 19 जून को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:46 तक, फिर द्वादशी): मंगल 19 जून।

व्रत का पारण

स्मार्त · मंगल 19 जून, 10:57–17:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 19 जून 05:46 से बुध 20 जून 02:28 तक है; हरिवासर 10:57 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:54 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · बुध 20 जून, 06:42–17:46 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी बुध 20 जून को 02:28 पर, रात में, अरुणोदय (05:06) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:42) से सूर्यास्त (17:46) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।