tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में योगिनी एकादशी 1985 पारण समय 08:06⁠–⁠17:45, शुक्र 14 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में योगिनी एकादशी 1985 कब है?

गुरुवार 13 जून

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 13 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 14 जून

पारण समय
08:06–17:45
9 घं 39 मि · Tithika की परिपाटी

योगिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 13 जून
  • 06:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 14 जून
  • 08:06–17:45पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंयोगिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में योगिनी एकादशी गुरु 13 जून को क्यों है?

योगिनी एकादशी गुरु 13 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:55 बुध से 01:29 शुक्र तक।

एकादशी 01:29 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 13 जून को सूर्योदय पर है, 06:40: गुरु 13 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:55 बुध पर, उससे (05:04–06:40) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 14 जून, 08:06–17:45 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 14 जून 01:29 से शनि 15 जून 03:56 तक है; हरिवासर 08:06 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:45) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:53 तक, करते हैं।

नियम

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।